शिवप्रताप सिंह जादौन, मुरैना। चंबल अभयारण्य के सबसे सुरक्षित राजघाट पर माफिया ने रेत की लूट मचा दी है। चुनाव से पहले माफिया ने जेसीबी और स्क्रेपर से यहां खनन शुरू किया था और एक महीने में ही तीन किमी लंबाई में चंबल किनारों को रेत विहीन कर दिया। यह वही रेत थी, जहां घड़ियालों के दर्जनों क्षेत्र आबाद थे। यहां रहने वाले करीब 50 घड़ियाल बेघर होने के बाद पलायन कर चुके हैं। सफारी में आने वाले सैलानियों को भी यहां घड़ियाल नजर नहीं आ रहे।

माफिया ने राजघाट पर चंबल नदी तक पहुंचने के लिए रैंप बनाए हैं। एक के पीछे एक रेत के कई ट्रैक्टर इसी रैंप से आते-जाते दिखते हैं। राजघाट पर बोट क्लब से सौ मीटर दूरी से शुरू हुआ खनन तीन किमी तक दिखाई देता है। नदी के तटबंध रेत खुदाई के बाद कई जगह सिर्फ दो से तीन फीट चौड़े ही रह गए हैं। यानी पानी अब यहां से अपनी सीमा लांघ सकता है। नदी के किनारे खनन में पांच जेसीबी और दो स्क्रेपर लगे हुए हैं और 50 के करीब ट्रैक्टर रेत ढो रहे हैं।

12 क्षेत्र नष्ट

जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रोफसर आरजे राव के एक शोध के मुताबिक, राजघाट एक महत्वपूर्ण घड़ियाल साइट है। यहां 45 से 50 घड़ियाल हर समय निवास करते हैं, लेकिन खनन से करीब 12 घड़ियाल क्षेत्र नष्ट हुए हैं। यही कारण है कि यहां से घड़ियाल पलायन कर रहे हैं। खास बात यह है कि घड़ियाल देखने आने वाले लोगों को तीन किमी तक कोई जलीय जीव घाट पर नहीं दिख रहा है।

उजड़े घर के पास बैठा दिखा एक घड़ियाल

नईदुनिया के मौके पर पहुंचने पर राजघाट से जैतपुर की ओर चलने पर जहां खनन हो रहा था, वहां एक घड़ियाल घाट पर बैठा दिखा। इसके पीछे मशीनें गरज रहीं थीं। मशीन के नजदीक आते ही यह घड़ियाल भी पानी में चला गया। इस खनन को रोकने के लिए दूर-दूर तक यहां न तो पुलिस दिखी और न ही वन विभाग को मिली एसएएफ (विशेष सशस्त्र बल) नजर आई।

- वहां खनन हो रहा है। हमारा फोर्स वहां पहुंचता है तो वे भाग जाते हैं और फोर्स जाते ही लौट आते हैं। मैं आज राजघाट पर ही हूं और मुआयना कर रहा हूं। - पीडी गेब्रियल, डीएफओ, मुरैना