हत्याकांड के आरोपी को आजीवन कारावास, मृतक के बेटे और बल्लम से जख्मी बच्ची को मिलेगी प्रतिकर राशि

बीचबचाव में बोलने पर हुई थी बल्लम से हत्या

इटारसी। पत्ती बाजार में एक साल पहले हुई नृशंस हत्या के मामले में न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामूली विवाद पर हुए झगड़े में यह हत्या हुई थी। आरोपी संतोष ओझा ने यहां रहने वाले दिलीप चौधरी की बल्लम से हमला कर हत्या कर दी थी, घटना के वक्त यहां खड़ी एक बच्ची को भी बल्लम से चोट पहुंची थी।

क्या है मामलाः

ओझा बस्ती निवासी संतोष टीपर ओझा का 30 जुलाई की रात अज्जू नामक युवक से पैसों को लेकर झगड़ा हुआ था, तब यहां रहने वाले विशाल धुर्वे ने बीच बचाव किया था। इसी बात की नाराजगी पर दूसरे दिन 31 जुलाई की सुबह करीब 9 बजे तैश में आकर संतोष ने बल्लम निकालकर विशाल पर हमला किया, तभी यहां मौजूद दिलीप चौधरी ने उसे रोका। गुस्साए संतोष ने बल्लम उठाकर दिलीप चौधरी के सीने, पेट एवं चेहरे पर लगातार वार किए, अचानक हुए हमले के वक्त यहां खड़ी मासूम बच्ची दीपिका को भी बल्लम की चोट पहुंची थी। खून से लथपथ दिलीप को देख उसका बेटा विशाल, विक्रम, कल्लोबाई मौके पर पहुंचे और दिलीप को तत्काल सरकारी अस्पताल लेकर गए, यहां दिलीप की मौत हो गई थी। पुलिस ने विशाल की रिपोर्ट पर संतोष के खिलाफ धारा 302, 324 एवं 25 आर्म्स एक्ट के तहत मामला पंजीबद्घ किया। अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी हरीशंकर यादव ने प्रत्यक्षदर्शी ने विक्रम, दीपिका, कल्लो, विशाल धुर्वे, एएसआई विजय सोनी, एसआई नागेश वर्मा, डॉ. विवेकचरण दुबे की गवाही कराई। अपर सत्र न्यायाधीश प्रीति सिंह की अदालत ने दोष सिद्घ पाते हुए संतोष को फैसला सुनाते हुए धारा 302 में आजीवन कारावास एवं 5000 रुपए का अर्थदंड, धारा 324 आईपीसी में एक साल कारावास एवं 200 रुपए एवं आर्म्स एक्ट में एक साल की सजा एवं 500 रुपए के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। जुर्माना न देने पर तीनों धाराओं में दो साल की अतिरिक्त सजा होगी।

पीड़ितों को मिलेगी राहतः

इस मामले में खास बात यह है कि आरोपी के हमले में जख्मी बच्ची दीपिका और मृतक दिलीप के पुत्र विक्रम को अर्थदंड की पूरी राशि प्रतिकर के रुप में मिलेगी। कोर्ट ने दीपिका को 200 रुपए एवं शेष राशि विक्रम को देने के निर्देश दिए हैं।

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पेज 16 की लीडः

स्वच्छता सर्वे की रेस खत्म होते ही पुराने ढर्रे पर शहर की सफाई व्यवस्था

स्वच्छता दूत गायब, जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर

सर्वे टीम से रैकिंग मिलते ही सामने आई शहर की डर्टी पिक्चर

इटारसी। केन्द्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान की रैकिंग में अव्वल आने की गरज से नपा द्वारा शुरू किए गए मैराथन प्रयासों पर ब्रेक लग गया है। किसी एक्जाम की तरह नपा ने अच्छे नंबर हासिल करने के लिए पहले जबरदस्त तरीके से जनजागरूकता का पाठ पढ़ाया लेकिन इम्तिहान खत्म होते ही हालात पहले के ढर्रे पर आ गए हैं। नवदुनिया की टीम ने जब रैकिंग के बाद शहर में सफाई के हालात का डीएनए किया तो शहर की सफाई व्यवस्था की कलई खुलती नजर आई। इससे नपा के नीति निर्धारकों और अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।

फीडबैक में एमपी अव्वलः

स्वच्छ भारत अभियान में मोबाइल एप के जरिए फीडबैक देने में मप्र अव्वल रहा है। नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह ने इसके लिए नगरीय निकायों को बधाई भी दी है, हालांकि अब हालात ऐसे हैं कि लोग एप तो क्या सीधे फोन भी कर दें तो सफाई नहीं होती।

तब और अब में आया अंतरः

.बाजार में धड़ल्ले से पॉलीथिन बिक रही है और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े-करकट के ढेर लग गए हैं।

.विशेष सफाई अभियान के लिए लगाई गई सफाईकर्मियों की टीम भी लापता है।

.नालियों में कचरा पटा हुआ है। शहर के पॉश इलाकों में अघोषित कचरा स्थल फिर बन गए हैं, जहां नपा ने रांगोली और फ्लेक्स लगाकर यहां कचरा न फेंकने की अपील की थी।

.चंद दिनों तक व्यापारियों ने कार्रवाई के डर से कचरा रोड पर नहीं फेंका, लेकिन पीठ फेरते ही अब सड़कों पर गंदगी की जा रही है।

.स्वच्छता दूत, रैली, पोस्टर अभियान, सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी करने वाले लोगों की आरती उतारने जैसे प्रयास भी ठंडे हो गए हैं।

.अब न स्वास्थ्य सभापति बाजार में दिख रहे हैं, न नपा के अधिकारी बाजार के हाल देखने आ रहे हैं।

.शहर के गली-मोहल्लों से लेकर बाजार क्षेत्र में कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जहां आवारा मवेशी मंडराते हैं। इससे पूरे क्षेत्र का वातावरण दूषित हो रहा है।

पहले से ही जिम्मेदारीः

स्वच्छता अभियान में भले ही नपा ने जी तोड़ मेहनत कर सर्वे टीम को क्लीन इमेज दिखाकर नंबर बटोर लिए हैं लेकिन अभियान ठंडा पड़ते ही शहर की डर्टी किसी तीन घंटे की मूव्ही की तरह बदल गई है। लोगों का कहना है कि दिखावे के नाम पर रस्म अदायगी तो ठीक है, लेकिन शहर को हमेशा स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ्य रखना भी नपा की जिम्मेदारी है, इस तरह के प्रयास तो लगातार बिना किसी रैंक की चाह में होना चाहिए।

फैक्ट फाइलः

रोजाना कचराः करीब 35 टन।

सफाई पर मासिक खर्चः 06 लाख रुपए।

वार्डः 34

आबादीः सवा लाख।

बजट नहीं हैः

पिछले साल का स्वच्छ भारत अभियान खत्म हो गया है। नए साल का विजन भी जारी हुआ है। जो प्रयास किए गए थे उस पर करीब 10 लाख रुपए एक एनजीओ के माध्यम से खर्च हो चुके हैं, नपा के पास अतिरिक्त बजट नहीं है, इस वजह से कैंपेनिंग बंद हो गई है, हालांकि सफाई व्यवस्था में सुधार के प्रयास जारी हैं।

राकेश जाधव, सभापति स्वास्थ्य समिति।

प्लॉन फाइनल नहीं:

जिलवानी की जमीन ट्रिचिंग ग्राउंड के लिए पहले मिल चुकी है, लेकिन बाबई-होशंगाबाद के क्लस्टर में इटारसी को जोड़ने की वजह से अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। शहर का कचरा न्यास कॉलोनी के पीछे डंप कर रहे हैं, जहां खाद निर्माण होगा। सफाई संसाधनों पर हर माह करीब 6 लाख रुपए खर्च होते हैं।

एचके तिवारी, स्वास्थ्य निरीक्षक।

दिखावा हुआ हैः

अभियान में नपा ने लाखों रुपए खर्च कर महज दिखावा किया। सर्वे टीम को वहीं ले गए जहां सफाई हुई। जिन वार्डो की जनता नारकीय जीवन जी रही है वहां तो झाड़ू भी नहीं लगी और टीम भी नहीं गई। सिर्फ आडंबर किए गए। पुरानी इटारसी के हर इलाके में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इस तरह के प्रयासों से कभी शहर स्वच्छ नहीं हो सकता, जब तक ईमानदारी से प्रयास न किए जाएं। आज भी लोग खुले में शौच जा रहे हैं।

शिवकिशोर रावत, भाजपा नेता।

फोटो नेम.14 आईटी 01

इटारसी। चौपाटी की दीवार पर स्वच्छता संदेश के पास मची गंदगी।

फोटो नेम.14 आईटी 02

इटारसी। सब्जी मंडी के पास लगा कचरे का अंबार जहां आवारा मवेशियों का जमघट लगा रहता है।

फोटो नेम.14 आईटी 03

इटारसी। शहर की नालियों में इस तरह मलबा जमा हुआ है।

फोटो नेम.14 आईटी 04

इटारसी। इस तरह ट्रांसफार्मर के आसपास कचरे में आग लगाई जा रही है।

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