जितेंद्र यादव, इंदौर। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से सरकार को टैक्स तो मिलता है, लेकिन ये बढ़ती कीमतें चुनाव के समय सरकारों को डराती भी हैं। ऐसे में लोकसभा के चुनावी मौसम में ईंधन के भाव भी चुनावी चाशनी में डूबे हुए प्रतीत होते हैं। यही कारण है कि एक मई से अब तक पेट्रोल के भाव में 11 बार गिरावट आई है, जबकि कीमत केवल एक बार बढ़ाई गई, वह भी तीन मई को केवल आठ पैसे। एक मई से अब तक पेट्रोल की कीमत में 2.05 रुपए की कमी आई है। एक मई को पेट्रोल की कीमत 76.21 रुपए प्रति लीटर थी जो 18 मई को 74.16 रुपए हो गई।

वैसे तो केंद्र में भाजपा की सरकार है लेकिन पेट्रोल की कीमतें घटाना-बढ़ाना अब पेट्रोलियम कंपनियों के हाथ में है जिसमें हर दिन घट-बढ़ होती रहती है। इस घट-बढ़ का आधार क्रूड ऑइल की कीमतों और डॉलर का मूल्य है। दिलचस्प बात है कि अप्रैल से अब तक क्रूड ऑइल की कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल और डॉलर 70 रुपए के आसपास ही है। इसमें कोई बदलाव न होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतें गिरने का कनेक्शन कहीं न कहीं चुनाव से जुड़ता है। अब आप इसे ईंधन की कीमतें कम करने के जरिए मतदाता के मन में उतरने का नोजल मानें तो यह आप जानें, लेकिन ये आंकड़े शायद कोई कहानी कह रहे हैं। इंदौर पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्रसिंह वासु बताते हैं कि आमतौर पर यह ट्रेंड रहता है कि क्रूड ऑइल और डॉलर के रेट बढ़ने या घटने पर ही हमारे देश में ईंधन की कीमतें बढ़ती और घटती हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह ट्रेंड के विपरीत है। कहीं न कहीं चुनाव ही इसका संकेत है।

अप्रैल में आठ बार बढ़ी कीमतें, तीन बार हुईं कम

जानकारों का कहना है कि इस कहानी का दूसरा भाग चुनाव नतीजों के बाद सामने आएगा, जब सरकार के सामने शायद चुनाव की मजबूरी नहीं होगी। बहरहाल, पेट्रोल की कीमतों में यह उतार चुनाव में किसे-कितना ऊपर चढ़ाएगा, यह भविष्य के गर्भ में है, लेकिन पेट्रोल की कीमतों का उठना-गिरना बड़ा दिलचस्प है। कीमतों की घट-बढ़ का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि अप्रैल में आठ बार पेट्रोल की कीमत बढ़ी, जबकि घटने के मौके केवल तीन बार आए। अप्रैल की शुरुआत में पेट्रोल की कीमत 76 रुपए प्रति लीटर थी, लेकिन 30 अप्रैल को यह 76.28 रुपए हो गई।

डीजल में 69 पैसे की गिरावट

मई के पूरे महीने में डीजल के रेट में भी 69 पैसे प्रति लीटर की गिरावट देखने को मिल रही है। मई की शुरुआत में डीजल के रेट 68.03 रुपए प्रति लीटर थे जो 18 मई को 67.34 रुपए हो गए। मई में भी डीजल के रेट आठ बार घटे और सिर्फ तीन बार बढ़ाए गए। डीजल की कीमतों का सीधा असर माल भाड़े पर पड़ता है और महंगाई की घट-बढ़ भी इसी से जुड़ी है।