इंदौर, कपिल नीले। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के रिजल्ट तैयार करने की गोपनीयता पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। शुक्रवार को विश्वविद्यालय में एक छात्रा पहुंची। मार्कशीट में फर्स्ट ईयर के प्रैक्टिकल मार्क्स चढ़वाने और सेकंड ईयर परीक्षा में सम्मिलित होने को लेकर अनुमति मांगी। साधे कागज पर छात्रा ने परीक्षा नियंत्रक को आवेदन दिया, जिसे विवि को भेजने की बजाए कॉलेज ने सीधे ही प्रैक्टिकल मार्क्स भी आवेदन में दर्शा दिए। कॉलेज की लापरवाही पर तुरंत परीक्षा नियंत्रक ने आपत्ति उठाई। उधर कॉलेज प्रबंधन से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।

यह कारनामा मंडलेश्वर के सरकारी कॉलेज से हुआ है। यहां से बीएससी कर रही शिवानी मनोरे फर्स्ट ईयर में बॉटनी विषय की प्रैक्टिकल एक्जाम नहीं दे पाई। इस बीच फर्स्ट ईयर का रिजल्ट जारी हुआ, जिसमें उक्त विषय में प्रैक्टिकल में छात्रा को अनुपस्थित दर्शाया। बाद में छात्रा ने नवंबर 2018 में दोबारा प्रैक्टिकल एक्जाम करवाने के लिए कॉलेज प्रबंधन से गुहार लगाई। तब जिम्मेदारों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि एक छात्रा के लिए एक्सटर्नल को नहीं बुलाया जा सकता है।

मार्च में अन्य कोर्स के लिए प्रैक्टिकल एक्जाम करवाई गई, जिसमें बीएससी की इस छात्रा का भी वायवा करवाया गया। 14 मार्च को एक्जाम हुई। इस बीच यूजी कोर्स के सेकंड ईयर की परीक्षा तय हो गई। विवि ने इनके फॉर्म भरने की तारीख घोषित कर दी। मगर बीएससी की छात्रा शिवानी को परीक्षा फॉर्म भरने में परेशानी आई। फिर छात्रा ने परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए कॉलेज में संपर्क किया। अनुमति के लिए प्राचार्य को आवेदन दिया। कॉलेज प्रबंधन ने छात्रा को परीक्षा में बैठने के लिए पात्र माना और उसके प्रैक्टिकल मार्क्स आवेदन पर लिख दिए। प्रैक्टिकल एक्जाम में 50 में से 35 अंक दिए गए हैं।

ये हैं नियम

विद्यार्थियों की प्रैक्टिकल व इंटरनल एक्जाम कॉलेज में करवाई जाती है। जहां विवि से एक्सटर्नल की टीम भेजी जाती है। इसके बाद कॉलेज इन मार्क्स को ऑनलाइन व ईमेल के लिए विवि के कम्प्यूटर सेंटर को भेजता है। मुख्य परीक्षा और प्रैक्टिकल एक्जाम के मार्क्स एक साथ मार्कशीट पर चढ़ाए जाते हैं।

कॉलेज को भेजेंगे पत्र

छात्रा के आवेदन पर कॉलेज ने प्रैक्टिकल मार्क्स लिख दिए थे। यह बिलकुल गलत है। परीक्षा के अंक काफी गोपनीय रखे जाते हैं। कॉलेज की लापरवाही सामने आई है। मामले में उन्हें पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। - डॉ. अशेष तिवारी, परीक्षा नियंत्रक, डीएवीवी