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    मेरे पति दोनों बेटियों की नहीं भर रहे फीस, महंगे स्कूल में पढ़ाने में असमर्थ

    Published: Thu, 15 Mar 2018 04:10 AM (IST) | Updated: Thu, 15 Mar 2018 04:10 AM (IST)
    By: Editorial Team

    बाल आयोग की संयुक्त बैंच में 11 प्रकरणों में से 5 की हुई सुनवाई

    भोपाल।नवदुनिया प्रतिनिधि

    मेरी दो बेटियां साकेत नगर स्थित सागर पब्लिक स्कूल में 9वीं और 7वीं में पढ़ती हैं, लेकिन पति से अलग होने के बाद 5 से 6 महीने से स्कूल की फीस जमा नहीं कर पाई हूं, जिससे दोनों बेटियों को स्कूल से निकालना पड़ा। जब पति से अलग होने का निर्णय लिया था, तब 14 हजार रुपए देना तय हुआ था और बेटियों की फीस भरने पर रजामंदी हुई थी, लेकिन कई महीने से पति ने फीस नहीं भरी है। दोनों बेटियों को मैं महंगे स्कूल में पढ़ाने में असमर्थ हूं। यह बात शाहपुरा निवासी एक सिंगल पैरेंट महिला ने बाल आयोग की बैंच में सुनवाई के दौरान कही। जिस पर आयोग ने महिला के पति को कड़ी फटकार लगाते हुए फीस भरने के लिए राजी किया। आयोग ने कहा कि किसी भी हाल में बच्चियों की पढ़ाई नहीं रूकनी चाहिए। बुधवार को मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग की संयुक्त बैंच लगी थी। जिसमें सदस्य ब्रजेश चौहान व अमिता जैन ने सुनवाई की। 11 प्रकरणों में से 5 पर सुनवाई हुई। बैंच में बैरागढ़ कैम्पियन स्कूल का मामला भी रखा गया, जिसमें हामिद मोहम्मद ने स्कूल के खिलाफ शिकायत की थी कि उनके बेटे को स्पोर्ट्स टीचर ने चाटा मारा था। जिसपर आयोग ने स्कूल संचालक से जानकारी ली।

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    बाल आयोग के समन को सरकारी अधिकारी रखते हैं ताक पर

    बाल आयोग सरकारी अधिकारियों को समन जारी करता है, लेकिन अधिकारी आयोग की अनुशंसा को ताक पर रखते हैं। चुरहट में पदस्थ एसडीएम अमिता सिंह के खिलाफ जावरा में 17 वर्षीय बालिका ने चाटा मारने की शिकायतकी थी। जिससे बाल आयोग ने एसडीएम को समन जारी किया था, लेकिन वे नहीं पहुंची। वहीं, धार व इंदौर के कलेक्टर को स्कूल संबंधी शिकायत मिलने पर बाल आयोग ने अनुशंसा पत्र भेजी थी, लेकिन उनके प्रतिनिधि भी उपस्थित नहीं हुए। कुछ ऐसा ही रीवा व सतना के स्कूलों से शिकायत मिली थी, जिससे आयोग ने डीईओ व डीपीसी को पत्र लिखा था, लेकिन अधिकारी बैंच में उपस्थित नहीं हुए।

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    - जिन प्रकरण में अनावेदक नहीं आ रहे हैं, उन्हें फिर से समन जारी किया जाएगा। स्कूल संबंधी मामलों पर तत्काल जांच प्रतिवेदन मांग रहे हैं।

    ब्रजेश चौहान, सदस्य, बाल आयोग

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