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    मौसम की मार से सीताफल के वजन और मिठास पर पड़ा फर्क

    Published: Sat, 14 Oct 2017 04:10 AM (IST) | Updated: Sat, 14 Oct 2017 04:10 AM (IST)
    By: Editorial Team

    सारंगपुर के मीठे सीताफल की देशभर में रहती है डिमांड, इस बार कम आवक

    सचित्र फोटो एसआरपी 1 सारंगपुर। सीताफलों की छंटनी करते स्थानीय व्यापारी।

    सारंगपुर।नवदुनिया न्यूज

    सारंगपुर की मियांजन खां की राड़ी से मालवा के प्रमुख एवं प्रसिद्घ रसीले सीताफल इन दिनों बाजार मे आना शुरू हो गए हैं। जल्द ही यह प्रदेश के इंदौर, उज्जैन सहित अन्य प्रदेश गुजरात के अहमदाबाद सहित देशभर के प्रमुख शहरों में निर्यात किए जाएंगे। सीताफल के उत्पादन के मामले मे जिले में नंबर 1 रहने वाली सारंगपुर की करीब 40 से 45 बीघा में फैली सीताफल राड़ी (जंगल) में इस बार मौसमी प्रतिकूलता के चलते गत वर्षों की तुलना में वजन, आकार एवं मिठास के अलावा संख्या के मामले मे फलों की स्थिति पर विपरित प्रभाव पड़ा है। बीते साल की तुलना में उत्पादन भी कम हुआ है।

    बीते साल की तुलना में भाव कम

    इस बार भी पिछले वर्ष के मुकाबले राड़ी 12 लाख 52 हजार के स्थान पर 13 लाख 11 हजार रुपए में व्यापारी इकलास अंसारी एवं उनके साथियों से बोली लगाकर खरीदी है। बीते 7 वर्षों मे सीताफलों के दामों मे 5 से 6 गुना की बढ़ोतरी हुई है। इस साल सीताफल प्रतिनग 10 से 30 रुपए तक बिक रहा है, जो बीते वर्ष में 50 रुपए के भाव से बिका था।

    परिवारों के रोजगार का साधना भी है यह सीताफल

    दशहरे से दीपावली के मध्य के समय से हर साल सीताफल की राड़ी में फलों की बहार आ जाती है। ऐसा कोई साल नहीं रहा, जब राड़ी में फल नहीं लदे हों। सीजन के समय करीब 2 माह तक शहर में न केवल फेरीवाले फुटकर विक्रताओं को बल्कि राड़ी में फलों की तुड़ाई, छंटाई, पैकिंग, परिवहन एवं अन्य सहायक कार्यों में लगे करीब 100 परिवारों के लिए सीताफल की राड़ी रोजगार का साधन बनती आ रही है। यहां कार्य करने वाले प्रत्येक मजदूर को 250 से 300 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी मिल रही है।

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