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जबलपुर। नईदुनिया रिपोर्टर

चिकित्सा जगत के दिग्गज जब एक साथ बैठे और रोगों, उनके इलाज के बारे में अपने अनुभव साझा किए तो मेडिकल साइंस और नवोदित चिकित्सकों के लिए नई राहें निकल आईं। सभी ने एक-दूसरे से कुछ सीखा और कुछ सिखाया भी। एक मंच पर पूरा चिकित्सा जगत एकत्र हो गया।

सेंट्रल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ कोलो- प्रोक्टोलॉजी, जबलपुर सर्जन्स एसोसिएशन व लाइफ मेडिसिटी हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में श्रीजानकीरमण महाविद्यालय परिसर में मलद्वार व बड़ी आंत के रोगों पर केन्द्रित तीन दिवसीय वर्ल्डकॉन संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। ये तीन दिन कई मायनों में बहुत अहम रहे। समापन अवसर पर लाइफ मेडिसिटी के संचालक नरेन्द्र अग्रवाल, डॉ. विवेक दीवान, डॉ. आभा दीवान व अश्विनी श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त किया।

सीखते हुए बढ़ें आगे

वर्ल्डकॉन संगोष्ठी के अंतिम दिन वक्ता चिकित्सकों ने कहा कि चिकित्सा पद्धतियों में नित नए परिवर्तन हो रहे हैं। इसलिए सभी लगातार सीखते हुए आगे बढ़ें ताकि आप अपने पेशे में हमेशा अपडेट रह सकें और मरीजों को पूरा लाभ मिल सके। इन तीन दिन में सिंगापुर से डॉ. सुरेन्द्र संगीता मंटू, अहमदाबाद से डॉ. विक्रम काटे, डॉ. मोहन जोशी, डॉ. शांति वर्धनी, डॉ. संजीव हरभक्ति, डॉ. मकतानी, टाटा मेमोरियल मुंबई, डॉ. अभय दलवी, जेईएम मुंबई, डॉ. एसके चिवटे, डॉ. पार्थसरसी, कोयंबटूर व डॉ. मुक्केवार, नागपुर आदि ने मंच से अपनी बात रखी।

जागरूकता भी बढ़े

वर्ल्डकॉन के मंच से चिकित्सकों ने कहा कि जैसे-जैसे नई-नई बीमारियां बढ़ रहीं हैं, वैसे-वैसे लोगों में रोगों को लेकर जागरूकता भी बढ़नी चाहिए। ऐसा करने की जिम्मेदारी चिकित्सकों की है। डॉक्टर्स हमेशा ये कोशिश करें कि मरीजों के साथ बीमारियों से जुड़ी जानकारियां साझा करें।

इसलिए खास रहे तीन दिन

वर्ल्डकॉन के आयोजन में तीन दिन तक डॉक्टर्स ने चिकित्सा जगत से जुड़ी नई चीजों को करीब से देखा। डॉ. मुकेश श्रीवास्तव ने बताया कि पहले दिन लाइव ऑपरेशंस हुए, जिनमें नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया। बाद में इन ऑपरेशंस पर डिस्कशन भी हुआ। नवोदित चिकित्सकों ने कुछ सवाल उठाए, जिनका बखूबी उत्तर विशेषज्ञों द्वारा दिया गया। साइंटिफिक सेशन में नई तकनीकों को विज्ञानसम्मत बताते हुए उनकी बारीकियों पर चर्चा की गई। इस डिस्कशन में भी कई नए तथ्य उभरकर सामने आए।