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-एक छत के नीचे थैलेसीमिया पीड़ितों की जांच, विकलांग सर्टिफिकेट भी बन गए

-बीएमसी में थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर व वार्ड का शुभारंभ।

सागर। नवदुनिया प्रतिनिधि

थैलेसीमिया पीड़ित 42 बच्चों की गुड़गांव से आए बोनमैरो विशेषज्ञ डॉ. गौरव खरया ने बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए स्क्रीनिंग कर 20 बच्चों को चिन्हित किया है। इन बच्चों की कुछ अन्य जांचें होने के बाद यह तक किया जाएगा कि किन-किन का बोनमैरो ट्रांसप्लांट किया जाना है। रविवार को बीएमसी में थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया गया था। इसमें संभाग भर से बच्चे आए थे। शिविर के दौरान पीड़ितों के विकलांग सर्टिफिकेट भी बनाए गए, ताकि व पेंशन के लिए आवेदन कर सकें।

रोटरी क्लब सागर फीनिक्स, थैलेसेमिक सोसायटी ऑफ इंडिया, बीएमसी प्रबंधन व स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से बीएमसी में शिविर का आयोजन किया था। इसमें डॉ. गौरव खरया ने थैलेसीमिया पी़िड़तों के लिए बोनमैरो ट्रांसप्लांट से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि एक बार बोनमैरो ट्रांसप्लांट हो जाए तो फिर बार-बार ब्लड चढ़ाने की स्थिति से बचा जा सकता है। हालांकि इसके लिए पहले जांचें कराकर यह तय किया जाएगा कि किस बच्चे का बोनमैरो ट्रांसप्लांट हो सकता है या नहीं। शिविर में सागर जिले से 34 व 8 बच्चे छतरपुर, टीकमगढ़ व दमोह जिले से आए थे। बच्चों को शिविर के दौरान ही डॉक्टरों द्वारा लिखी गई थैलेसीमिया की दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं।

पेंशन के लिए पात्र विकलांग सर्टिफिकेट बनाए

रोटरी क्लब फीनिक्स के प्रयासों से शिविर के दौरान ही सामाजिक न्याय एवं कल्याण विभाग द्वारा कैंप में थैलेसीमिया पीड़ितों के विकलांग प्रमाण-पत्र बनाने के लिए बोर्ड बैठाया गया। विभिन्न विभागों के डॉक्टरों को इसमें शामिल किया गया था। सभी बच्चों को थैलेसीमिया कन्फर्म व जांच रिपोर्ट के आधार पर उनके विकलांग सर्टिफिकेट बनाए गए हैं। यह संभाग स्तरीय बोर्ड था। जिस कारण सागर के बाहर के सभी बच्चों के भी प्रमाण पत्र तैयार हो गए। अब इन बच्चों को शासन की योजना अनुसार 500 रुपए महीने की पेंशन की पात्रता मिल जाएगी।

थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर का शुभारंभ

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग ने पहल करते हुए रविवार से ही कॉलेज के प्रथम तल पर थैलेसीमिया पीड़ितों को भर्ती की सुविधा देने के लिए थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर का शुभारंभ किया गया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने डीन डॉ. जीएस पटेल, अधीक्षक डॉ. आरएस वर्मा, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष जैन, मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मनीष जैन, रोटरी क्लब फीनिक्स के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर मुकेश साहू व अन्य सदस्यों की मौजूदगी में डे-केयर सेंटर का शुभारंभ किया। यहां एक साथ 6 बच्चों को भर्ती कर इलाज देने की सुविधा दी गई है।

क्या है थैलेसीमिया बीमारी (बॉक्स)..

थैलेसिमिया आनुवांशिक बीमारी है, जो माता-पिता से बधाों में स्थानांतरित होती है। इस बीमारी में पीड़ित के शरीर में खून बनना बंद हो जाता है। खून की कमी वजह से मरीजों को बार-बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। लगातार ब्लड चढ़ाने से खून में आयरन की अधिकता होती चली जाती है, जिससे लीवर, हार्ट और भी कई अंग प्रभावित होने लगते हैं।

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फोटो- 1208 एसए- 20, 21 सागर। गुड़गांव से आए डॉ. गौरव खरया ने थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए जांच की है।

फोटो- 1208 एसए- 08 सागर। बीएमसी में थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर का शुभारंभ करते मंत्री गोपाल भार्गव।

फोटो- 1208 एसए- 22 सागर। थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर का नवनिर्मित वार्ड।