रीवा। नईदुनिया प्रतिनिधि

लोकसभा आम चुनाव को लेकर तैयारियां जोरों पर है जहां एक ओर मीटिंग कर कार्य योजना तैयार की जा रही है वहीं दूसरी ओर बस ऑपरेटरों ने जिला निर्वाचन अधिकारी को साफ शब्दों में कह दिया है कि भुगतान नहीं तो बस नहीं। अगर समय रहते भुगतान नहीं हो पाया तो मतदान कर्मियों को गंतव्य तक ले जाने के लिए बस ऑपरेटर बस देने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन सहित क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के सामने भी समस्या आ खड़ी हुई है, हो भी क्यों ना चुनाव में बस ऑपरेटरों की बस को अधिग्रहित करने के बाद चुनाव प्रक्रिया पूरी करा ली जाती है लेकिन भुगतान के लिए बस ऑपरेटर केवल दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं।

अब तक मिला डीजल

बस ऑपरेटर संघ के सचिव प्रमोद सिंह बताते हैं की क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी द्वारा बस का अधिग्रहण कर चुनाव में वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है इसके लिए गंतव्य तक जाने के लिए उनके द्वारा तत्काल डीजल भुगतान किया जाता है। लेकिन शेष किराया देने की बात कह कर पूरे मामले को पेंडिंग में रखा जाता है। अब तक तकरीबन डेढ़ करोड़ से ज्यादा की राशि बकाया है जिसे लेकर कई बार जिला निर्वाचन अधिकारी सहित क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से भी बातचीत की गई और जल्द भुगतान होने की बात कहकर मामले को डाल दिया जाता है। बस ऑपरेटरों का ध्यान अधिकारी को तब आता है, जब पुनः चुनाव में वाहनों की आवश्यकता होती है।

पुराने भुगतान पर एक नजर

बस यूनियन की माने तो भुगतान को लेकर निर्वाचन ही नहीं बल्कि अन्य रैली, परीक्षा के समय इस्तेमाल होने वाले वाहन, सरकारी आयोजनों में लगने वाले वाहनों के भुगतान की स्थिति एक जैसी है। अगर निर्वाचन की बात करें तो वर्ष 1999 में संपन्न हुए मंडी चुनाव में वाहनों का भुगतान तकरीबन 12लाख रुपए, 2015 में आयोजित हुई त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में तकरीबन साढ़े 5 लाख, वर्ष 2018 में हुए विधानसभा की कुल 52 लाख 70 हजार बकाया हैं। इसी तरह पुलिस विभाग की बात करें तो विधानसभा चुनाव में वाहनों का भुगतान तकरीबन 30 लाख का बकाया है। सरकारी रैली एवं अन्य आयोजन के तकरीबन 16 लाख 30 हजार रुपए का भुगतान अभी भी लंबित है।

रैलियों का भुगतान अटका

बस ऑपरेटर्स की सेवाएं विभिन्ना सरकारी आयोजनों के साथ राजनीतिक दल की रैलियों में भी ली जाती है। विगत सरकार के कार्यकाल में हुए कुल आयोजनों में तकरीबन 47 लाख रुपए बकाया है। जिसमें सर्वाधिक भुगतान अनूपपुर में आयोजित हुए कार्यक्रम में रीवा से 200 बसें भेजी गईं थीं। जिसका कुल 40 लाख रुपए का भुगतान होना शेष है, इसी तरह भोपाल में आयोजित रैली में कुल 26 लाख रुपए का भुगतान होना शेष है। ओंकारेश्वर रैली का तकरीबन 50 हजार का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है।

बता दिया गया है टारगेट

जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा हाल में संपन्न कराए जा रहे लोकसभा चुनाव में तकरीबन 560 वाहनों की जरूरत है। जिसमें बसों की संख्या 434 बताई गई है, साथ ही तकरीबन 400 छोटे वाहनों का भी टारगेट रखा गया है। उक्त वाहन के अधिग्रहण करने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को सौंपी गई है। जिसे लेकर जिला परिवहन अधिकारी द्वारा बस ऑपरेटरों से बस उपलब्ध कराने की बात कहीं गई है।

क्यों हुई देरी

जिला निर्वाचन कार्यालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो विधानसभा चुनाव के दौरान बजट समय पर जारी नहीं हो पाया था। जिसके कारण भुगतान समय सीमा के अंदर नहीं हो पाया है। हालांकि भुगतान के लिए कई बार पत्र भी लिखा गया है। अगर वर्तमान की बात करें तो फाइल भुगतान के लिए चल रही है, अधिग्रहण के पहले ही भुगतान करने का प्रयास किया जा रहा है।

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बस एसोसिएशन के कई ऑपरेटरों का अब तक तकरीबन डेढ़ करोड़ से ज्यादा का भुगतान नहीं हो पाया है। उक्त राशि चुनाव संपन्ना कराने एवं सरकारी रैलियों में ली गई सेवाओं का किराया है। इसके लिए समय-समय पर हमने अधिकारियों से बात की है। सभी का शीघ्र भुगतान कराने की बात कही जाती है।

-प्रमोद सिंह, सचिव बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन

बस ऑपरेटर के पुराने भुगतान लंबित हैं, उसे जल्द ही कराए जाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। बस अधिग्रहण के पहले भुगतान कर दिया जाएगा। लोकसभा आम चुनाव में बसों की आवश्यकता पड़ेगी, जिसके लिए हम बस एसोसिएशन सहित बस मालिक से बात कर रहे हैं। कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

-मनीष त्रिपाठी, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी रीवा

भुगतान का मामला मेरे संज्ञान में आया है फाइल तैयार कराई गई है, जल्दी भुगतान किया जाएगा, देरी क्यों हुई इसका भी पता लगाया जा रहा है। जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी, आम चुनाव में बस की उपलब्धता कराने का काम परिवहन विभाग का है, लिहाजा भुगतान में हो रही देरी की समस्या को उन्हें देखना चाहिए।

-ओम प्रकाश श्रीवास्तव, कलेक्टर रीवा