ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। दतिया निवासी एक महिला ने एक माह पहले झांसी के अस्पताल में लड़के को जन्म दिया था। समय गुजरने के साथ लड़के का पेट फुलता गया और गांठ जैसी दिखाई देने लगी। माता-पिता बच्चे को चेकअप के लिए गोला का मंदिर स्थित बिड़ला अस्पताल में लेकर पहुंचे। जांच में पता चला कि लड़के के पेट में मृत बच्चा है। 15 दिन तक ऑब्जर्वेशन एवं जांच कराने के बाद बीते रविवार को डॉक्टरों की टीम ने लड़के का ऑपरेशन किया। जिसमें पेट से मृत बच्चे को निकालकर लड़के की जान बचाई गई। अब लड़का पूरी तरह स्वस्थ्य है।

दतिया निवासी आकाश करोठिया की पत्नी ने करीब एक माह पहले झांसी के अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया था। बच्चा पूरी तरह स्वस्थ्य था, लेकिन समय गुजरने के साथ पेट फूलता जा रहा था। धीरे-धीरे बच्चे के पेट में गांठ जैसी महसूस होने लगी। माता-पिता की चिंता बढ़ी तो वह 20 दिन के बच्चे को चेकअप के लिए गोला का मंदिर बिड़ला अस्पताल लेकर पहुंचे।

यहां पीडियाट्रिक सर्जन डॉ अमित अग्रवाल ने बच्चे का अल्ट्रासाउंड एवं अन्य जांचे कराई तो पता चला कि मृत बच्चा पेट में होने के कारण वह गांठ जैसा महसूस हो रहा है। 15 दिन तक बच्चे की सघन जांचे की गई, ऑब्जर्वेशन में रखा गया। इसके बाद बीते रविवार को डॉ अमित अग्रवाल सहित 4 डॉक्टरों की टीम ने बच्चे का ऑपरेशन किया। डेढ़ घंटे ऑपरेशन के बाद मृत बच्चे को बाहर निकालकर लड़के की जान बचा ली गई। जिस समय ऑपरेशन हुआ तब बच्चा 35 दिन का हो चुका था और अब वह पूरी तरह स्वस्थ्य है।

फीट्स इन फीटू की स्थिति -

मेडिकल एक्सपर्ट के मुताबिक जब किसी गर्भवती महिला के पेट में जुड़वा संतान होती है तो इस प्रकार की स्थिति कभी-कभी हो जाती है। इसे फीट्स इन फीटू कहा जाता है। दरअसल भ्रूण फ्लैट अवस्था में होता है और मां की कैविटी से ही बच्चा बनता है। एक बच्चा यदि गर्भ में ही दम तोड़ दे और दूसरे में डेव्हलपमेंट शुरू हो जाए तो इस प्रकार की स्थिति बनने की आशंका कभी-कभी रहती है। हालांकि ऐसा 5 लाख में से एकाध केस में ही होता है। क्योंकि बच्चा गर्भ में जब आकार ले रहा होता है तो मृत बच्चा उसमें समां जाता है। इसी को फीटस इन फीटू कहा जाता है।

एकाध मामले होते हैं इस प्रकार के दुनिया में अब तक -

जब किसी महिला के गर्भ में जुड़वा संतान होती है तब ऐसी स्थिति होती है। क्योंकि एक बच्चा आकार ले रहा होता है, जबकि दूसरा कुछ ही समय में मर चुका होता है। इसी दौरान मृत बच्चा उस आकार ले रहे बच्चे के पेट में पहुंचता है। इसे फीट्स इन फीटू कहते हैं। मैने भी कुछ दिन पहले एक बच्चे का ऑपरेशन किया था, उसमें बच्चा पेट में तो नहीं था, लेकिन नाभी पर चिपका हुआ था। इस प्रकार के मामले एकाध ही आते हैं।

डॉ. अजय उपाध्याय पीडियाट्रिक सर्जन

इस प्रकार के दुनिया में अब तक करीब 200 केस ही रिपोर्ट हुए हैं। 5 लाख में से एक बच्चे में यह स्थिति होती है। इसे फीट्स इन फीटू कहते हैं। हमने बच्चे का ऑपरेशन कर मृत बच्चे को बाहर निकाल दिया है। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ्य है और मां उसे फीडिंग भी करा रही है। डॉ अमित अग्रवाल, पीडियाट्रिक सर्जन बिडला अस्पताल इस प्रकार के केस आम नहीं है, फीट्स इन फीटू की स्थिति बहुत कम होती है। इसे पैदायशी डिसीज भी माना जा सकता है। ऐसा आमतौर पर नहीं होता है। डॉ बीना अग्रवाल, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ