ग्वालियर,नईदुनिया प्रतिनिधि। मेडिकल और इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों की डिग्री,अंकसूची में छेड़छाड़ से सबक लेते हुए अब प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालय भी अपनी अंकसूची व डिग्रियों को सुरक्षित करने जा रहे हैं। कृषि छात्रों की डिग्री, अंकसूची पर सुरक्षा के सात घेरे रहेंगे, जिन्हें तोड़ते हुए फर्जीवाड़ा लगभग असंभव हो जाएगा। जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर ने इस व्यवस्था को लागू करने का निर्णय कर लिया है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर में इस व्यवस्था को लागू करने का प्रस्ताव बोर्ड की अगली बैठक में रखा जाएगा।

कृषि विश्वविद्यालय की अंकसूची, ट्रांसक्रिप्ट व डिग्री पर सुरक्षा के लिए अलग-अलग तरह के मानक की व्यवस्था तय की गई है। इसमें बड़ा बदलाव यह है कि डिग्री पर अब विद्यार्थी का फोटो ग्राफ भी प्रिंटेंड होकर मिलेगा। इसके साथ ही डिग्री पर दो तरह के बार कोर्ड होंगे। इन बार कोड के जरिए विद्यार्थी,महाविद्यालय व विश्वविद्यालय की पहचान करना आसान हो जाएगा। यह व्यवस्था यूजी,पीजी,पीएचडी सभी तरह के विद्यार्थियों के लिए रहेगी।

इसलिए पड़ी जरूरत

कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जारी की जाने वाली डिग्रियों पर अभी सुरक्षा के कोई विशेष मानक नहीं रहते थे। मसलन जबलपुर में विद्यार्थियों को जारी की जाने वाली डिग्री, ट्रांसक्रिप्ट और प्रोविजनल डिग्री सर्टिफिकेट पर अभी केवल विश्वविद्यालय का मोनो भर था। वहीं राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में मोनो के साथ क्यूआर कोड भर था। मौजूदा स्थिति में चूंकि इंजीनियरिंग व अन्य मैनेजमेंट डिग्रियों की तुलना में कृषि शिक्षा के क्षेत्र में मांग अधिक बढ़ी इस कारण फर्जीवाड़े की आशंका भी बढ़ गई है।

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यह होंगे बदलाव

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1 डिग्री सर्टिफिकेट पर

- सभी में लेजर जनरेट यूनिवर्सिटी सील लगी होगी

- बारकोड होगा, जिससे पहचान आसान होगी

- अल्फा न्यूमेरिक क्यूआर कोड भी होगा

- सफेद स्याही में यूनिवर्सिटी का नाम दर्ज होगा

- हिडेन आईडेंटेटी फीचर के साथ वेरियबल डाटा

- वेरियबल डाटा इन माईक्रो प्रिंटिंग

- ट्रांसपेरेंट सिक्युरिटी इम्प्रेशन

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2. ट्रांसक्रिप्ट पर

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- बारकोड

- अल्फो न्यूमेरिक क्यूआर कोड

- उपाधि धारक की फोटोग्राफ

- कोरिलेशन मार्क

- लेजर जनरेट यूनिवर्सिटी सील

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3. प्रोविजनल डिग्री सर्टिफिकेट

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- लेजर जनरेट यूनिवर्सिटी सील

- कोरिलेशन मार्क- वॉटर मार्क के आधार पर लेजर जनरेटेड कलर लोगो

- हाई रिजेल्यूशन फोल्डर

यह होगा फायदा

- विद्यार्थियों की डिग्री में किसी तरह का फर्जीवाड़ा नहीं होगा

- नौकरी के दौरान डिग्री की पहचान जल्दी और आसानी से होगी

- फोटोग्राफ से विद्यार्थियों की पहचान आसान होगी

- विवि का रिकॉर्ड सुरक्षित और व्यवस्थित होगा

सभी जगह लागू होगी व्यवस्था

इस व्यवस्था की पहल तो जनेकृविवि जबलपुर ने की है,लेकिन जल्द ही यह व्यवस्था आरवीएसकेविवि ग्वालियर व बेटनरी विवि जबलपुर में भी लागू हो जाएगी। यहां यह उल्लेखनीय होगा कि जबलपुर कृषि विवि की लगभग व्यवस्थाएं अन्य जगह भी समान रूप से लागू की जाती है।

जबलपुर की तर्ज पर इस तरह की व्यवस्था को लागू करने के लिए हम यह मामला बोर्ड की बैठक में रखेंगे। पिछले दिनों डीएफए से इस मामले में चर्चा हो चुकी है। बोर्ड से अनुमति के बाद व्यवस्था लागू की जाएगी।

नरेश भदौरिया, डिप्टी रिजिस्ट्रार अकादमी, आरवीएसकेविवि ग्वालियर।