नरसिंहपुर। ग्राम खिरिया के अजय पटैल, हर्रई के सौरभ शर्मा बैंक में बहस कर रहे हैं, उन्हें पैसे की जरूरत है। पर बैंक मैनेजर हाथ जोड़कर कह रहे हैं कि कैश नहीं है, उनकी मजबूरी समझिए, हम 50 हजार-लाख रुपए नहीं दे पा रहे हैं, दो-चार हजार रुपए ही दे सकेंगे।

अक्षय तृतीया पर रिकार्ड शादियां हैं, कहीं बेटे के लिए शहनाई बज रही है तो कहीं किसी भतीजी की शादी के लिए चाचा भागदौड़ कर रहे हैं, पैसे का इंतजाम कर रहे हैं, भाई बैंक में चक्कर लगा रहा है कि उनका जमा पैसा मिल जाता तो बहन के हाथ पीले करने के बंदोबस्त में लगने वाले खर्च में काम आता, पर चाचा परेशान हैं, भाई परेशान है, पिता परेशान है, मुश्किल वृद्घ की भी है कि वह दवाई लेने पैसे नहीं जुटा पा रहा है, यह कैसे अच्छे दिन हैं कि खुद का पैसा खुद के काम नहीं आ पा रहा है, बैंक अपने उपभोक्ताओं को बैरंग लौटा रहे हैं। बैंक के अधिकारी स्पष्ट कह रहे हैं कि कैश नहीं है, हम व्यवस्था कहां से करें।

एकदम से नहीं बनी समस्या

ऐसा नहीं कि सरपंच मधुसूदन की बिटिया का विवाह अक्षय तृतीया में है तो वह ऐनवक्त पर पैसे लेने गए हों, इसके पहले भी वह चक्कर काट चुके हैं। सरपंच जैसे पचासों लोग बैंक के चक्कर पिछले 15 दिन से लगा रहे हैं। बैंक के अधिकारी-कर्मचारी यह समझ भी रहे हैं कि नगदी की डिमांड बढ़ी है पर उपभोक्ताओं की मांग के अनुरूप प्रबंध करने में या तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए हैं या तो उन्होंने लापरवाही बरती। लोगों का कहना है कि जिस तरह की परेशानी आमलोगों को झेलना पड़ी है, लोगों का विश्वास बैकिंग व्यवस्था से उठ रहा है।