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हेडिंग - बोगस वोटिंग को रोकने निर्वाचन आयोग लाया टेंडर वोट व चैलेंज वोट का फंडा

- चैलेंज वोट में मतदाता होनी की चुनौती स्वीकार कर की जाएगी जांच, फिर डलवाया जाएगा वोट।

- आपके नाम का पहले ही डाल जाए कोई वोट, तो आप मतपत्र से डाल सकेंगे टेंडर वोट।

- जांच के बाद बोगस वोट स्वतः ही जाएंगे निरस्त, असली मतदाता का वोट होगा मान्य।

अतुल तिवारी, सागर। नवदुनिया प्रतिनिधि

चुनावों में होने वाली बोगस वोटिंग को रोकने के लिए निर्वाचन आयोग इस बार विधानसभा चुनावों में गजब के फंडे लेकर आया है। हालांकि मतदाताओं को इन नए नियमों के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं है। इस बार के विधानसभा चुनावों में असली मतदाता टेंडर वोट और चैलेंज वोट भी डाल सकेंगे और फर्जी मतदाताओं के बोगस वोट जांच के बाद स्वतः ही निरस्त हो जाएंगे। टेंडर व चैंलेज वोर्ट डालने के पहले पीठासीन अधिकारी पूरे मामले की अच्छी तरह जांच करेंगे। अगर जांच में मतदाता सही-सही जानकारी देता है और वही असली मतदाता है तब ही उसे टेंडर वोट व चैलेंज वोट डालने का अधिकार मिलेगा। चुनावों में अक्सर देखा गया है कि मतदान केन्द्र पर पहुंचने के बाद मतदाताओं को यह पता चलता है कि कोई अन्य व्यक्ति उस निर्वाचक के रूप में पहले ही वोट दे चुका है। ऐसे मतदाता को मतपत्र के द्वारा टेंडर वोट डालने का अधिकार रहेगा।

इसके साथ ही मतदान केन्द्रों पर कोई व्यक्ति आता है और वह अपने आपको वास्तविक मतदाता कहता है, लेकिन किसी अन्य मतदाता द्वारा उस मतदाता को चुनौती दी जाती है तो वह चैलेंज वोट के दायरे में आएगा। अभी तक ऐसी स्थिति में असली मतदाता से वोट नहीं डलवाया जाता था। उस बूथ से उसे वापस लौटा दिया जाता था, लेकिन अब टेंडर व चैंलेज वोट के माध्यम से असली मतदाता वोटिंग कर सकेंगे और जो बोगस वोट होगा उसे निरस्त किया जाएगा।

यह रहेगी प्रक्रिया

चैलेंज वोट - चैलेंज वोट की चुनौती को स्वीकार करने से पहले पीठासीन अधिकारी मतदाता से 2 रुपए शुल्क जमा करने के लिए कहेंगे। इसके बाद एक रसीद दी जाएगी और पीठासीन अधिकारी मतदाता द्वारा उठाई गई चुनौती की पूरी जांच करेंगे। मतदाता की अंगुली पर अमिट स्याही लगे होने पर चुनौती स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके साथ ही चुनौतीकार से उसके आरोपों के संबंध में साक्ष्‌य प्रस्तुत करने के लिए कहा जाएगा। चुनौती के संबंध में मतदाता प्रथम स्पष्ट साक्ष्‌य प्रस्तुत करने में विफल होता है, तो चुनौती को अस्वीकार कर दिया जाएगा।

टेंडर वोट - टेंडर वोट के दौरान पीठासीन अधिकारी संबंधित मतदाता की पहचान के बारे में ऐसे प्रश्न पूछेंगे जिन्हें वे उसकी पहचान के बारे में अवाश्यक समझते है। यदि पहचान सही पाई गई तो संबंधित मतदाता को मतपत्र के द्वारा टेंडर वोट डालने का अधिकार मिल जाएगा। इसके लिए पीठासीन अधिकारी को 20 मतपत्र अलग से उपलब्ध कराए जाएंगे।

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बोगस पाए जाने पर पुलिस के हवाले किया जाएगा

मतदान के दौरान यदि कोई मतदाता टेंडर व चैंलेज वोट के दौरान पीठासीन अधिकारी की जांच में गलत पाया जाता है और वह साक्ष्‌य प्रस्तुत नहीं कर पाया तो ऐसी स्थिति में बोगस मतदाता के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। पीठासीन अधिकारी फर्जी मतदाता को वोट नहीं करने देंगे और तुंरत उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर पुलिस के हवाले कर देंगे। निर्वाचन आयोग के यह नए प्रावधान बोगस वोटिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने और असली मतदाता को अपने अधिकारी का उपयोग करने के लिए किए हैं।

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फर्जी मतदाताओं की पहचान के लिए विशेष प्रावधान

टेंडर वोट और चैलेंज वोट के माध्यम से असली मतदाता अपना वोट डाल सकेंगे। अब बोगस वोट डलने पर उन्हें वापस नहीं लौटाया जाएगा, बल्कि बोगस वोट पर रोक लगाई जाएगी। उन्हें निरस्त किया जाएगा। बोगस मतदाताओं पर लगाम लगाने के लिए ही आयोग ने इस बार चुनाव में यह कड़े प्रावधान किए हैं। बूथ पर मौजूद पीठासीन अधिकारी ऐसे मामलों की तुंरत जांच कर उनका निराकरण करेंगे और जो फर्जी मतदाता जांच में पकड़े जाएंगे, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर उन्हें पुलिस के हवाले किया जाएगा।

- डॉ. वायपी सिंह, स्टेट लेविल मास्टर ट्रेनर

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फाइल फोटो 1310 एसए 18 - सागर। ईवीएम एवं वीवीपैट मशीन।

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