आंतरी। कस्बे के वार्ड क्रमांक 5 में आयोजित की जा रही श्रीराम कथा में कथा वाचक लीलाबती पंडोखर ने बताया कि जब श्रीराम ने धनुष को तोड़ा तो उसी समय परशुराम जी वहां पर पहुंच गए और क्रोधित हो गए। जब उन्हें यह ज्ञान हुआ है कि यह तो श्रष्टि में लिखा था इसके बाद उन्होंने श्रीराम और सीता को अपना अशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि जो भी मनुष्य श्रीराम के आदर्शों पर चलता है वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। वहीं उन्होंने बताया कि भगवान राम के नाम लेने से ही मनुष्यों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इससे पूर्व भक्तों की ओर से श्रीराम कथा की आरती उतारी जाकर प्रसादी का वितरण कि या गया। इस अवसर पर पुजारी सुखलाल दुबे, अनिल कु मार, चंद्रप्रकाश शर्मा, रामऔतार, शेलू आदि लोग मौजूद थे।

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