बंगवार।

बीते दिनों कलेक्टर ने पीएचई विभाग और पंचायत के सभी जिम्मेदारों को आदेश दिए थे कि सभी बदहाल हैंडपंप गर्मी से पहले-पहले दुरुस्त हो जाने चाहिए ताकि ग्रामीणों को गर्मी में पानी की दिक्कत ना हो। इसके बावजूद कलेक्टर के निर्देशों का नीचे के अधिकारी, पंचायत के जिम्मेदारों के साथ मिलकर मखौल उड़ा रहे हैं। जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत बेम्हौरी और उसके अंतर्गत के गांवों को मिलाकर करीब 27 हैंडपंप हैं लेकिन उन हैंडपंपों से जल आपूर्ति की भौतिक स्थिति देखी जाए तो चार से पांच हैंडपंपों का ही पानी पीने लायक है।

लाल पानी निकल रहा है

किसी से लाल पानी निकल रहा है तो किसी हैंडपंप के पास इतनी गंदगी बजबजा रही है कि हैंडपंप की गंदगी देखकर ही पानी पीने की इच्छा मर जाती है। वहीं कुछ हैंडपंप तो बरसों से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। जल स्रोतों की बदहाल स्थितियों के चलते ग्राम पंचायत बेम्हौरी और उसके सभी गांवों में कुछ ही दिनों में पेयजल संकट गहराने वाला है और इसके जिम्मेदार पीएचई विभाग के अधिकारी और पंचायत के उदासीन जनप्रतिनिधि होंगे।

स्कूलों में भी यही हाल

गौरतलब हो कि शासकीय हाई स्कूल बेम्हौरी, प्राथमिक पाठशाला गरफंदिया, और बेम्हौरी पंचायत अंतर्गत आने वाले करीब तीन से चार आंगनबाड़ियाँ इन सभी जगहों पर भी पेयजल व्यवस्था भगवान भरोसे ही है कई आंगनबाड़ियों में तो सहायिकाएं घर से बाल्टी या बोतल में पानी लेकर आती है तब बधाों को पिलाती हैं और खुद पीती हैं। वही स्कूलों में हैंडपंपों के पास बजबजा रही गंदगी और बिना फिल्टर के हैंडपंप मानो छात्रों को खुद ही आगाह कर रही हो कि हमारा पानी पीने लायक नहीं है इसे पीकर आप बीमार भी हो सकते हैं। लेकिन छात्रों की मजबूरी है की उन्हें वहीं गंदा पानी पीना पड़ता है क्योंकि स्कूलों में बामुश्किल एक ही हैंडपंप होता है बधो जाएं भी तो जाएं कहां।

गर्मियों में दिक्कत और भी ज्यादा

जी हाँ पंचायत अंतर्गत के सभी तालाब लगभग अपनी अंतिम यात्रा पर हैं। पंचायत अंतर्गत के सभी तालाब जलकुंभी, मलवा, और तरह-तरह की गंदगियों से पटे पड;े हैं इसलिए बरसात का पानी इनमे नहीं रुकता तालाबों के जीर्णोद्घार के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बेम्हौरी पंचायत के ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत के जनप्रतिनिधि उल-जलूल कामों में सरकारी पैसा निकालकर जमकर छीछालेदर कर रहे हैं, लेकिन जायज और जनहित के कार्यों में सरकारी पैसा खर्च करने या संबंधित विभाग को जलाशयों की बदहाली की सूचना देने में पता नहीं इन्हें कौन सी तकलीफ़ हो रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि तालाबों का संम्पूर्ण जीर्णोद्घार किया जाए जिससे क्षेत्र के भू जल स्तर में सुधार हो। और क्षेत्र के हैंडपंपों को भी दुरुस्त किया जाए। इसके अलावा पंचायत के जिम्मेदारों के नकारापन की वजह से लाश हो चुकी नल जल योजना को भी दुरुस्त किया जाए वरना कुछ दिनों बाद गर्मियों में हालत बिगड़ते देर नहीं लगेगी।