मुरैना। खानदानी दुश्मनियों में एक दूसरे का खून बहा देने वाली परंपरा को खत्म करने का बीड़ा एक संत ने उठाया है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के चंबल किनारे वाले ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी वैमनस्यता और बैरभाव को खत्म करने के लिए इस संत ने रामधुन का सहारा लिया है। ये संत हैं हरिगिरि महाराज। इस संत की एक आवाज पर मध्यप्रदेश और राजस्थान के सैकड़ों गांव मृत्युभोज, वैवाहिक फिजूल खर्ची, शराब और नशे की लत सहित दहेज जैसी कुरीति से दूर हो चुके हैं। अब बारी सदियों पुराने उस दाग को मिटाने की है जो चंबल के माथे पर लगा हुआ था।

भारत में चंबल घाटी से लोगों का परिचय ज्यादातर हिंदी सिनेमा के जरिए हुआ था। हिंदी सिनेमा में जिस चंबल को दिखाया गया, उसमें बीहड़ों में दौड़ते घोड़े, कंधे पर दुनाली बंदूक लिए डाकू जैसी कई चीजें दिखाई गईं। इसमें बहुत कुछ काल्पनिक था और अतिसयोक्ति पूर्ण भी था। इन फिल्मों की पटकथा में अगर चंबल से मिलता जुलता कुछ था तो वह थी चंबल की एक परंपरा 'खून का बदला खून' समय के साथ यहां के लोग शिक्षित हुए और यह परंपरा मिटती चली गई। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी बैर और वैमनस्यता इस परंपरा के अवशेष के तौर पर अभी भी मौजूद हैं। लेकिन संत हरिगिरि महाराज ने इन अवशेषों की जड़ों को रामधुन के जरिए उखाड़ने का महासंकल्प लिया है।

संत की एक आवाज पर सैकड़ों लोग इस संकल्प को पूरा करने उठ खड़े हुए हैं। 24 गांवों ने आगे आकर रामधुन का आयोजन करने का संकल्प लिया है।

यह है रामधुन से वैमनस्यता मिटाने का तरीका

हाल ही में आयोजित एक महापंचायत में संत हरिगिरि महाराज ने 24 गांवों में अखंड ज्योति जलाकर 24 घंटे की रामधुन आयोजित करने को कहा। इस आयोजन में गांव का हर परिवार शामिल होगा। वे परिवार भी इसमें शामिल होंगे, जिनमें लंबी दुश्मनियां चली आ रही हैं। हर गांव में इस रामधुन में आने वाले ऐसे परिवारों से बैर भूलकर भगवान की शरण लेने की अपील की जाएगी और उन्हें संकल्प भी दिलाया जाएगा।

गांव की वैमनस्यता मिटाने वाले 24 घंटे के इस कीर्तन के बाद अखंड ज्योति को पड़ोसी गांवों को सौंप दिया जाएगा। इस दौरान गावों के बीच की वैमनस्यता भी मिटेगी। अगले 24 घंटे तक प़ड़ोसी गांवों में रामधुन का कीर्तन होगा और ये गांव अपने पड़ोस के दूसरे गांवों को इसी तरह यह ज्योति सौंप देंगे। इस तरह मध्यप्रदेश और राजस्थान के चंबल किनारे वाले करीब 222 गांवों तक यह रामधुन शांति का संदेश लेकर जाएगी।

चंबल को इस तरह बदल दिया संत ने

संत हरिगिर महाराज ने मध्यप्रदेश और राजस्थान के चंबल किनारे वाले 222 गांवों में साल 2011 में मृत्युभोज बंद करने का अभियान चलाया। यह पूरी तरह सफल रहा। इसके बाद शादियों में होने वाली फिजूल खर्ची को भी बंद करवाया गया। साल 2017 में चंबल के इन गांवों में संत हरिगिरि की अपील पर शराब बंदी हुई, जो पूरी तरह सफल रही। 16 मई 2018 से संत हरिगिरि महाराज ने दहेज बंदी का सफल अभियान चलाया और अब चंबल में आपसी बैर को खत्म करने का काम किया जा रहा है।

क्या है रामधुन

रामधुन वैष्णवों में संकीर्तन के सहज मंत्र हैं। इसमें से एक है- श्रीराम जय राम, जय-जय राम। जबकि दूसरा मंत्र है- सीताराम-सीताराम, सीताराम जय सीताराम। राधेश्याम-राधेश्याम, राधेश्याम जय राधेश्याम। इसे निरंतर 24 घंटे तक लोग अखंड ज्योति जलाकर गाते हैं।

चंबल में हत्या और हत्या के प्रयास का हाल

वर्ष हत्या हत्या के प्रयास

2016 40 71

2017 45 71

2018 44 62