भोपाल। चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव की दो दिन चुनाव आयोग के साथ दिल्ली में बैठक हो चुकी है। अब शुक्रवार को वे सभी कलेक्टर्स के साथ भोपाल में बैठक करके तैयारियों पर बात करेंगे। इसमें फोकस मतदाता सूची के साथ इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वोटर वैयरीफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) पर रहेगा। कानून व्यवस्था को लेकर विधानसभा चुनाव के अनुभव के आधार पर आकलन किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि एक जनवरी 2019 की स्थिति में मतदाता सूची को तैयार करने का काम पूरे प्रदेश में चल रहा है। 25 जनवरी तक नाम जुड़वाने, कटवाने और संशोधन के लिए दावे-आपत्ति ली जाएंगी। 22 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा।

इसके आधार पर ही लोकसभा चुनाव कराए जाएंगे। कलेक्टरों के साथ बैठक में ईवीएम और वीवीपैट के मुद्दे पर चर्चा होगी। विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर वीवीपैट खराब हुए थे, जिसको लेकर राजनीतिक दलों ने काफी शिकायतें भी की थी। वहीं, एक जगह पुनर्मतदान सिर्फ इसलिए कराना पड़ा था, क्योंकि कंट्रोल यूनिट का संचालन करने वाले कर्मचारी ने गलती की थी।

ऐसा लोकसभा चुनाव में न हो, इसके लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी पहले से तैयारी कराएगा। अधिकारियों-कर्मचारियों को फिर से प्रशिक्षण देने के साथ वीवीपैट और ईवीएम की जांच भी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कराई जाएगी।

शिकायतों के त्वरित निराकरण पर जोर

विधानसभा चुनाव के दौरान शिकायतों के निराकरण को लेकर शुरुआती दौर में चुनाव आयोग संतुष्ट नहीं था। कांग्रेस और भाजपा ने इसको लेकर चुनाव आयोग तक शिकायत की थी।

तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने इसे गंभीरता से लेते हुए पूरी रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद शिकायतकर्ता को वाटसएप पर शिकायत पर उठाए कदम की सूचना देने का तंत्र बनाया गया था। बताया जा रहा है कि ज्यादातर शिकायतों का निराकरण भी हो चुका है।