ग्वालियर । हमारे शहर में कई ऐसे संग्रहालय हैं, जिनमें प्राचीन कलाकृतियां, शस्त्र, धरोहर और जीवाश्मों के अवशेष रखे हुए हैं। चाहे किला स्थित गूजरी महल की बात की जाए, जयविलास म्यूजियम या फिर नगर निगम संग्रहालय की, यहां कई वस्तुएं हैं, जिनका एक इतिहास है। इनके कई ऐसे रोचक किस्से भी हैं, जिन्हें जानकर सैलानी आश्चर्यचकित हो सकते हैं।

वर्ल्ड म्यूजियम डे पर 'नईदुनिया लाइव पाठकों को कुछ प्रमुख संग्रहालयों की उन चुनिंदा प्राचीन वस्तुओं की जानकारी उपलब्ध करा रहा है, जो इन संग्रहालयों की शान हैं। इनसे रूबरू हुए बिना संग्रहालयों का इतिहास कुछ अधूरा सा रह जाता है।

30 मार्च 1943 का है किस्सा -

नगर निगम संग्रहालय के गाइड अभिषेक शर्मा के अनुसार यहां रखा उल्का पिंड का टुकड़ा संग्रहालय पहुंचने वाले सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह उल्का पिंड 30 मार्च 1943 को तहसील पछार, ग्राम गरोली से मिला था। जब यह गिरा था, उस समय आसमान से बम फटने जैसी आवाज आई थी। इससे ग्रामीण डर गए थे। यह पिंड जमीन में डेढ़ फीट नीचे धंस गया था, जिसे ग्रामीणों ने बाहर निकाला था। संग्रहालय में जो टुकड़ा रखा हुआ है, उसका वजन चार सेर का है। यह निकल मेटल से बना हुआ है।

फ्रांस, जापान, ब्रिटेन में जा चुकी है शालभंजिका -

गूजरी महल में आने वाले विदेशी सैलानियों के बीच सबसे प्रमुख आकर्षण है शालभंजिका की प्रतिमा। प्रतिमा के चेहरे पर हमेशा मुस्कराहट प्रतीत होने की वजह से इसे इंडियन मोनालिसा भी कहा जाता है। यह प्रतिमा बेशकीमती है, जिसकी वजह से इसे कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है। शालभंजिका को फ्रांस, जापान और ब्रिटेन में भी प्रदर्शित किया जा चुका है। विदेश में ले जाते समय प्रतिमा का 5 करोड़ का इंश्योरेंस किया गया था।

डाइनिंग टेबल पर चलती थी चांदी की ट्रेन, सर्व करती थी खाना -

जयविलास पैलेस में यूं तो बहुत कुछ देखने को है, लेकिन इनमें से चांदी की ट्रेन और झूमर से जुड़े रोचक किस्से भी हैं। यहां रखी चांदी की ट्रेन कभी डाइनिंग टेबल पर बिछाई गई पटरियों पर धीमी गति से चला करती थी। ट्रेन में खाने-पीने का सामान भरा होता था। यदि किसी व्यक्ति को कुछ सामान चाहिए होता था तो वह ट्रेन की बोगी के ढक्कन को जैसे ही ऊपर से खोलता था, वह रुक जाती थी। ढक्कन बंद करने पर दोबारा चल पड़ती थी। इस ट्रेन से मेहमानों को लिकर, सिगार और बेवरेज सर्व किया जाता था। ट्रेन बिजली से चलती है। इसके इंजन के साथ-साथ बोगी भी चांदी की है

दस हाथी चढ़े थे, तब लग पाया था झूमर -

जयविलास पैलेस के दरबार हॉल में जो झूमर लगा है, उसका वजन 3500 किलो है। जानकारों का कहना है कि इसे छत पर लगाने से पहले 10 हाथियों को सात दिनों तक महल की छत पर चढ़ाकर रखा गया था। ताकि यह पता चल सके कि छत इतना अधिक वजन सहन कर पाएगी या नहीं। जब हाथियों के वजन से छत को कोई क्षति नहीं पहुंची, तब इस झूमर को लगाया गया। जयविलास पैलेस में आने वाले देशी-विदेशी सैलानियों के लिए यह आकर्षण का केंद्र रहा है।


स्टेट टाइम का है दुर्लभ नारियल -

संग्रहालय में एक और ऐसी चीज है, जिस पर सैलानियों की नजर तो पड़ती है, लेकिन वह इसका महत्व नहीं जान पाते। यहां कांच के एक बक्शे में ज्वॉइंट नारियल (बिना जटा वाला) रखा है। संग्रहालय को यह स्टेट टाइम में मिला था। संग्रहालय के गाइड के अनुसार प्राचीन समय में ऋषि-मुनि इसी तरह के ज्वॉइंट नारियल से अपना कमंडल बनाया करते थे। संग्रहालय में 122 प्रकार के पक्षियों की प्रजातियां, 91 अप्रवासी व 31 प्रवासी पक्षियों के अवशेषों का संग्रह है। इसके साथ ही अन्य जीवजंतुओं की खाल हैं। इसके साथ ही 1857 की क्रांति के हथियार और महारानी लक्ष्मीबाई ने जिन लोहे से बने वस्त्रों को पहनकर अंग्रेजों से युद्ध लड़ा था, वह भी यहां मौजूद हैं। इसके साथ-साथ कई कलाकृतियां, तैल चित्र, अखबारों के संग्रह की दीर्घा है।