रीवा। नईदुनिया प्रतिनिधि

विकास के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का मामला नया नहीं है। रेल लाइन, स्टेट हाईवे, नेशनल हाईवे या फिर बड़ी कंपनियां स्थापित होते समय पेड़ों की कटाई की जाती है। पर्यावरण विभाग व वन विभाग इस बात की एनओसी भी जारी करता है कि जितने पेड़ काटे जाएंगे उसकी दोगुनी संख्या में पौधरोपण का काम होगा। लेकिन यह शायद रीवा जिले में नियम लागू नहीं होते हैं। यही कारण है कि हाल में ही नेशनल हाईवे 27 व 135 के चौड़ीकरण को लेकर कांटे गए वृक्षों के स्थान पर पौधरोपण न के बराबर किया गया। कई बार उक्त मामला विधानसभा के पटल पर भी रखा गया। लेकिन विधानसभा जांच कमेटी के पास मामला भेजने की बात कहकर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। यही कारण है कि उक्त राजमार्ग में सफर करने वाले लोगों को छाया तक नसीब नहीं होती है।

फलदार वृक्ष के स्थान पर लगाए गुलमोहर के पौधे

नेशनल हाईवे 135 की बात करें तो निर्माण एजेंसी द्वारा निर्माण कार्य के दौरान जामुन, महुआ, कहुआ, आम व नीम के पेड़ काटे गए थे। जिनकी कुल संख्या वन विभाग ने कुल 5670 बताई थी। साथ ही विभाग ने उन्हें 12 हजार पौधे लगाने के निर्देश भी दिए थे। लेकिन निर्माण एजेंसी द्वारा सड़क के अगल-बगल और डिवाइडर में गुलमोहर, कदैल, गुड़हर के पौधे लगाए गए हैं। जो कि मौसम के अनुसार 4 से 6 महीने के अंदर ही सूख जाते हैं। रख-रखाव न होने के कारण पौधे पेड़ का रूप नहीं ले पाते हैं। पूरे मामले में विशेष बात यह है कि जब भी यह मामला उठाया गया निर्माण एजेंसी द्वारा सड़क की पटरियों में पौधरोपण का कार्य शुरू किया जाता है। पौधरोपण करते समय मौसम का ध्यान तक नहीं रखा जाता।