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    धरोहरों की गलत जानकारी दे रहे पुरातत्व विभाग के साइन बोर्ड

    Published: Tue, 13 Mar 2018 04:08 AM (IST) | Updated: Tue, 13 Mar 2018 04:08 AM (IST)
    By: Editorial Team

    मूसा बावड़ी का वास्तविक नाम - मूषक बावड़ी

    चन्देरी न्रिप- अशोकनगर जिले का प्राचीन नगर चन्देरी एक विशिष्ट शहर है। इस छोटे से शहर में कई पुरातात्विक धरोहरें हैं। यहां ऐसी धरोहरों भी हैं जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। नगर की इन धरोहरों की देखभाल राज्य पुरातत्व विभाग के जिम्मे है। विभाग के जिम्मेदार अफसरों व कर्मचारी की लापरवाही से लोगों को चंदेरी के इतिहास की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। यहां विभाग द्वारा लोगों को जानकारी देने के लिए लगाए साइन बोर्डों पर गलत जानकारी अंकित है। इससे शोधार्थी और पर्यटकों क भ्रम की स्थिति में हैं। विभाग द्वारा लगाए बोर्ड इनको नए-नए नामों व निर्माण काल को परिवर्तित करके प्रदर्शित किया जा रहा है। कुछ समय पूर्व ही राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित 54 स्मारकों में से लगभग 38 स्मारकों के नामों व निर्माण काल व स्थान में परिवर्तन की जानकारी प्रशासन को लिखित रूप में दी गई थी। पूर्व काल में विधायक निधि से लगाए गए स्मारकों के साइन बोडोर् में भी भ्रमित करने वाली जानकारी अंकित है। इसको लेकर इतिहास के संबंध में हमेशा तथ्यों के साथ अपनी सटीक बात रखने वाले डॉ. अविनाशकुमार जैन और उनकी टीम ने इस पर आपत्ति व्यक्त की थी। प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। पुरातत्विक धरोहरों के नाम, निर्माण काल और उनके निर्माणकर्ता सहित अन्य जानकारियां गलत होने से इतिहास प्रेमियों में नाराजगी है। चन्देरी नगर को पर्यटन के नाम पर नई-नई योजनाओं से विकसित करने के लिए नए-नए उपक्रम किए जा रहे हैं। लेकिन इनमें लापरवाही के चलते नगर की विरासतों व इतिहास को भ्रमित किया जा रहा है।

    इन धरोहरों के नाम बदले

    जानकारी के अनुसार राज्य पुरातत्व विभाग ने नगर में कई धरोहरों पर साइन बोर्ड लगवाए हैं। यहां कई बोर्ड तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी के कार्यालय की ओर से विधायक निधि से लगवाए थे। इनमें गलती देखने को मिल रही है। इनमें से एक है मदरसा दरवाजा। डॉ. अविनाशकुमार जैन के मुताबिक इस दरवाजे को इतिहासकारों ने खिलजी दरवाजा के नाम से उल्लेख किया। मोहल्ले के लोग इसे जोहरी दरवाजा के नाम से जानते हैं। लेकिन यहां जानकारी देने के लिए लगाए गए बोर्ड पर इसका नाम मदरसा दरवाजा लिखा है। वहीं खाड़ी की बाबड़ी को खारी बाबड़ी, मूषक बाबड़ी को मूसा बाबड़ी, तमरपुरा दरवाजे का नाम खिलजी सराय लिखा है। इसके साथ ही करीब 38 स्मारकों के नामों व निर्माण काल व स्थान में परिवर्तन है। इसके साथ ही चंदेरी विरासत के नाम से लगे बोर्ड पर भी गलत जानकारी दी है।

    मूसा बावड़ी की वास्तविकता -

    डॉ.अविनाश जैन ने बताया कि इस बावड़ी का प्राचीन नाम मूषक बावड़ी था। क्योंकि इस बावड़ी में मूषक (चूहा) अत्यधिक मात्रा में थे। लगभग 100 वर्ष पूर्व इस बावड़ी में नगर के एक सुप्रसिद्ध परिवार की महिला की इस बावड़ी में मौत हो गई थी। जब तक लोगों को ध्यान उन पर जाता तब तक चूहों ने उनके शव को खोखला कर दिया था।

    डॉ. जैन ने बताया कि वर्तमान मूसा बावड़ी नगर की ऐसी एकमात्र बावड़ी है जिसमें सीड़ियां लगी होने के बाद अन्दर कुआं है। इसका कारण यह है कि हमारे पूर्वजों के काल में चन्देरी नगर में जल की अत्यधिक समस्या रहती थी। यह बावड़ी गर्मियों में खाली हो जाती थी तो बावड़ियों की सफाई व गहरीकरण किया गया। करीब 200 वर्ष पूर्व लोगों ने यह अनुमान लगाया कि इसको गहरा करने पर पानी प्राप्त हो सकता है और वही हुआ कि बावड़ी के गहरीकरण से एक कुआं बन गया और पर्याप्त पानी प्राप्त हुआ। जिससे यह एक अनोखी बावड़ी बनकर तैयार हुई। जो ऊपर से बावड़ी और उसके अंदर कुआं बनाया गया।

    बावड़ी पर लगे बोर्ड पर अंकित जानकारी है गलत

    डॉ। जैन ने बताया कि इस बावड़ी पर लगा बोर्ड गलत है इस पर जो जानकारी लिखी गई है वह इस बावड़ी की नहीं है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट (1952-53) नं. 65 तथा ईआईएपी (1955-56) : 121-22 में इसका उल्लेख है। यह बावड़ी हॉजखास के समीप है। हॉजखास की इस बावड़ी से फारसी का सात पंक्तियों का काव्यात्मक शिलालेख प्राप्त है। जो गूजरी महल संग्रहालय में संरक्षित है। जिसमें मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी के समय तत्कालीन समय के बुजुर्ग व धर्म के प्रमुख (सदर) मखदूम शेख मूसा काजिन (कदान) के द्वारा हिजरी 858 (सन 1754 ई) में इस बावड़ी का निर्माण कराया गया गया था। इस लेख में उस समय के उच्चकोटि के संत मसीहा शेख राजू का नाम भी अंकित है। इस बोर्ड को हॉजखास के पास वाली बावड़ी जिसे वर्तमान में हॉजखास का चौपड़ा कहा जाता है वहा अंकित कराना उचित होगा। इस बोर्ड पर तत्कालीन सूफी संत शेख राजू के स्थान पर शेख मूसा को सूफी संत कहा गया है। जो गलत है।

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