भोपाल (स्टेट ब्यूरो)। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने जिला व जनपद पंचायतों के सवा सात हजार पदाधिकारियों को 406 करोड़ रुपए देने का पत्र तो जारी कर दिया पर यह राशि सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी में अटक गई। कोषालय का सॉफ्टवेयर इन दिनों काम नहीं कर रहा है। इसकी वजह से न तो कर्मचारियों के वेतन बिल क्लीयर हो रहे हैं और न ही अन्य राशि का भुगतान हो पा रहा है। इसी प्रक्रिया में 14वें वित्त आयोग की सिफारिश पर जनप्रतिनिधियों को स्वेच्छा से अपने क्षेत्र की पंचायतों में विकास कार्य के लिए दी गई राशि का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने जिला व जनपद पंचायतों के पदाधिकारियों की मांग पर उन्हें हर साल एकमुश्त स्वेच्छानुदान देने की व्यवस्था लागू की है। 2018-19 के लिए 406 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। यह राशि जिलों को आवंटित भी कर दी गई है। इसको लेकर विभागीय मंत्री ने जनप्रतिनिधियों को पत्र भी लिख दिया पर राशि सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामी के कारण अटक गई है।

बताया जा रहा है कि पहले दो सॉफ्टवेयर थे, लेकिन इन्हें एक कर दिया गया है। एक सॉफ्टवेयर ज्यादा एंट्री का बोझ नहीं उठा पा रहा है। इसके कारण नई एंट्री अटक गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिला व जनपद पंचायतों को जो राशि आवंटित की गई हैं, उसके कामों की स्वीकृति के आदेश 10 जुलाई तक होने हैं। दरअसल, चुनावी साल में सरकार चाहती है कि स्वीकृत राशि के कामों का आचार संहिता लागू होने से पहले भूमिपूजन या शिलान्यास हो जाए, ताकि बाद में कोई समस्या नहीं आए।

डेढ़ साल नहीं मिली थी राशि

जिला व जनपद पंचायतों के पदाधिकारियों को बीते डेढ़ साल में एकमुश्त राशि उपयोगिता प्रमाण-पत्र जमा न होने की वजह से नहीं मिली थी। तत्कालीन अपर मुख्य सचिव राेश्याम जुलानिया ने यह कहते ही राशि देने से इंकार कर दिया था कि पहले राशि के उपयोग को लेकर प्रमाण-पत्र लिए जाएं। जनप्रतिनिधियोंं ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि यह काम मुख्य कार्यपालन अधिकारियों का है न कि हमारा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझा था और राशि जारी हुई थी।

किसे कितनी मिलती है राशि

जिला पंचायत

अध्यक्ष- 25 लाख

उपाध्यक्ष- 15 लाख

सदस्य- 10 लाख

जनपद पंचायत

अध्यक्ष- 12 लाख

उपाध्यक्ष- 8 लाख

सदस्य- 4 लाख