फ्लैग- बेरोजगार इंजीनियरों की दशा देखकर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिलाने आगे आए इंजीनियर प्रकाश चौबे

हेडिंग- समाजसेवी इंजीनियर बने शिक्षक, डिग्रीधारी युवा इंजीनियरों को दे रहे निःशुल्क व्यावहारिक प्रशिक्षण

-सीताराम रसोई संस्था के बाद अब युवा इंजीनियरों को दे रहे प्रशिक्षण ताकि खुद का व्यवसाय भी खड़ा कर सकें।

चैतन्य सोनी, सागर। नवदुनिया

सागर में करोड़ों-अरबों के प्रोजेक्ट के बावजूद भी सागर के युवा इंजीनियर बेरोजगार घूम रहे हैं। इन्हें किसी भी प्रोजेक्ट में कंपनियां काम देने तैयार नहीं, कारण इनके पास इंजीनियरिंग की डिग्री तो है, लेकिन अनुभव नहीं हैं। सागर के युवा इंजीनियरों की दुर्दशा देखकर सीताराम रसोई के सचिव व कॉलोनाइजर इंजीनियर प्रकाश चौबे आगे हैं। वे अपने खर्चे पर ऐसे युवा इंजीनियरों को अपने प्रोजेक्ट में व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। बाकायदा सुबह 11 बजे से इनकी प्रैक्टिकल की क्लास लगती है। साइट विजिट कराई जाती है। कुल मिलाकर टेप पकड़ने से लेकर प्रोजेक्ट तैयार होने तक सबकुछ सिखा रहे हैं। सबसे खास बात यह सब निःशुल्क कर रहे हैं।

सीताराम रसोई संस्था के सचिव व कॉलोनाइजर्स-बिल्डर्स इंजीनियर प्रकाश चौबे समाजसेवा के क्षेत्र में एक ओर काम करने में चुपचाप जुटे हुए हैं। वे अपने कार्यालय में हफ्ते के तीन दिन करीब 40 युवा इंजीनियरों के लिए सिविल वर्क निःशुल्क क्लास लगा रहे हैं। डिग्रीधारी युवा इंजीनियरों में इसे लेकर खासा उत्साह भी हैं। इन्हें सनराइज टेक्नोक्रेट नाम भी मिला है। प्रकाश चौबे इनको तकनीकि और व्यावहारिक ज्ञान के साथ-साथ साइट विजिट भी करा रहे हैं। इसमें हाईवे, फोरलेन सड़क निर्माण, फैक्ट्री, कॉलोनियां, सरकारी छोटे-बड़े प्रोजेक्ट, मेडिकल कॉलेज में चल रहे निर्माण कार्य का भौतिक निरीक्षण कराकर काम की तकनीक और बारीकियां सिखा रहे हैं। इसमें एनएचएआई, ब्रिज व पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर भी मदद कर रहे हैं।

बेरोजगार इंजीनियरों को देखकर आया आइडिया

सरकारी और निजी कॉलेजों से धड़ाधड़ इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर निकल रहे युवा इंजीनियर नौकरी के लिए ठोकरे खाते घूम रहे हैं। इन्हें सरकारी संस्थान तो क्या प्रायवेट कंपनियों तक में नौकरी नसीब नहीं हो पा रही है। उल्टे सागर में 300 करोड़ के सीवर प्रोजेक्ट, 400 करोड़ के वाटर प्रोजेक्ट, 1680 करोड़ के स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट में गली-गली सर्वे करते दिखने वाले अधिकांश जूनियर इंजीनियर प्रदेश के अन्य महानगरों व प्रदेश के बाहर के नजर आते हैं। सागर के कॉलेजों से डिग्री करने वाले इंजीनियरों को व्यावहारिक व फील्ड का अनुभव न होने के कारण इनका सिलेक्शन नहीं हो पाता। इंजीनियरों की दुर्दशा देखकर प्रकाश चौबे को आइडिया आया और उन्होंने खुद आगे आकर ऐसे युवा इंजीनियारों को काम सिखाने का बीड़ा उठा लिया।

ट्रेनिंग की यह खासियत है

-तीन से चार महीने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी।

-एस्टीमेट, बिल बनाना, सुपरविजन सिखा रहे।

-हर बार डिफरेंट साइट पर विजिट कराते हैं।

-एनएचएआई, ब्रिज, पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर भी निःशुल्क ट्रेनिंग दे रहे।

-प्रशिक्षण के दौरान युवा इंजीनियर्स को सनराइज टेक्नोक्रेट्स नाम मिला है।

-टोटल स्टेशन सर्वे भी सिखाया जाएगा।

-मटेरियल टेस्टिंग की भी ट्रेनिंग की जा रही है।

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हमारे युवा कबिल बन सकें, अवसाद से बाहर निकलें

सागर के सरकारी और निजी कॉलेजों से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बावजूद युवाओं के पास व्यावहारिक अनुभव नहीं है। बाहर के लड़के हमारे यहां प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं, सागर के इंजीनियर बेरोजगार घूम रहे हैं। मानसिक अवसाद भी हो रहा है। ये काबिल बन सकें, काम के आदमी बन सकें, इसलिए इन्हें प्रशिक्षण देने का आइडिया आया। इस पर तत्काल काम प्रारंभ कर दिया है। पहला बैच चल रहा है। अभी सिविल वर्क का प्रशिक्षण दे रहे हैं। भविष्य में मैकेनिकल, आईटी, इलेक्ट्रिकल्स के बच्चों को भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिलाने की योजना बना रहे हैं। यह सब निःशुल्क ही रहेगा।

-प्रकाश चौबे, इंजीनियर एवं समाजसेवी, सागर

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फोटो- 1310 एसए- 29, 30 सागर। इंजीनियर प्रकाश चौबे युवा इंजीनियरों को साइट विजिट के दौरान बारीकियां समझाते हुए।