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    नहीं रही मोरनी के तीन बच्चों की मुर्गी 'मां'

    Published: Thu, 07 Dec 2017 11:51 PM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 10:08 AM (IST)
    By: Editorial Team
    sheopur story 07 12 2017

    श्योपुर। अजनोई गांव में मोरनी के तीन बच्चों को पाल रही मुर्गी नहीं रही। मुर्गी का बिल्ली ने शिकार कर लिया। मोरनी के तीन बच्चों के सिर से दूसरी बार मां का साया छिन गया। पहली बार अंड़ों में ही उनकी मां मोरनी उन्हें खेत में छोड़कर चली गई थी।

    उसके बाद मुर्गी ने अंडों से बच्चों को निकाला और तब से उन्हें पाल रही थी। मोरनी के इन तीन बच्चों का एक भाई (मोर) आदिवासी महिला कल्लेसीबाई के साथ रहता है। मुर्गी की मौत के बाद अब कल्लेसीबाई ने मोरनी के चारों बच्चों को अपने घर में रखा है।

    अगस्त में एक मोरनी ने अजनोई गांव की कल्लेसीबाई (58) पत्नी बंशीलाल आदिवासी के खेत में चार अंडे दिए थे। उसी दिन कल्लेसीबाई ने गलती से मोर के अंडों को छू लिया। उसी दिन मोरनी खेत और अंडों को छोड़कर उड़ गई। पांच दिन तक मोरनी नहीं लौटी।

    इसके बाद कल्लेसीबाई ने अपनी एक पालतू मुर्गी को घर से ले जाकर मोरनी के अंडों पर बैठा दिया। करीब 25 दिन बाद चारों अंडों से बच्चे निकले। चार दिन बाद एक बच्चे को कल्लेसीबाई घर ले आई और तीन बच्चे मुर्गी के साथ खेत में ही रहने लगे। मुर्गी के साथ पल रहे तीनों बच्चे तीन महीने से ज्यादा के हो गए और धीरे-धीरे उड़ान भरने लगे थे, लेकिन पांच दिन पहले खेत पर ही चुग रही मुर्गी का एक बिल्ली ने शिकार कर लिया।

    मुर्गी की याद में दो दिन तक कूंकते रहे मोरनी के बच्चे

    बकौल कल्लेसीबाई मुर्गी की मौत के बाद दो दिन मोरनी के तीनों बच्चे कूंकते रहे। दो दिन तक न दाना चुगा न पानी पिया। वे लौट-लौटकर खेत में उसी जगह पहुंच रहे थे, जहां से मुर्गी को बिल्ली ले गई थी। दो दिन बाद कल्लेसीबाई इन तीनों बच्चों को अपने साथ घर ले आई।

    मोरनी के इन तीन बच्चों का एक भाई मोर जन्म से ही कल्लेसीबाई के साथ रहता है। कल्लेसीबाई ने मोरनी के इस बच्चे का नाम शेरू रखा है। जैसे ही कल्लेसी शेरू को पुकारती है तो वह उसके साथ चल देता है। कल्लेसी और शेरू का स्नेह भी ऐसा है कि जहां भी कल्लेसीबाई जाती है, वहां शेरू साथ जाता है। एक मिनट के लिए भी उसे अकेला नहीं छोड़ता। मुर्गी की मौत के बाद मोरनी के चारों बच्चे अब कल्लेसीबाई के साथ ही रहते हैं।

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