शहडोल।

जिला शिक्षा अधिकारी को अपने दफ्तर से बाहर निकलकर स्कूलों का निरीक्षण करते कम ही देखा गया है। साल बीत जाता है लेकिन किसी भी प्राइवेट स्कूल में जाकर डीईओ न तो वहां की कम्प्यूटर लैब देखते हैं और न ही यह देखते हैं कि साइंस की प्रयोगशाला कैसे काम कर रही है। प्राइवेट स्कूलों में देखा यह जा रहा है कि मनमाने ढंग से काम हो रहा है। अधिक पैसा कमाने के चक्कर में दो शिफ्ट में स्कूल संचालित हो रहे हैं। विद्यार्थियों को जहां छह से सात घंटे पढ़ाई व अन्य गतिविधियों के लिए मिलना चाहिए वहां चार घंटे का स्कूल लगाकर छुट्टी कर दी जाती है। जिला मुख्यालय में ही इस तरह से मनमाने ढंग से काम करने वाले प्राइवेट स्कूलों की संख्या छह से अधिक है। पुलिस लाइन में दो स्कूल,पांडवन नगर में तीन स्कूल प्राइवेट रूप से संचालित हो रहे हैं जहां पर जाकर निगरानी नहीं की जाती है।

यहां सीधी देते हैं धमकी

कांवेंट कल्चर को बढ़ावा देने वाले पांडवनगर के एक स्कूल में तो सीधे बच्चों को टीसी काटने की धमकी दी जा रही है। यहां के प्रबंधन ने बच्चों को कहा है कि यदि किसी ओर से कोचिंग ली तो टीसी काट देंगे यानि स्कूल में पढ़ाने वाली टीचर घर पर कोचिंग क्लास लगा सकती हैं और दूसरे टीचर से बच्चे पढ़ते हैं तो धमकी मिलती है। भारतीय संस्कृति और उसके मानदंडों क ो कम मानने वाले स्कूलों का प्रबंधन मनमाने ढंग से निर्णय लेता रहता है और डीईओ को फु र्सत नहीं है कि वे स्कूलों में जाकर निरीक्षण करें वहां के बच्चों से अभिभावकों से चर्चा करें।

चल रही मनमानी

डीईओ कार्यालय में मनमानी का आलम है। यहां पर जहां डीईओ की सुस्त कार्यप्रणाली स्कूलों पर लगाम कसने में अक्षम है वहीं जिला शैक्षिणिक समंवयक व सहायक संचालक शिक्षा जैसे पद पर चिपके अधिकारी भी अपनी लचर कार्यप्रणाली के कारण शिक्षा का स्तर ऊपर नहीं उठ पा रहा है। ले देकर जो रिपोर्ट बाबुओं के माध्यम से इन तक आती है उस पर ही मोहर लगाकर आगे बढ़ा देते हैं।

काम ज्यादा है

शिक्षा विभाग के अलावा समय समय पर मिलने वाले अतिरिक्त प्रभार के कारण काम ज्यादा रहता है। इसके कारण स्कूलों की विजिट कम हो पाती है फिर भी निरीक्षण पर जाता हूं।

उमेश धुर्वे

जिला शिक्षा अधिकारी शहडोल।