शामगढ़ (मंदसौर)। शामगढ़ से बोलिया मार्ग पर 6 किमी दूर ग्राम हनुमंतिया में लगभग दो हजार साल पुराना प्रसिद्ध चमत्कारिक पंचमुखी कामेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। मंदिर के आसपास डेढ़-दो बीघा जमीन खाली पड़ी है, पर इसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है।

वहीं हनुमंतिया से मंदिर तक जाने के लिए आधा किमी मार्ग भी जर्जर हो रहा है। मंदिर में माता पार्वती की मूर्ति भी आकर्षण का केंद्र है। किंवदंती कि इस मंदिर को जत्ती समुदाय के लोग ओंकारेश्वर से उड़ाकर लाए थे और यहां स्थापित कर दिया।

मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं होने और पहुंच मार्ग भी ठीक नहीं होने से अति प्राचीन मंदिर से अभी शामगढ़, गरोठ क्षेत्र सहित मंदसौर जिले के कई लोग अनजान हैं। पुजारी शंभूनाथ ने बताया- मान्यता है कि मंदिर और भगवान कामेश्वर की प्रतिमा को जत्ती समुदाय के लोग ओंकारेश्वर से उड़ाकर लाए थे।

मंदिर के पत्थरों पर कलात्मक कारीगरी है, जो सातवीं आठवी शताब्दी के समय की है। गर्भगृह में भगवान कामेश्वर की पंचमुखी मूर्ति के साथ माता पार्वती की मूर्ति भी विराजित है। परिसर में पूूर्व दिशा में भगवान कामेश्वर व पश्चिम दिशा में श्री नीलकंठेश्वर महादेव विराजित हैं।

श्रावण मास में यहां दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। शामगढ़ से ग्राम हनुमंतिया तक पक्की सड़क है, मगर ग्राम हनुमंतिया से मंदिर तक आधा किमी का पहुंच मार्ग ठीक नहीं होने से भक्तों को काफी परेशानियां होेती हैं।

पूर्व संरपच शिवनारायण पाटीदार ने बताया कि ग्रामीणों की मांग पर गरोठ विधायक चंदरसिंह सिसौदिया ने डामरीकरण और परिसर में सामुदायिक भवन बनाने की भी स्वीकृति दी है, पर अभी दोनों ही कार्य प्रारंभ नहीं हुए है। परिसर की डेढ़-दो बीघा भूमि का उपयोग कर मंदिर का जीर्णोद्धार होने पर यह क्षेत्र का प्रमुख दर्शनीय स्थल बन सकता है। विधायक चंदरसिंह सिसौदिया ने बताया कि ग्राम हनुमंतिया से मंदिर परिसर तक डामरीकरण के लिए लोनिवि के अधिकारियों को बोला है। जल्द ही बरसात के बाद डामरीकरण होगा।