शहडोल।

सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक डा एम के।त्रिपाठी को मूल विभाग में वापस किये जाने संबंधी आदेश का विरोध करते हुए सात कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने मंगलवार को कमिश्नर एवं कलेक्टर को ज्ञापन सौपतें हुए उक्त आदेश निरस्त करने की मांग की है।

सौंपे गए ज्ञापन में राजपत्रित अधिकारी संघ, अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा, मप्र शिक्षक संघ, तृतीय वर्ग कर्मचारी अघ्यापक संघ, लघुवेतन कर्मचारी संघ, मप्र राज्य कर्मचारी संघ, के पदाधिकारियों ने कहा है कि डा एम के त्रिपाठी, ईमानदार,निष्ठावान तथा कर्मठ अधिकारी होने के साथ ही कर्मचारियों एवं आमजन में लोकप्रिय है। इन्होने शिक्षा के क्षेत्र में सदैव शहडोल जिले को प्रथम स्थान दिलाया है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि डॉ त्रिपाठी ने हर वर्ष वार्षिक कार्य योजना में गांव की आवश्यकताओं के अनुरूप राज्य व केन्द्र सरकार के समक्ष तार्किक रूप से प्रस्ताव रखकर जिले के विकास में सराहनीय योगदान दिया है।

नवाचार एवं जनभागीदारी को बढ़ावा दिया

चाहे प्राथमिक,माध्यमिक विद्यालयों में अधोसंरचना का विकास हो, नवाचार एवं जनभागीदारी माध्यम से विद्यालय उपहार योजना में विविध संसाधनों तथा खेल सामग्री उपलब्ध कराने की बात हो अथवा गुणवत्ता सुधार की बात हो, हर क्षेत्र में डॉ त्रिपाठी ने शहडोल जिले को प्रदेश में अव्वल स्थान पर रखा है। उन्होंने न केवल छात्रों का प्रवेश दर 54 प्रतिशत से बढ़ाकर 99प्रतिशत तक पहुचाया बल्कि 700 बाउण्ड्रीबाल का निर्माण, 12 में से 10 छात्रावासों को ए ग्रेड में पहुंचाने का कार्य, विद्यालयों में अध्यापकों की मांग कर पद पूर्ति कराने तथा लगभग 2000 गुरूजीयों को प्रदेश में सबसे पहले वेतनमान दिलाने जैसा सराहनीय कार्य किया है।

लगातार मिलता रहा उत्कृष्टता पुरस्कार

यही वजह है कि राज्य शासन द्वारा डा एम के त्रिपाठी को वर्ष 1994 से लगातार उत्कृष्टता पुरस्कार एवं प्रशस्ति -पत्र दिया गया। साथ ही स्वयं प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान द्वारा छात्रावास का आकास्मिक निरीक्षण कर उत्कृष्ठता पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है।

भ्रामक जानकारियां प्रसारित की गई

सौपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा व्यक्तिगत रंजिशवश षडयंत्र कर डा एम के त्रिपाठी के विरूद्ध भ्रामक जानकारियां प्रसारित की गई तथा शासन-प्रशासन को गुमराह किया गया। कर्मचारी संघों के पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि डा एम के त्रिपाठी को डी पी सी पद पर यथावत रखते हुए जारी आदेश को निरस्त किया जावें अन्यथा कथित झूठी-शिकायतों के कारण अच्छें कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और वह हतोत्साहित होंगे।