मुरैना। डिप्टी रेंजर सूबेदार सिंह कुशवाह को जिस ट्रैक्टर से कुचला गया है, वो ट्रैक्टर आरोपित ड्राइवर देवेन्द्र के पिता रामकुमार के नाम से है। उसने करीब 7 साल पहले ट्रैक्टर लोन पर लिया था। बड़ी बात ये है कि ड्राइवर देवेन्द्र के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं है। यह खुलासा एसपी अमित सांघी ने प्रेसवार्ता में किया। एसपी के मुताबिक ट्रैक्टर खरीदने के बाद से ही आरोपितगण इसका उपयोग चंबल के रेत का अवैध परिवहन करने में कर रहे थे। उसके पास कोई ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं है।

पिता व अन्य करते थे पायलेटिंग, देवेन्द्र चलाता था ट्रैक्टर

एसपी के मुताबिक रेत के अवैध खनन व परिवहन में पूरा परिवार ही लगा था। देवेन्द्र ट्रैक्टर चलाता था और उसका नाबालिग छोटा भाई ट्रैक्टर पर उसके साथ रहता था। देवेन्द्र का पिता रामकुमार व उसका एक साथ रेत लाते समय ट्रैक्टर की पायलेटिंग करता था। जिससे हाइवे आदि पर खतरा होने की स्थिति में ट्रैक्टर को बचाया जा सके।

तकरीबन पूरा गांव ही करता है रेत का अवैध खनन व परिवहन

एसपी ने बताया कि आरोपितों का गांव गड़ोरा के तकरीबन सभी ग्रामीण रेत के अवैध खनन व परिवहन में लगे हुए हैं। कार्रवाई के लिए पुलिस जब गांव में पहुंचती थी तो सभी ग्रामीण गायब हो जाते थे। ऐसे में स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

बाइक भी थी आरोपित रामकुमार की

आमतौर पर रेत के परिवहन के दौरान पायलेटिंग करने वाले माफिया के लोग चोरी की बाइक का उपयोग करते हैं। लेकिन इस मामले में एसपी ने बताया कि बाइक आरोपित रामकुमार की ही थी। बाइक सीडी डीलक्स है। बाइक को भी बरामद करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

दिन में दो से तीन बार रेत ढोते थे आरोपित

आरोपित देवेन्द्र व उसका पिता रामकुमार दिन में दो से तीन बार ट्रैक्टर से अवैध रूप से रेत का परिवहन करते थे। ये लोग रेत को मुरैना व ग्वालियर तक बेचने के लिए जाते थे। हालांकि हर बार ये वन विभाग व पुलिस के कर्मचारियों से बचकर जाते थे। घटनावाले दिन उन्होंने डिप्टी रेंजर को कुचल दिया।

सोनालिका ट्रैक्टर के ड्राइवर पर भी होगा मामला दर्ज

डिप्टी रेंजर को कुचलने वाले स्वराज ट्रैक्टर के साथ सोनालिका ट्रैक्टर भी था। इस ट्रैक्टर को पुलिस ने घटना वाले दिन ही धनेला गांव के पास से जब्त कर लिया था। एसपी के मुताबिक इस ट्रैक्टर के ड्राइवर को भी आरोपित बनाया जाएगा। हालांकि अभी पुलिस पता लगा रही है कि ट्रैक्टर किसका था और उसे कौन चला रहा था।

रेत माफिया के खौफ में वन कर्मी, बड़ी मुश्किल से किया पुलिस को सहयोग

रेत माफिया के द्वारा डिप्टी रेंजर को कुचलने के बाद से वन कर्मी खासतौर से डिप्टी रेंजर के साथ के वन रक्षक आदि काफी खौफ में है। बताया जाता है कि ट्रैक्टर की शिनाख्ती व बयान देने में भी ये कर्मचारी डरे हुए थे और पुलिस का सहयोग नहीं कर थे। हालांकि किसी तरह पुलिस ने इन लोगों को तैयार किया।

यह भी कहानी आई है सामने

रेत को अवैध रूप से ढोने वाले ट्रैक्टरों व ट्रकों के मालिकों व ड्राइवरों को सफेदपोश लोग कुछ मासिक शुल्क लेकर संरक्षण देते हैं। यही वजह रही कि घटना के बाद से ये लोग आरोपितों को सरेंडर कराने के प्रयास में लगे थे। रविवार को तो ये लोग सिविल लाइन थाने में भी देखे गए थे। बताया जाता है कि पुलिस ने इन लोगों के सहयोग से ही आरोपितों को पकड़ा है। हालांकि इस बात को पुलिस व कर्मचारी स्वीकार नहीं कर रहे हैं।