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    बावड़ियों की देखरेख से होगा धरोहरों का संरक्षण, बढ़ेंगे जल स्रोत भी

    Published: Wed, 18 Apr 2018 01:18 AM (IST) | Updated: Wed, 18 Apr 2018 01:18 AM (IST)
    By: Editorial Team

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    जबलपुर। नईदुनिया रिपोर्टर

    शहर में लगभग 10 बड़ी और 8 के ही करीब छोटी बावड़ियां हैं। इनमें से कुछ गोंडकालीन हैं तो कुछ कल्चुरी कालीन। करीबन 500 मीटर गहरी होने के साथ ही ये बावड़ियां बड़े क्षेत्रफल को घेरे हुए हैं। इसके बावजूद पिछले कुछ सालों से शहर में जल संकट गहराता जा रहा है। गर्मी की शुरुआत और वर्ल्ड हैरिटेज डे पर यदि शहर की बावड़ियों को साफ व संरक्षित करने का प्रयास किया जाए तो हमारी एैतिहासिक धरोहरों के साथ ही जल के नए स्रोतों भी बन सकेंगे। वर्ल्ड हेरिटेज डे पर आइए जानते हैं शहर की कुछ प्रमुख बावड़ियों को।

    ये कुछ प्रमुख बावड़ियां-

    - गढ़ा बजरिया बावड़ी

    - बाशाह हलवाई मंदिर बावड़ी

    - रानीताल स्थित वीर बावड़ी

    - बड़ी खेरमाई स्थित खुड़खुड़ बावड़ी

    - शास्त्री नगर स्थित विषकन्या बावड़ी

    - महाराजपुर की बावड़ी

    - गोसलपुर बावड़ी

    - सिहोरा स्थित अशोक बावड़ी

    - सिहोरा स्थित चौपड़ा की बावड़ी

    - पाटन स्थित बावड़ी

    जल संरक्षण का संदेश देती संस्कृति

    इन बावड़ियों का शहर व आसपास के क्षेत्रों में मौजूद होना इस बात का प्रमाण है कि यहां के इतिहास में जल संरक्षण को कितना महत्व दिया जाता था। यदि वर्तमान में इन बावड़ियों को पुर्नजीवित कर लिया जाए तो काफी हद तक जल संकट दूर किया जा सकता है।

    ये हो सकते हैं लाभ

    - एैतिहासिक हैरिटेज का संरक्षण होगा

    - भूजल स्तर बढ़ेगा

    - पानी के स्रोत बढ़ेंगे

    - पीने के पानी के साथ ही अन्य उपयोग के लिए भी पानी मिलेगा

    - जलसंकट दूर होगा

    अभी पुरातत्व में नहीं शामिल

    रानी दुर्गावती संग्रहालय के उप संचालक प्रकाश परांजपे ने बताया कि बावड़ियां अभी पुरातत्व विभाग के पास नहीं है। इसके लिए एक लंबी प्रक्रिया करना होती है। बावड़ियों की देखरेख नगर निगम द्वारा की जा रही है।

    शुरू हो गया है काम

    स्मार्ट सिटी के अंतर्गत नगर निगम द्वारा शहर की बावड़ियों के पुर्नसंरक्षण के लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं। इस कड़ी शास्त्री नगर स्थित विषकन्या बावड़ी व अन्य बावड़ियों की सफाई की जा रही है।

    क्या कहलाते हैं हैरिटेज

    ऐसी कोई भी इमारत, प्राकृतिक स्थल, ऐतिहासिक स्थल जिसे बने हुए या फिर उसके असतित्व को रहते हुए 100वर्ष हो जाते हैं वह स्थान और इमारत हैरिटेज के रूप में मान्य होती है।

    हैरिटेज के लिए सभी की जिम्मेदारी

    - किसी भी हैरिटेज स्थल को टिकट लेकर देखने जाएं।

    - हमेशा संरक्षण,साफ-सफाई का ध्यान रखें।

    - अपनी हैरिटेज पर गर्व और सम्मान करें।

    - हैरिटेज का सकारात्मक प्रचार करें।

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