सोशल मीडिया पर फिलहाल चुनावी मुद्दा छाया हुआ है। कोई कांग्रेस तो कोई भाजपा को लेकर पोस्ट कर रहा है। फेसबुक पर अमित गुप्ता लिखते हैं कि जो टिकट के लिए नेताओं बगावती सुर समाजसेवा नहीं बल्कि खुद की सेवा के लिए ही इशारा करते हैं। लालबत्ती में बैठकर ही समाजसेवा का पट्टा सही नहीं है। उधर, विभाष लिखते हैं कि पैसा सबको चाहिए , बिना पैसा सब सून, पैसा बिना न काम पड़े, नेता, पुलिस, कानून। अजीता सेन ने लिखा कि राजनिती को देखकर परम ज्ञान की प्राप्ति हुई। उनके लिए वोट ही नोट का कारक होता है। वोटर के हिस्से में तो खोट ही आनी है।