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    राजनीति में न पड़ें, केवल अपने काम पर फोकस करें : सचिन जिगर

    Published: Fri, 08 Dec 2017 01:52 PM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 01:56 PM (IST)
    By: Editorial Team
    sachin jigar indore 2017128 135643 08 12 2017

    इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। 'हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया, एबीसीडी, एबीसीडी 2, ओ माय गॉड, माय नेम इज एंथनी गोंजाल्विस, शोर इन द सिटी, हम तुम शबाना, रमैय्या वस्तावैया, हिंदी मीडियम, फ्लाइंग जट' जैसी कई फिल्मों को अपने सुरीले संगीत से हिट बनाने वाली संगीतकार जोड़ी सचिन जिगर गुरुवार को एक निजी कार्यक्रम के सिलसिले में शहर में थे।

    नईदुनिया से खास गुफ्तगू में दोनों कलाकारों ने कहा कि संगीत की दुनिया अपार संभावनाओं से भरी हुई है, लेकिन इसके लिए आपको ईमानदारी से संगीत को समय देना है। अगर कोई नया इस इंडस्ट्री में करियर बनाना चाहता है तो वो इधर-उधर की राजनीति में पड़ने के बजाय अपने काम पर फोकस करे। मेहनत और लगन का न कल कोई तोड़ था, न आज है और न ही कभी भविष्य में होगा।

    सचिन ने बताया कि वे पहले सीए कर रहे थे और जिगर एमबीए। मगर फिर हमें लगा कि हम संगीत के क्षेत्र में कहीं बेहतर परफार्म कर सकते हैं इसलिए हमनें म्यूजिक को ही अपना लक्ष्य बना लिया और फिर पूरी शिद्दत से इसे पाने में जुट गए। हालांकि शुरुआती दौर बेहद परेशानियों भरा था मगर हमने हिम्मत नहीं हारी और एक के बाद एक मकाम तय करते चले गए।

    डर अच्छा होता है

    भविष्य को लेकर डर अच्छा होता है। क्योंकि जब तक हमें कोई डर, चिंता या फिक्र नहीं होगी हम पूरे पैशन से काम नहीं करेंगे। एबीसीडी के गानों से युवाओं के दिल की धड़कन बन चुके बॉलीवुड के मशहूर गायक और म्यूजिक कंपोजर सचिन और जिगर ने कहा कि युवाओं को जीवन में अपना लक्ष्य तय करने की जरूरत है। जिस क्रिएटिव काम में भी मन लगे वो जरूर करना चाहिए।

    अपने डर को पैशन बना लें और फिर खुलकर कोशिश करें। कामयाबी एक दिन आपके कदम चूमेगी। अगर हम लोग डरकर हार मान लेते तो शायद आज इस मकाम पर नहीं होते। आपको यकीन नहीं होगा कि शुरुआत में हमें किस हद तक संघर्ष करना पड़ा। यहां तक कि लोगों को चाय भी पिलानी पड़ी।

    लाइफ पार्टनर जैसी होती है संगीतकार जोड़ी

    सचिन जिगर कहते हैं जब दो अंजान लोग शादी करके खुश रह सकते हैं तो दो संगीतकार एक-दूसरे को समझकर साथ-साथ काम क्यों नहीं कर सकते हैं? अब तो कई लोग हम दोनों का नाम सुनकर सोचते हैं कि हम एक ही शख्स हैं। जिगर ने कहा कि आजकल की फिल्मों की विषयवस्तु पहले के दौर से बिलकुल अलहदा हो गई है। ऐसे में गोल्डन ईरा के गाने उन पर नहीं फबेंगे। इसलिए हमें सब्जेक्ट के मुताबिक गीतों की धुनें बनानी पड़ती हैं।

    लिरिसिस्ट भी उसी हिसाब से लिखते हैं और उन्हें उसी अंदाज में गाया जाता है। गोल्डन ईरा की बराबरी करना मुश्किल है। लेकिन अब भी कई मेलोडियस नगमें बन रहे हैं। जो लोगों की पसंद की कसौटी पर खरे भी उतर रहे हैं। मगर आज कल दिक्कत ये है कि आडियंस का टेस्ट बहुत जल्दी बदल जाता है। ऐसे में अपने संगीत को लगातार अपडेट और अपग्रेड बनाए रखने की कठिन चुनौती हम लोगों को हर रोज फेस करनी पड़ती है।

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