ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

गांवों में पहली बार हो रहा सफाई सर्वेक्षण पूरी तरह गुपचुप रखा जा रहा है। संबंधित विभाग के अफसरों को भी अगर जानना हो कि सर्वे टीम कहां है तो पता नहीं कर सकते। बाइकों से गांवों में अपने निर्धारित स्पॉट पर सर्वे करने वाली टीम का यह सर्वे गोपनीय है। गांवों में साफ-सफाई की स्थिति कहां-कैसी मिल जाए, इसको लेकर अफसर चिंता में हैं। संभावना यह भी है कि सफाई सर्वेक्षण में जिले के गांव बुरी तरह पिछड़ न जाएं। शहर में तो सफाई सर्वे टीम के साथ निगम का अमला साथ में रहता था, लेकिन गांवों में ऐसा नहीं हो रहा है।

इस सफाई सर्वेक्षण में ग्रामीणों को अपने गांव की रैंकिंग के लिए 100 प्रतिशत अंकों के मापदंड से गुजरना होगा, इसमें सिटीजन फीडबैक से लेकर सर्विस लेवल प्रोग्रेस और डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन को शामिल किया गया है। सिटीजन फीडबैक में 35 प्रतिशत अंक, सर्विस लेवल प्रोग्रेस के 35 प्रतिशत और डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन में 30 प्रतिशत अंक शामिल किए गए हैं। वहीं गांव के सरपंच की जिम्मेदारी तय की गई है कि गांव में कचरा कहां डल रहा है, अलग-अलग तरह के पानी की निकासी कैसे हो रही है, यह देखना होगा।

ग्वालियर के 530 गांव में सफाई सर्वेक्षण

जिले के 530 गांवों में सफाई सर्वेक्षण 31 अगस्त तक होगा, जिसके लिए 10 से 16 गांवों के लिए एक टीम की व्यवस्था है। यह टीम इन गांवों में अचानक ही पहुंच रहीं है, जिसकी जानकारी अधिकारियों और पंचायत को भी नहीं है। अगर टीम को किसी तरह की सहायता चाहिए होगी तभी वे विभाग के अधिकारियों को कॉल करते हैं। इस तरह 10 से 16 गांवों का राउंड सभी गांवों को कवर करेगा। गांवों को सफाई सर्वे में शामिल करने के साथ ही सरकार ने गांव के प्रति घर पर 30 रुपए मासिक टैक्स भी लगाया है ताकि ग्रामीण जिम्मेदारी के साथ गांव को स्वच्छ रखेंगे।

गोपनीय हो रहा सर्वे

जिले के 530 गांवों में सफाई सर्वेक्षण 1 अगस्त से शुरू हो चुका है। भारत सरकार की ओर से निर्देश जारी हो चुके हैं और इसके लिए निजी एजेंसी की टीम काम कर रही है। पंचायत से लेकर अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय है। 100 प्रतिशत अंकों का सिस्टम तैयार किया गया है, जिसके आधार पर रैंकिंग होगी। सर्वे टीम अपना सर्वे गोपनीय रूप से कर रही हैं।

जय सिंह नरवरिया, परियोजना अधिकारी, जिला पंचायत