फरवरी में कराए थे दो बोर, पीएचई को तीन माह बाद चेक करने की याद आई

चेकिंग के बाद पीएचई के लापरवाह अधिकारी बोले आधा घंटा चल पाई मोटर, और फिर अपने हाल पर छोड गए पड़ाना की हजारो की आबादी को

शोपिस बनी पेयजल टंकी तक और टंकी से नलों तक पानी पहुंचाने की कोशिश अब भी अधूरी, पीएचई के निकम्मेंपन से आक्रोश में जनता

सचित्र एसआरपी 21 अधिकारियों का कहना, बोरिंग चेक की तो चली आधा घंटे से भी कम।

पड़ाना।नवदुनिया न्यूज

दिगम्बर माह से जलसंकट का दंश झेल रहे और निजी टेंकरों के मोन पानी के सहारे टीके पड़ानावासियों को उस समय उम्मीद जगी थी जब कि फरवरी माह में पीएचई ने ईदगाह रोड किनारे दो बोर कराए थे, जिनमें पानी भी निकला था, लोग इस फिराग में थे कि अब पीएचई एवं पंचायत पेयजल उपलब्ध करानें के लिए व्यवस्था करेंगी लेकिन यह उम्मीद सिर्फ एक उम्मीद ही रही, क्योंकि पीएचई को बोरिंग के पानी को चेक करने की याद भी तीन माह बाद आई तब जब कि जलस्तर पाताल में पहुंच गया है। जबकि उन्हें फरवरी माह में बोरिंग के तुंरत बाद उसमें मोटर पम्प डालना चाहिए था जिससें कि इन तीन माह में लोग उसका उपयोग पेयजल में कर सकते थे, अब जब पानी का जलस्तर काफी नीचे है तो ऐसे में भला बोर से पानी कैसे आएगा सवाल यही जनता के मन में आ रहा है।

आधा घंटा भी नही चली मोटर

नगर में जल संकट से निपटने के दिखावे के लिए पीएचई विभाग के द्वारा तीन माह पहले दो बोर 600-600 फीट गहरे बोर ईदगाह रोड पर करवाए थे। विभाग के द्वारा हालही में उक्त बोर में 540 फीट मोटर उतार कर के बोर को चेक किया गया परंतु उक्त बोर में पर्याप्त रूप से पानी नहीं मिला। पीएचई विभाग के सहायक यंत्री गोविंद भूरिया, उपयंत्री घनश्याम अग्रवाल, मैकेनिक रामेश्वर शर्मा ने चेक किया तो मोटर मात्र 19 मिनट ही पानी दे सकी। उल्लेखनीय है कि यदि तीन माह पहले इन बोर में मोटर डाली जाती तो शायद लोगों को उस दिनो में पेयजल इन बोर से मिल सकता था, लेकिन विभाग को तीन माह के बाद इसे चेक करने की याद आई। जो कि पुरी तरह से विफल रही। इससे पीएचई की लापरवाही पूरी तरह से उजागर हो रही है।

फिर..निजी टेंकरो के सहारे

बोरिंग चेक करने के बाद विभागाधिकारी अपने रस्ते पर लग गए और जनता को फिर से निजी टेंकरों के सहारेपर टीकी नजर आ रही है। ऐसे में करीब 10 हजार की आबादी वाली पड़ाना जिले की सबसे बड़ी पंचायत में करीबन 18 वर्ष पहले बनी 27 लाख लागत की पेयजल टंकी 6 महीने से पानी की राह तक रही है। नगर के 39 हैंडपम्प है जिनमें से करीब-करीब सभी बंद पड़े है, लेकिन जलसंकट को लेकर पीएचई सहित शासन प्रशासन कोई ठोस कदम उठाने तक तैयार नहीं है। लोगों रुपए चुकाकर मौल पानी खरीदकर काम चला रहे है और प्रशासन का यही रवैय्या आगे भी उन्हें इसी हाल पर छोड़ने की तरफ इशारा कर रहा है।

बोले जिम्मेदार

फरवरी माह में दो बोर कराए थे, हमारी उपयंत्री ने एक बोर में पानी होने की संभावना जताई थी, जिसमें हमने मोटर डालकर चालू करने के प्रयास किए लेकिन उसमें पर्याप्त पानी नहीं मिला। जलस्तर गिर गया है और कोई साधन या स्रोत ऐसे नहीं है कि वह से पानी लेकर टंकी में ले जाए और लोगों के घरों तक पानी पहुंच सके।

गोविंद भूरिया, कार्यपालन यंत्री, पीएचई, राजगढ़।