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जबलपुर। नईदुनिया रिपोर्टर

देश में जीएम फसल जैविक रूप से कृत्रिम तरीके से बनाई गई फसल बीज है जो साधारण बीज से कहीं अधिक उपज देते हैं। ये बीज भारत में पनपे संकर बीज से भी ज्यादा उत्पादन देने में सफल होंगे। यह बात जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित राज्यस्तरीय जैव सुरक्षा कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यशाला में मुख्य अतिथि व अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉ. पीके मिश्रा ने कही।

जनेकृविवि व बायोटेक कन्सोर्शियम इंडिया लिमिटेड नई दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यशाला में डॉ. धीरेन्द्र खरे ने कहा कि आम जनमानस में जीएम फसलों को लेकर काफी भ्रांतियां हैं और जागरूकता की कमी है। डॉ. ओम गुप्ता, डॉ. आरएम साहू व डॉ. बी. सच्चिदानंद विशेष अतिथि के रूप में मंचासीन थे। कार्यशाला में देश के विभिन्न जिलों से करीब 150 वैज्ञानिकों व पीएचडी के छात्रों ने हिस्सा लिया। प्रमुख वक्ता व विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विभा आहुजा, डॉ. ओपी गोविला, डॉ. डिंपल त्रिखा, सोनिया कौशिक आदि ने अपने महत्वपूर्ण व्याख्यान के दौरान भारत में अनुवांशिक रूप से अभियंत्रित पौधो के लिए विनियमन रूपरेखा, भ्रांतियां व अनुवांशिकीय रूपांतरित जीवनों की सुरक्षा मूल्यांकन के लिए उपयोगी संसाधन व जैव सुरक्षा पर कर्टेजेना प्रोट्रोशल आदि पर चर्चा की। डॉ. शरद तिवारी, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी, डॉ. मिलिन्द रत्नपारखी व डॉ. सुशील कुमार ने मप्र में जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनी थामस व आभार प्रदर्शन डॉ. अनीता बब्बर ने किया। आयोजन में डॉ. एके मेहता, डॉ. आरके दुबे, डॉ. मनोज श्रीवास्तव, डॉ. एआर वासनिकर, डॉ. स्तुति मिश्रा, डॉ. कीर्ति तन्तुवाय, डॉ. सुनीता पांडे, डॉ. योगेन्द्र सिंह, अजय जायसवाल व डीके पंचेश्वर का सहयोग रहा।