रवीन्द्र सुहाने

जबलपुर। नईदुनिया रिपोर्टर

पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर लार्डगंज के विद्वान पंडित अमित शास्त्री मंदिर में विधान और प्रवचन के साथ यूट्यूब पर युवाओं को कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी भी करा रहे हैं। इसके लिए बकायदा यूट्यूब पर उनका आईएएस स्टडी ट्रिक नामक चैनल है। जिसके दो साल में 6 लाख 90 हजार सब्सक्राइबर बन चुके हैं। जबकि अलग-अलग एजुकेशनल वीडियो को देखने वाले व्यूवर्स की संख्या सवा तीन करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। सबसे अधिक प्रेरणास्पद बात यह है कि चैनल के माध्यम से होने वाली कमाई पंडितजी जरूरतमंदों की सेवा पर खर्च करते हैं। इन्होंने धर्म के प्रचार के साथ समाजसेवा के उद्देश्य से 2017 में उन्होंने यूट्यूब पर पढ़ाई कराना शुरू की थी।

जैन समाज की धार्मिक संस्था सांगानेर जयपुर से धार्मिक ग्रंथों की शिक्षा लेकर मुनिश्री सुधासागर महाराज की आज्ञा से 19 वर्ष की आयु में 2012 में जबलपुर आए पंडित अमित शास्त्री 6 साल से पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के प्राचीन ग्रंथों की शिक्षा दे रहे हैं। इसमें जैन समाज के बधाों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल होते हैं।

पं. अमित शास्त्री ने बताया कि जैन मंदिर में विधान व प्रवचन के साथ-साथ वे कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी करते आ रहे हैं। एक साल कोचिंग की फिर यूट्यूब पर पढ़ाई शुरू की। इसमें हिंदी और संस्कृत पढ़ाने वालों की संख्या काफी कम दिखी तो सोचा क्यों न हम यूट्यूब के माध्यम से दूसरे युवाओं को हिंदी और संस्कृत के विषय में जानकारी दें। इसके बाद यूट्यूब पर चैनल शुरू कर दिया। हम हिंदी और संस्कृत पढ़ाते और दूसरे चैनलों से अन्य सब्जेक्ट खुद पढ़ते हैं।

पं. अमित ने बताया कि कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी में कोचिंग और बुक्स आदि में युवाओं की कमर टूट जाती है। इसे खुद की स्टडी के दौरान महसूस किया। इसके बाद हिंदी और संस्कृत के साथ मोटिवेशनल स्पीच यूट्यूब पर देना शुरू की। इसके कमेंट में युवा जो भी सवाल पूछते उनके जवाब समय पर देते। पढ़ाई के दौरान नोट्स भी तैयार करते हैं, जिन्हें युवाओं द्वारा मांगे जाने पर पीडीएफ फाइल बनाकर निःशुल्क भेजते हैं।

गैर हिंदी भाषी प्रदेशों के युवा सीखते हैं हिंदी

उन्होंने बताया कि हिंदी और संस्कृत पढ़ाने वालों की संख्या कम होने के कारण कर्नाटक, बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडू से बहुत से युवा यूट्यूब चैनल से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि सस्क्राइबर की संख्या बढ़ने पर उन्हें इस चैनल से आय होने लगी तो उन्होंने ज्ञान सागर ज्ञान औषधी संस्थान बनाकर जरूरतमंदों की मदद करना शुरू कर दी। इसमें बधाों को पाठ्य सामग्री, कपड़े और जरूरत का सामान मुहैया कराया जाता है। अब तो इस संस्थान में और भी लोग मदद के लिए आगे आने लगे हैं।

उन्होंने बताया कि उनके इस कार्य में मंदिर के मैनेजर सुमित जैन व सहायक मैनेजर मोहित नेमा भी हाथ बटाते हैं। अभी तक करीब 600 वीडियो डाउनलोड कर चुके अमित शास्त्री के चैनल के 3 करोड़ 24 लाख व्यूज, 25 लाख लाइक, 6 लाख 90 हजार सब्सक्राइबर और 15 लाख कमेन्ट हैं। पिछले 28 दिन में इनके चैनल को 50 लाख लोगों ने देखा।

अनेक राज्यों में दे चुके हैं प्रवचन

विद्वान अमित शास्त्री मूलतः टीकमगढ़ जिले के निवासी हैं। उन्होंने सांगानेर से धार्मिक शिक्षा ली। 2016 में मुनिश्री सुधासागर महाराज ने उन्हें ब्यावर राजस्थान में सर्वश्रेष्ठ विद्वान का पुरस्कार दिया था। जैन मंदिर लार्डगंज में धार्मिक प्रवचन, विधान आदि के साथ-साथ उन्होंने बीएड के साथ-साथ हिंदी और संस्कृत से एमए कर ली। जिनवाणी चैनल में उनके प्रवचन आते हैं। इसके अलावा कोलकाता, दिल्ली, हैदराबाद, गोवाहाटी, भोपाल, इंदौर सहित अन्य शहरों में प्रवचन दे चुके हैं। जैन समाज की सबसे बड़ी गद्दी सागर में भी प्रवचन देने का अवसर उन्हें मिल चुका है।