रीवा। नईदुनिया प्रतिनिधि

कामना और भक्ति के बीच होने वाले अंतर पर व्याख्या करते हुए सुविख्यात कथा वाचक डॉ. गणेश प्रसाद शुक्ला वैदिक महाराज ने जल्दर गांव में आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान सप्ताह के दौरान उपस्थित भक्तों को भक्ति का रसपान कराते हुए बताया कि एक कामना पूरी होने पर मानव स्वभाव है कि दूसरी कामना शुरू कर देता है। यही वजह है कि कामना और भक्ति में अंतर होता है।

उन्होंने भगवान भक्त सुदामा के चरित्र पर व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान सुदामा को सबकुछ देना चाहते थे। लेकिन उनकी भक्ति को देखिए कि वे कुछ भी लेने के इच्छुक नहीं रहे। जिसके चलते वे सदैव भक्ति के लिए जाने जाते हैं। उनके अंदर कामना अगर भरी होती तो भक्ति के रास्ते से वे भटक जाते। यही कामना और भक्ति के बीच का अंतर होता है।

आचार्य वैदिक महाराज ने भक्तों को कथा के दौरान कहा कि भक्ति से ही सबकुछ प्राप्त हो जाता है और सुदामा स्वयं इसके सबसे बड़े उदाहरण है। वे बिना कामना किए हुए भगवान की भक्ति में लगे रहे। विपदा और कष्ट आने के बाद भी उन्होंने सच्चाई और भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। जिसके चलते उन्हें भगवान प्राप्त हुए और बिना कामना किए ही उन्हें सबकुछ प्राप्त हो गया। उन्होंने कहा कि आज भक्ति की बजाय लोग कामना ज्यादा कर रहे हैं। भगवान की पूजा भक्ति करने के दौरान वे पूजा-पाठ में कम और भगवान से तरह-तरह की कामना ज्यादा करते हैं। मेरे घर में ऐसा हो जाए, धन, सम्पदा खूब आ आए, इस तरह की विपत्तियां दूर हो जाए। आदि तरह से भगवान के समक्ष हर पल कामना करते हैं। जबकि यह जरूरी नहीं है। जरूरी है कि वे भक्ति का मार्ग अपनाए भगवान भक्तों के कष्ट को दूर करते हैं। आयोजित कथा के दौरान काफी संख्या में आसपास के ग्रामीणजन पहुंचे हुए थे और स्वामी जी द्वारा सुनाई गई कामना भक्ति के बीच सुदामा चरित्र के प्रसंग को लोगों ने बड़े ही सहजता और ध्यान मग्न होकर सुनते रहे।

फोटो- 19- भगवत कथा का वाचन करते वैदिक महाराज।

20- कथा श्रवण करते भक्त।

भागवत कथा में महाराज ने भक्तों को कराया कथा का रसपान