शराब के धंधे में लिप्त ढाबा संचालक की हत्या

जबरन कार में बैठाया और नर्मदा पुल पर मार कर फेंक गए

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मृतक सुरेंद्र यादव

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के प्श्न होशंगाबाद। पीएम रुम के बाहर खड़े मृतक के परिजन एवं समर्थक।

होशंगाबाद। नवदुनिया प्रतिनिधि

बुधनी में शुक्रवार तड़के छैघरा में यादवश्री ढाबा मालिक व बजरंग दल के पूर्व संयोजक और गौरक्षा विभाग प्रमुख सुरेंद्र यादव (33) की नृशंस हत्या हो गई। घटना सुबह 4 से 4.30 बजे के बीच की बताई जा रही है। सुरेंद्र अपने ढाबा के बाहर खड़े होकर मोबाइल पर बात कर रहा था, तभी दो बाइक एवं दो चारपहिया वाहन से आठ लोग आए और सुरेंद्र को जबरन बैठा कर ले गए। कु छ देर बाद पुलिस ने सुरेंद्र को नर्मदा पुल के पास से मरणासन्न हालत में उठाकर बुधनी के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। वहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान सुरेंद्र यादव ने दम तोड़ दिया।

सुरेंद्र यादव का तीन साल पहले ही विवाह हुआ था और उनकी दो साल की बेटी है। घटना का कारण होशंगाबाद के एक शराब ठेके दार से विवाद और पैसों के लेन-देन के रूप में सामने आया है। पुलिस ने हत्या के मामले में आठ लोगों को आरोपित बनाया है। इसमें से छह आरोपितों को गिरफ्तार कि या जा चुका है। बुधनी पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार हुए सभी आरोपित शराब ठेके दार के गुर्गे हैं। उधर, इस हत्याकांड को लेकर जिला अस्पताल में दिनभर गहमागहमी बनी रही। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल के कार्यकर्ता समेत परिजन, जानपहचान के लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे। तनाव को देखते हुए कोतवाली टीआई समेत पुलिस बल तैनात रहा।

घटना के पीछे ये दो कहानी

पुलिस की कहानी- एसडीओपी बुधनी एसएस पटेल ने बताया सुबह चार से साढ़े चार बजे के बीच चार लोग दो बाइक से यादवश्री ढाबा पर आए। खाने के बिल को लेकर इन लोगों का ढाबा संचालक सुरेंद्र यादव से विवाद हो गया। इस पर यादव ने उनसे मारपीट कर दी। जब ये लोग भागने लगे तो यादव उनके पीछे भागे। आगे जाकर इन लोगों ने अपने साथियों को फोन लगा दिया। कु छ देर में ही एक बोलेरो में चार लोग वहां आ गए। इन आठों लोगों ने मिलकर सुरेंद्र पर प्राणघातक हमला कर दिया और उसे बोलेरो में जबरदस्ती बैठाकर होशंगाबाद की ओर भाग निकले। तब तक ढाबा कर्मचारियों ने बुधनी थाना को फोन लगाकर घटना की जानकारी देते हुए सुरेंद्र को बचाने की गुहार लगाई।

प्रत्यक्षदर्शियों की कहानी- घटना के समय यादवश्री ढाबा पर आधा दर्जन कर्मचारी समेत करीब डेढ़ दर्जन लोग मौजूद थे। इनके मुताबिक घटना से आधा घंटे पहले मारुति 800 कार से आया एक व्यक्ति सुरेंद्र यादव के पास पहुंचा और उनसे कहा कि भैया मुझे बचा लो। एक बोलेरो कार और दो बाइक पर सवार चार लोग उसका पीछा कर रहे हैं। तब तक दो बाइक से चार लोग उतरे। उन्हें देखकर उस व्यक्ति ने सुरेंद्र को बताया कि पीछा करने वाले यही लोग हैं। सुरेंद्र की उनसे बहस हो गई और उन्होंने गुस्से में उन्हें मारपीट कर भगा दिया। इसके बाद सुरेंद्र सड़क कि नारे खड़े होकर बात कर रहे थे, तभी एक बोलेरो से आठ लोग आए और उन्हें जबरन बैठा कर होशंगाबाद की ओर निकल गए।

सरेंडर या गिरफ्तारी

सुरेंद्र यादव की हत्या के मामले में बुधनी पुलिस ने चार नामजद और चार अज्ञात आरोपितों को नामजद कि या है। इसमें आधा दर्जन आरोपी हवालात में बंद हैं। ये आरोपी पुलिस के कब्जे में कै से पहुंचे इसको लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। मर्चुरी के बाहर जमा लोगों का कहना था कि हत्या से उपजे गुस्से से घबराए आरोपित खुद दोपहर में थाने पहुंचे थे। वहीं एसडीओपी पटेल ने बताया कि कि सी ने सरेंडर नहीं कि या, बल्कि बुधनी पुलिस ने होशंगाबाद में शराब कारोबारी सुनील गुप्ता के ठिकाने पर छापा मारकर छह आरोपितों को गिरफ्तार कि या है। उन्होंने बताया दो आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।

शराब कारोबारी के गुर्गे हैं आरोपित

ढाबा संचालक की हत्या के मामले में जो छह लोग गिरफ्तार हुए हैं। उनके नाम हैं इमलिश राय निवासी नरसिंहपुर, मनीष भाट निवासी इटारसी,विष्णु शर्मा निवासी मुरैना जिला, पवन सिंह सिकरवार मुरैना जिला, दिलीप निवासी आगरा जिला, देवेन्द्र शर्मा निवासी मुरैना जिला।

एसडीओपी पटेल ने बताया ये सभी आरोपित शराब कारोबारी सुनील गुप्ता के कर्मचारी हैं। घटना में शामिल दो फरार आरोपित भी इनके साथी बताए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे इस बात को बल मिलता है कि गुप्ता और ढाबा संचालक सुरेंद्र यादव के बीच शराब बेचने और पैसों के लेनदेन को लेकर कोई विवाद चल रहा था। हालांकि यह जांच का विषय है, लेकि न सबसे ज्यादा इसी बात की संभावना नजर आ रही है।

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तनाव में रहा प्रशासन

सुरेंद्र यादव की हत्या के बाद बुधनी और होशंगाबाद पुलिस भारी तनाव में नजर आई। चूंकि मृतक बजरंग दल और विहिप का नेता था और असरदार परिवार से ताल्लुक है। वहीं जिस प्रकार घटना के बाद परिजनों और कार्यकर्ताओं का जिला अस्पताल परिसर में जमावड़ा था। ऐसे में अधिकारियों को इस बात का डर था कि कहीं लोग सड़क पर न उतर आएं। इसकी एक वजह यह चर्चा भी रही कि आक्रोशित भीड़ दोपहर तक अस्पताल में ही मौजूद रही। दोपहर तक शव पीएम रूम में रखा था, हालांकि आरोपितों के सरेंडर की सूचना पर तनाव कम हो गया। आशंका थी कि परिजन शव को बुधनी थाने में रखकर हाईवे जाम करने की तैयारी में थे। शाम पांच बजे शव परिजनों को सौंप दिया।

शराब को लेकर बह रहा खूनः

जिले में शराब माफियाओं एवं ठेके दारों में बढ़ रही धंधे की गलाकाट प्रतिस्पर्धा अब गैंगवार में तब्दील हो रही है। करीब दो साल पहले शराब ठेके दार विक्की वर्मा की भी दिनदहाड़े हत्या हो चुकी है। इसके अलावा आए दिन शराब तस्करों के बीच छिटपुट झगड़े होते रहते हैं। बुधनी हत्याकांड के पीछे भी शराब तस्करी और सप्लाई की रंजिश की बात सामने आ रही है।

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तीन साल पहले ही हुआ था विवाह

बुधनी के छैघरा निवासी 33 वर्षीय सुरेंद्र यादव का तीन साल पहले ही विवाह हुआ था। उनकी दो साल की एक बेटी है। जानकारी के अनुसार घटना के समय पत्नी और बेटी मायके बीना गये हुए थे। पहले तो परिजनों की उनकी पत्नी को यह दुखद समाचार देने की हिम्मत तक नहीं पड़ी। बाद में सुरेंद्र के एक मित्र ने मोबाइल पर पत्नी के भाई से कहा कि जो भी पहला साधन मिले उससे अपनी बहन को लेकर बुधनी पहुंचो। सुरेंद्र तीन भाई हैं। इसमें एक कोतवाली में पदस्थ हैं। जबकि दो भाई ढाबा चलाते हैं। सुरेंद्र बजरंग दल और गौरक्षा से जुड़े थे इसलिए उनकी आसपास क्षेत्र में अच्छी खासी पहचान थी।

इनका कहना है

- इस हत्याकांड में आठ आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कि या गया है। इसमें छह आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। ये सभी शराब ठेके दार सुनील गुप्ता के कर्मचारी हैं। इससे प्रतीत होता है कि शराब को लेकर मृतक के साथ इनका कोई विवाद चल रहा था। पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है।

एसएस पटेल, एसडीओपी बुधनी।