एमसीआई की टीम ने किया निरीक्षण, डॉ. मरावी को हमीदिया का अधीक्षक बनाने पर फिर उठाए सवाल

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

हमीदिया अस्पताल के स्थायी अधीक्षक नहीं होने की वजह से कॉलेज को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की मान्यता मिलने में अड़चन आ सकती है। एमबीबीएस की 150 सीटों की मान्यता के लिए बुधवार को हमीदिया पहुंची तीन सदस्यीय टीम ने कहा है कि मौजूदा अधीक्षक डॉ.दीपक मरावी एमसीआई मापदंड के अनुसार इस पद के फिट नहीं हैं। पिछले साल भी एमसीआई ने आपत्ति की थी। इसके बाद शासन ने एमसीआई को पत्र लिखकर कहा था कि डॉ. मरावी की जगह स्थायी अधीक्षक रखा जाएगा। कॉलेज में डीन भी स्थायी नहीं हैं।

बता दें कि मेडिकल कॉलेज से संबद्घ अस्पताल के लिए अधीक्षक को कम से कम 10 साल का प्रशासनिक अनुभव होना चाहिए। डॉ. मरावी इस पर खरे नहीं उतरते। टीम ने कॉलेज के अन्य फैकल्टी मेंबर की योग्यता संबंधी दस्तावेज भी चैक किए। कॉलेज में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व सीनियर रेसीडेंट्स एमसीआई के मापदंड से 5 से 10 फीसदी तक कम हैं। टीम के एक सदस्य ने हमीदिया अस्पताल, एक ने औबेदुल्लांगज स्थित रूरल ट्रेनिंग सेंटर और सुल्तानिया अस्पताल का निरीक्षण किया। टीम गुरुवार को भी कॉलेज में रहेगी। यहां से ही फाइनल रिपोर्ट बनाकर एमसीआई को भेजी जाएगी।

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एमसीआई टीम के एक सदस्य हमीदिया अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में निरीक्षण के लिए पहुंचे। यहां उनके साथ विभाग की प्रमुख डॉ. रीनी मलिक व अन्य डॉक्टर थे। सदस्य ने पूछा माइक्रोस्कोप कितने हैं। डॉ. मलिक ने कुछ माइक्रोस्कोप दिखाए। कुछ दूसरी जगह रखे माइक्रोस्कोप को मिलाकर संख्या बताई। सदस्य ने माइक्रोस्कोप की न तो गिनती की न ही यह जानने की कोशिश की इनमें चालू हालत में कितने हैं।

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फैकल्टी की कमी पूरी करने के लिए सशर्त दिया जा रहा प्रमोशन

गांधी मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की कमी पूरी करने के लिए असिस्टेंट प्रोफसरों व एसोसिएट प्रोफेसरों को सशर्त प्रमोशन दिया जा रहा है। जीएमसी में तीन दिन से पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि एमसीआई को पदोन्नत फैकल्टी मेंबर की सूची दी जा सके, जिससे फैकल्टी की कमी दूर की जा सके।

पिछले साल के मुकाबले यह सुधार

- ट्रामा एवं कैज्युअल्टी यूनिट नई बनने से यहां एमसीआई के मापदंड के अनुसार पर्याप्त बेड व सुविधाएं हैं।

- हास्पिटल में वेटिंग एरिया नहीं होने पर एमसीआई ने पिछले आपत्ति की थी, लेकिन अब लगभग सभी जगह वेटिंग एरिया बनाया गया है।

- साल भर के हर विभाग में उपकरणों की खरीदी हुई है, इस वजह से उपकरणों की दिक्कत मान्यता में नहीं आएगी।

यहां और पिछड़ गए मापदंड

- 2 हजार बिस्तर के अस्पताल के निर्माण कार्य के चलते नेत्र विभाग समेत कई विभागों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। इस वजह से जगह की कमी हो गई है।

- गामा कैमरे से जांच बंद है। वेंटिलेटर समेत कुछ उपकरण खराब पड़े हैं।

पिछले साल एमसीआई के कहने पर भी सुधार नहीं

- पैथोलॉजी लैब की एनएबीएल मान्यता नहीं है। अर्बन हेल्थ ट्रेनिंग सेंटर पुरानी बिल्डिंग में हमीदिया से महज 200 मीटर दूर है। लैब के लिए बनाए गए कक्षों को स्टोर बना दिया गाया है। आईसीयू में एसी अभी बंद हैं। हर जगह सेंट्रल आक्सीजन सिस्टम हर जगह नहीं है।

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निरीक्षण का आखिरी साल

जीएमसी के डीन डॉ. एमसी सोनगरा ने कहा कि एमसीआई का निरीक्षण एमबीबीएस की 150 सीटों के लिए किया जा रहा है। एमसीआई ने सीटें 140 से बढ़ाकर 150 की थी। इसके बाद लगातार पांच साल तक एमसीआई का निरीक्षण किया जाना था। यह पांचवा साल है। अब हर साल निरीक्षण नहीं होगा।