उमरिया।

बदलते मौसम में जिले के करकेली और मानपुर के कुछ गांवों में उल्टी-दस्त का प्रकोप बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार करकेली जनपद के कोहका और मानपुर जनपद के बदरेहल पठारी में उल्टी-दस्त से आधा दर्जन लोगों के बीमार होने की जानकारी मिली है। इन लोगों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में लाया गया जहां से इलाज के उपरांत छुट्टी दे दी गई। गौरतलब है कि जिले में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम चलाया जा रहा है और दूसरी तरफ ग्र्राम्यांचलों में उल्टी-दस्त से लोग परेशान हो रहे हैं।

पिछले दिनों हुई बारिश के बाद अब कड़ी धूप हो रही है। इस बदलते मौसम में लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत देखने को मिल रही है। यह स्थिति शहर में तो कम है लेकिन ग्राम्यांचलों में सबसे ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इन मरीजों का ग्रामीण स्तर पर इलाज किया जा रहा है। जो लोग गंभीर होते हैं उन्हें या तो जिला अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जाता है या फिर उन्हें जबलपुर रेफर कर दिया जाता है। उमरिया जिले में डॉक्टरों की कमी के कारण ओपीडी में आने वाले मरीजों को टेकल करने में परेशानी होती है।

अस्पताल में कराया भर्ती

जिले के जनपद पंचायत करकेली अंतर्गत ग्राम कोहका और मानपुर जनपद के बदरेहल पठारी निवासी शिवकुमार यादव, नरबदिया बैगा, गेंदिया बाई बैगा, प्रदीप यादव, सुमन सिंह गोंड़, प्रेमबाई निवासी कोहका समेत अन्य लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत होने पर जिला अस्पताल लाया गया जहां उन्हें उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। डॉक्टर ने इन्हें सलाह दी है कि उल्टी-दस्त से बचने के लिए तली भुनी चीजें न खाएं और गंदे पानी का सेवन तो बिल्कुल भी करें। तली भुनी चीजें और गंदे पानी के कारण ही उल्टी-दस्त की शिकायत होती है।

बच्चों में डायरिया

उल्टी-दस्त के अलावा गांवों में रहने वाले छोटे छोटे बच्चों को डायरिया का भी खतरा है। पिछले दिनों आई एक रिपोर्ट के अनुसार उमरिया डायिरया के मामले में प्रवेश में अव्वल है। यहां के 0 से 5 साल तक के 80 प्रतिशत बच्चे डायरिया से पीड़ित हैं। सबसे ज्यादा डायरिया का प्रकोप आकाशकोट अंचल में है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां पर पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। नाले का गंदा और दूषित पानी छानकर पीने के कारण बच्चे सबसे ज्यादा डायरिया से प्रभावित हो जाते हैं। इसके अलावा अभी से न्युमोनिया का खतरा भी बच्चों को सता रहा है।