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छह माह बाद मासूम बेटे को देख मां ने सीने से लगाया

- बीना रेलवे स्टेशन से गायब हुआ था

- दूसरा नाबालिग घर जाना नहीं चाहता

सागर। नवदुनिया प्रतिनिधि

रजाखेड़ी स्थित बाल संजीवनी आश्रम में शनिवार दोपहर बीना की एक महिला अपने मूक बधिर बेटे को बार-बार दुलार कर रही थी। आखिर वह 6 माह बाद जो मां से मिला है। नाबालिग बोल नहीं पाता, लेकिन उसे सुनाई देता है। कागजी औपचारिकता पूरी करने के बाद आश्रम की संचालिका ने उसे मां को सौंप दिया।

बच्चों के सरंक्षण का काम करने वाली बाल कल्याण समिति ने दो नाबालिगों को शुक्रवार को पुलिस की मदद से इन्हें संजीवनी बाल आश्रम को सौंपा था। भोपाल रेलवे स्टेशन से पुलिस ने इन्हें पकड़कर एकलव्य आश्रम को सौंपा था। बीना के मूक बधिर मोहित तिवारी और प्यारेलाल दोनों की उम्र 12 से 14 साल है। मोहित भोपाल में रेलवे स्टेशन के पास होटल में काम करता था और प्यारेलाल ट्रेन में यात्रियों से भिक्षा मांगता था। इन्हें भोपाल पुलिस ने पकड़कर बाल कल्याण समिति को सौंप दिया था वहां से उन्हें एकलव्य बाल आश्रम भेज दिया था।

आश्रम की संचालिका श्रीमती प्रतिभा अरजरिया का कहना है। दोनों बच्चे बीना के थे, इसलिए उनके परिजनों की तलाश करने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। मोहित बीना के भीम वार्ड का रहने वाला है। उसकी मां वर्षा लोगों के घर खाना बनाने जाती है। पुलिस की मदद से उसका पता मिल गया। शनिवार को वर्षा को आश्रम बुलाया गया। वह दोपहर एक बजे आश्रम आई, अपने मूक बधिर बेटे को देख आंखों में आंसू छलक पड़े वह बार -बार बेटे को दुलार करती रही। कागजी कार्रवाई कर उसे बेटे को सौंप दिया। डायल-100 स्टाफ मां-बेटे को लेकर बीना रवाना हुआ।

आश्रम में रहेगा प्यारेलाल

दूसरे नाबालिग प्यारेलाल ने बताया कि वह मां के साथ नहीं रहेगा। वह मेरे पिता को छोड़कर मुस्लिम व्यक्ति के साथ रहने लगी है। दूसरा पिता शराब के नशे में आए दिन मेरी पिटाई करता था। इसलिए मैं ट्रेनों में भीख मांगकर भरण पोषण कर भोपाल के रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 6 पर रात रूकता था। उसने आश्रम में रहने की इच्छा जताई। आश्रम की संचालिका का कहना है जिला प्रशासन से मंजूरी लेने के बाद उसे 18 साल की उम्र तक आश्रम में रखा जाएगा। उसे पढ़ाई के लिए प्रेरित करेंगे।

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फोटो नंबर 13010 एसए 31 सागर। संजीवनी बाल आश्रम में मूक बधिर बेटे के साथ उसकी मां।