- सिद्घचक्र महामंडल विधान के तीसरे दिन इंद्र-इंद्राणी सभा का आयोजन

खुरई। नवदुनिया न्यूज

प्राचीन जैन मंदिर में नौ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान के द्वितीय दिवस पर मुनिश्री पवित्रसागर महाराज, मुनिश्री प्रयोगसागर महाराज ने इंद्र-इंद्राणी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अहो आत्मन्‌! अनंत-अनंतकाल व्यतीत हो चुका, लेकिन आज तक कोई भी द्रव्य किसी अन्य द्रव्य से जुड़ा न कभी जुड़ सकेगा। प्रत्येक द्रव्य की सीमा है, यह मात्र परिकल्पना है कि मैं इनसे जुड़ा हूं या यह मुझसे जुड़ा है, वास्तव में न कोई तुमसे जुड़ सकता है न तुम किसी को जोड़ सकते हो। यह भ्रम है अनादि का, कि मैं पर से जुड़ा हूं अन्य कई लोग मुझसे जुड़े हैं। निरख आत्मन्‌! निरख तेरी आत्मा के असंख्यात प्रदेशों में एक भी प्रदेश क्या जुड़ा या किसी की आत्मा के असंख्यात प्रदेशों में क्या तू कुछ भी जोड़ पाया? नहीं न। प्रत्येक द्रव्य अनादि से जैसा था, वैसा है, वैसा ही रहेगा। द्रव्य के स्वभाव में कोई परिवर्तन सम्भव ही नहीं है।

मुनिश्री ने कहा कि हे आत्मन्‌! जो मिथ्या भ्रम जोड़ा है, उसे छोड़ना है, वैसे भी किसी परद्रव्य को जोड़ने की क्षमता तो तीर्थंकर में भी नहीं तो फिर किसी और की बात ही क्या? यह जोड़ा हुआ मिथ्याभ्रम ही पल-पल स्वयं को दुखी करता है। अतः जोड़ना चाहते हो तो अपने ज्ञानोपयोग को अपने आपसे जोड़ो, जो बेजोड़ है। जो जुदा है ही नहीं लेकिन जुड़ा भी नहीं है, पर सम्मुख है उसे स्व-सम्मुख करो तब पाओगे कि बाहर में जोड़ने-तोड़ने योग्य कुछ है ही नहीं। उपयोग को स्व-सम्मुख करना ही बेजोड़ को जोड़ना है। पर जुड़ने के कारण स्वभाव की ओर मुड़ नहीं पा रहे हो।

मुनिश्री ने कहा कि जिस आत्म स्वभाव में जोड़ है ही नहीं अर्थात्‌ किसी भी परद्रव्य का सम्बन्ध होता ही नहीं तो वह बेजोड़ ही हुआ ना? अर्थात्‌ स्वभाव ही ऐसा है कि जोड़ना चाहे तो भी जोड़ नहीं सकता। अतः पर को जोड़ने की चाहत तोड़, पर द्रव्य के जोड़ की झूठी मान्यता से सिवा राग-द्वेष के और कुछ भी हाथ नहीं आएगा। पता चला कि वह मुझसे भी जुड़ा है और दूसरे से भी जुड़ा है तो जो जुड़ा है वह भी द्वेष के कारण और जिससे जुड़ा है वह भी द्वेष में कारण बन जाएगा सिर्फ मुझसे ही यह जुड़ा है ऐसी भ्रमात्मक मान्यता है तो उससे तीव्र राग होने से उसी के बारे में सोचकर उपयोग का दुरूपयोग कर देगा। अतः आत्मन्‌! ना किसी से जुड़ो ना किसी को जोड़ो, जोड़ तोड़ की मिथ्या मान्यता छोड़ो। जोड़ो तो अनन्य शाश्वत बेजोड़ स्वात्मा को ही निजात्मा से जोड़ो। प्रवचन सभा के पूर्व विधान के पुण्यार्जक खिरिया वाले परिवार ने मुनि संघ को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। दूरस्थ अंचल से आए श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण कर ज्ञानदीप का प्रज्जवलन किया। संगीतकार सौरभ जैन एवं उनकी समस्त मंडली ने माधुर्य संगीत दिया। अनादि म्यूजिकल गु्रप के सदस्यों ने भजनों की मनोरम प्रस्तुति दी। प्रवचन सभा का संचालन पार्श्वनाथ जैन युवा समिति के सुरेन्द्र जैन, मनीष बड़कुल, सहयोग संकलन अशोक शाकाहार ने किया।

आज चढ़ाए जाएंगे 32 अर्घ

प्रचार-प्रसार समिति के अशोक शाकाहार ने बताया कि दुर्गा महोत्सव पर आयोजित होने वाले सिद्धचक्र महामंडल विधान में शनिवार को सिद्ध भगवंतों को सैकड़ों इंद्र-इंद्राणियों ने 16 अर्घ समर्पित किए। 12 से 20 अक्टूबर तक चलने वाले नौ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान में आज रविवार को 32 अर्घ समर्पित किए जाएंगे।

1310 एसजीआर 141 खुरई। प्रवचन देते मुनिश्री।

1310 एसजीआर 142 खुरई। सिद्धचक्र महामंडल विधान में अर्घ चढ़ाते इंद्र-इंद्राणी।