भोपाल। डिजिटल इंडिया के तहत स्कूलों में बच्चों को डिजिटल ब्लैकबोर्ड पर पढ़ाने के सपने दिखाए जा रहे हैं। लेकिन राजधानी के एक सरकारी माध्यमिक शाला में बच्चों को साधारण ब्लैकबोर्ड तक नसीब नहीं है। हम बात कर रहे हैं 7 नंबर स्टॉप स्थित शासकीय संजय गांधी माध्यमिक विद्यालय की।

ये वही स्कूल है जहां कभी खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छठवीं और सातवीं कक्षा में पढ़ाई की है। स्कूल में शिक्षा की मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। इस स्कूल में 8वीं कक्षा तक 250 बच्चे पढ़ते हैं। ब्लैक बोर्ड न होने पर शिक्षक लोहे के गेट पर लिखकर बच्चों को ककहरा और एबीसीडी सिखा रहे हैं। कुछ शिक्षिकाएं घर से पेपरशीट का बोर्ड बनाकर उससे पढ़ा रही हैं।

प्रायमरी की बिल्डिंग अधूरी -

स्कूल की प्रायमरी की बिल्डिंग का काम पांच साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। इस स्कूल में बच्चों को खेलने के लिए मैदान तक नहीं है। वहीं मैदान में जिला निर्वाचन कार्यालय अपनी बिल्डिंग बना रहा है।

6 माह से मोटर खराब, पानी नहीं -

स्कूल में स्वच्छता अभियान फेल साबित हो रहा है। 6 माह से मोटर खराब होने से पानी तक की व्यवस्था नहीं है। शौचालयों और मैदान में गंदगी का अंबार लगा है। इसके चलते बच्चे बाहर जाने के लिए मजबूर है।


सीएम बनने के बाद नहीं गए -

शिवराजसिंह चौहान मुख्यमंत्री बनने के बाद एक बार भी अपने बचपन के स्कूल नहीं गए और न ही वहां के हालात देखे, जबकि इस स्कूल को मुख्यमंत्री के स्कूल के नाम से जाना जाता है।

बाद में देंगे फर्नीचर -


अभी मिडिल स्कूलों में फर्नीचर देने का कार्य किया जा रहा है। इसके बाद प्रायमरी स्कूलों में दिया जाएगा। बिल्डिंग अधूरी है इस बारे में देखना पड़ेगा। -दीपक जोशी, राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा