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    श्‍योपुर जिले में साइकिल पर प्रसूताएं, ठप पड़ी जननी 108 की सुविधा

    Published: Thu, 15 Feb 2018 07:19 PM (IST) | Updated: Fri, 16 Feb 2018 07:38 AM (IST)
    By: Editorial Team
    sheopur woman 15 02 2018

    कराहल-श्योपुर। प्रसव पीड़ा होने के बाद महिलाओं को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए चलाई जा रही सरकार की जननी सुरक्षा योजना कराहल क्षेत्र में मजाक बनकर रह गई है। पैसा नहीं मिलने के कारण 108 को संचालित करने वाले वेंडर ने अपनी दोनों जननी गाड़िया खड़ी कर दी हैं। प्रसव पीड़ा होने पर इमरजेंसी में 108 पर कॉल करने के बाद महिलाओं को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

    जब जननी मौके नहीं पहुंचती तब मोटरसाइकिलों और साइकिलों से महिलाओं को अस्पताल लाना ले जाना पड़ रहा है। इस तरह के हालात कराहल क्षेत्र के करीब 300 गांवों में देखने को मिल रहे हैं। डिलिवरी के बाद जिस महिला को डॉक्टर तीन दिन तक चलने फिरने की अनुमति तक नहीं देते उन महिलाओं को लंबी दूरी का सफर साइकिलों पर बैठकर चलना पड़ रहा है।

    बताया गया है कि जननी एक्सप्रेस संचालित करने वाले स्थानीय वेंडर ने पंप संचालक का करीब 2 लाख रुपए ईंधन का बकाया है इस कारण पंप संचालक ने गाड़ियों को ईंधन देने से इनकार कर दिया है। खास बात ये है कि पंप संचालक के इनकार करने के बाद वेंडर ने जननी को संचालित कराने के लिए कुछ प्रयास तो नहीं किए बल्कि गाड़ियों को एक जगह पर खड़ा कर दिया। जिसका खामियाजा क्षेत्र की गरीब परिवारों की महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है।

    करीब 15 दिन से कराहल और गोरस प्वाइंट पर मौजूद रहने वाले जननी एक्सप्रेस के बंद होने के कारण करीब 40 प्रसूताओं को मोटरसाइकिलों या साइकिलों से अस्पताल पहुंचना पड़ा है।

    साइकिल पर दर्द से कराहती रही प्रसूता

    शिलपुरी निवासी शारदा पत्नी विनोद आदिवासी की एक दिन पहले ही डिलवरी हुई थी। जब शारदा को घर ले जाने के लिए जननी नहीं मिली तो उसे साइकिल पर बैठाकर घर ले जाया गया। जबकि मौसम सर्द था, लेकिन मजबूरी के चलते एक दिन के नवजात को पैदल लेकर घर तक लाना पड़ा।

    इस दौरान प्रसूता साइकिल पर बैठी कराहती रही। यही हाल कराहल के विलेंड गांव निवासी जग्गी आदिवासी के साथ हुआ। जब उसको प्रसव पीड़ा हुई तब 108 पर कॉल किया गया, लेकिन मौके पर जननी नहीं पहुंची तो जग्गी के परिजनों ने गांव में 100 रुपए किराया देकर मोटरसाइकिल लानी पड़ी।

    इस मोटरसाइकिल से प्रसूता को प्रसव पीड़ा होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी तरह दांती गांव निवासी मीना, कलमी निवासी साबित्री आदिवासी, भौतीपुरा निवासी मीना आदिवासी, कलमी सहराना निवासी सुशीला आदिवासी, पाहेला निवासी सर्बती आदि महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने के बाद मोटरसाइकल या साइकिलों से कराहल अस्पताल लाया गया।

    500 रुपए पेनाल्टी देना मंजूर पर जननी पर ध्यान नहीं

    खास बात ये है कि जननी की सुविधा वेंडर और 108 ठेका कंपनी के बीच उलझकर रह गई है। कंपनी की ओर से वेंडर को करीब 2 महीने का भुगतान नहीं किया है। भुगतान नहीं होने कारण वेंडर ने गाड़ियों को खड़ा कर दिया है। जबकि वेंडर द्वारा 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से दोनों गाड़ियों की पेनाल्टी भरी जा रही हैं फिर भी गाड़ियों का संचालन शुरू नहीं कराया जा रहा है। 31 जनवरी से क्षेत्र में जननी का संचालन ठप पड़ा हुआ है।

    इनका कहना है

    कंपनी ने मुझे दो माह का भुगतान नहीं किया है। पैसा नहीं मिलने के कारण पंप संचालक के पैसे नहीं पहुंच पाए। पैसे आ जाएंगे उसके बाद गाड़ियां शुरू करा दी जाएंगी।

    गिरिजाशंकर गुप्ता, वेंडर, जननी कराहल

    जननी 108 की सुविधा ठेका कंपनी की व्यवस्था है। अगर किसी की ओर से जननी की सुविधा नहीं मिलने की शिकायत आएगी तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी और कंपनी का लिखा जाएगा।

    डॉ एनसी गुप्ता, सीएमएचओ, श्योपुर

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