हेडिंग -

- डॉ. हरीसिंह गौर केन्द्रीय विवि के मनोविज्ञान विभाग में संगोष्ठी का आयोजन।

- मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्‌य में आयोजित हुआ तीन दिवसीय कार्यक्रम।

- आत्महत्या रोकथाम विषय पर दिल्ली एम्स के क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट ने रखे विचार।

सागर। नवदुनिया प्रतिनिधि

डॉ. हरीसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के सायकोलॉजी विभाग में मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर तीन दिवसीय विभिन्ना कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। शनिवार को तीन दिवसीय कार्यक्रमों का समापन आत्महत्या रोकथाम विषय पर व्याख्यान के साथ हुआ। जिसमें दिल्ली एम्स के क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट मसूद मकबूल ने मुख्य वक्ता के रूप में व्याख्यान देते हुए कहा कि आत्महत्या के लिए छह प्रकार के कारक जिम्मेदार होते हैं। इनमें निराशा सबसे अहम है। इसके साथ ही अवसाद, द्विध्रवीय विकार, मानसिक विकार, तनाव और पारस्परिक संबंधों में परेशानियां आत्महत्या की वजह बनती है। आत्महत्या के जोखिम को प्रभावित करने वाले कारकों में मानसिक आर्थिक सामाजिक कारक भी भूमिका निभाते हैं।

सायकोलॉजिस्ट मकबूल ने कहा कि आत्यहत्या की रोकथाम उपायों के माध्यम से इस तरह की घटनाओं को कम करने के लिये सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। मानसिक स्वास्थ्य को सकारात्मक ढंग से समझने और उसका उपचार संबंधी पहुलओं पर नीतियां बनाना व उनको क्रियान्वति करना आवश्यक है। प्रो. उदय चंद जैन ने कहा कि समाज स्तर पर समय के साथ होने वाले प्रत्येक परिवर्तन का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। नरेश चंद जैन ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों का अभिक्षमता परीक्षण होना चाहिए। ताकि बाद में लोग परेशान न हो। प्रो. सुबोध जैन ने कहा कि तनाव एक जैविक प्रक्रिया है। जिससे इस शरीर पर प्रभाव पड़ता है।

तीन दिन में हुए कई आयोजन

कार्यक्रमों की शुरूआत के प्रथम दिन मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता रैली निकाली गई, जो विवि के विभिन्ना मार्गों से होते हुए इंग्लिश डिपार्टमेंट में समाप्त हुई। इसके बाद 'आधुनिक शिक्षा मानसिक स्वास्थ्य की पोषक है' विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई। जिसमें 34 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। निर्णायक के रूप में प्रो. चंदा बेन, प्रो. उदय जैन और प्रो. जगदीश खोबरागड़े मौजूद थे। विभागाध्यक्ष प्रो. पीके रॉय ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जीवन की वास्तविक ऊर्जा मानसिक स्वास्थ्य के संतुलन से मिलती है। यह बात याद रखना चाहिए कि तनाव किसी भी समस्या का हल नहीं होता बल्कि कई समस्याओं का जन्मदाता होता है।

समापन सत्र में अतिथि के रूप में प्रो. रेखा बख्शी और डॉ. संतोष कुमार गुप्ता शामिल हुए। उन्होंने वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। संचालन देवकी नन्दन शर्मा ने किया। आभार समन्वयक डॉ. संजय कुमार ने माना। कार्यक्रम में विवि स्टॉफ सहित डिपार्टमेंट के कई विद्यार्थी मौजूद थे।

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फोटो 1310 एसए 48 - सागर। आत्महत्या रोकथाम विषय पर व्याख्यान के दौरान संबोधित करते वक्ता।

फोटो 1310 एसए 49 - सागर। कार्यक्रम में मौजूद विषय विशेषज्ञ, शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं।

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