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    नपा उपाध्यक्ष व पार्षदों ने सीवेज कंपनी को दिया 8 दिन का अल्टीमेटम

    Published: Thu, 15 Mar 2018 04:07 AM (IST) | Updated: Thu, 15 Mar 2018 04:07 AM (IST)
    By: Editorial Team

    -मेन मार्केट में छोड़े गए टुकड़े व गांधी रोड नहीं बनने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

    फोटो 131 सीहोर। सीवेज कंपनी के कर्मचारियों के साथ सड़कों का निरीक्षण करते नपाउपाध्यक्ष व पार्षद।

    सीहोर । नवदुनिया न्यूज

    शहर के मेन मार्केट व सबसे व्यस्ततम गांधी रोड के निर्माण की मांग को लेकर नपा उपाध्यक्ष के साथ पार्षदगण मैदान में उतर आए। इस दौरान वह सीवेज लाइन के कारण खस्ताहाल हुए मेन बाजार व गांधी रोड की व्यपारियों द्वारा लगातार शिकायतों के बाद सीवेज कंपनी के कर्मचारियों को लेकर उपाध्यक्ष राखी ताम्रकार व आधा दर्जन से अधिक पार्षद व्यापारियों के बीच पहुंचे। जहां स्थिति का जायजा लिया व सीवेज कंपनी के कर्मचारी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि 8 दिनों के अंदर इस रोड का निर्माण कार्य चालू किया जाए। जगह-जगह छोड़े गए टुकड़ों को पूरा किया जाए। इसके बाद जिन वाडोर् में काम नहीं हुआ पहले उनमें काम करें। अन्यथा हम सब पार्षद शहर की जनता को लेकर उग्र आंदोलन करेंगे।

    लगातार व्यापारियों की मिल रही शिकायत व लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए नगर पालिका उपाध्यक्ष राखी सुशिल ताम्रकार के साथ पार्षद बबिता वीरू सलूजा, सफीक बाबा, रमेश राठौर, विवेक राठौर, विजेंद्र परमार, इरशाद पहलवान, गोपाल बिसोरिया, आरिफ पहलवान, शोदरा पुत्र मुकेश मेवाड़ा, आकाश रोहित, संतोष शाक्य, रामप्रकाश चौधरी सहित व्यापारी संघ के अध्यक्ष किशन सोनी, गोविंद ताम्रकार, गुड्डू भाई व व्यापारी ने सीवेज कंपनी के कर्मचारियों को मौके पर ले जाकर कोतवाली चौराहे, पान चौराहे, मनकामेश्वर मंदिर के पास छोड़े गए टुकड़ों और मुख्य बाजार स्थित गांधी रोड को दिखाते हुए व्यापारियों व आमजन को हो रही समस्याओं से अवगत कराया। इस दौरान नपा उपाध्यक्ष ने कहा आठ दिन के अंदर इन छोड़े गए सड़क के टुकड़ों और गांधी रोड का निर्माण करे। इसके बाद जिन वार्डों में सीवेज के लिए सड़क खोदी गई है, उनका निर्माण करे। यदि जल्द ही काम नहीं किया गया तो नपा पार्षदों व व्यापारियों के साथ उग्र आंदोलन किया जाएगा।

    व्यापारियों में जमकर रोष

    व्यापारियों का कहना है कि शहर में लंबे समय से सीवेज लाईन का काम चल रहा है, लेकिन काम करने वाली एजेंसी अपनी मनमर्जी से शहर में पाईप लाईन बिछाने का काम कर रही है, जिस कारण यह सब स्थिति बनी। शहर के मुख्य मार्ग जहां सर्वाधिक व्यापारिक दुकानें और लोगों का आवागमन रहता है, वहां सबसे परेशान करने वाली स्थिति है। यहां दुकानदारों का दुकान पर बैठना मुश्किल है, वहीं उसका सामान भी धूल के कारण खराब हो रहा है। कपड़ा, किराना, जनरल स्टोर, होटल व्यवसायी धूल के कारण बेहद ही परेशान हैं। दिनभर सफाई करने के बाद भी धूल हटने का नाम नहीं लेती। शहर के मुख्य व्यवसायिक स्थलों में कोतवाली चौराहा से सीहोर टाकीज चौराहा, गांधी रोड, मछली मार्केट, हास्पिटल चौराहा, नमक चौराहे से जगदीश मंदिर चौराहा प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं। इन्हीं क्षेत्रो में सबसे ज्यादा यह समस्या सामने आ रही है।

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    प्राथमिक शालाओं के पाठ्यक्रम में शामिल होंगी रोचक, ज्ञानवर्धक कहानियां

    सीहोर। प्रदेश की सरकारी प्राथमिक शालाओं में शिक्षण कार्य को और अधिक प्रभावी, रोचक तथा ज्ञानवर्धक बनाने के लिए अगले शिक्षण सत्र से कहानियों का उपयोग किया जाएगा। राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा प्रदेश के सभी 51 जिलों में जिला परियोजना समन्वयकों के माध्यम से स्थानीय भाषा का समावेश करते हुए कहानियों के संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। संग्रहित कहानियों का उपयोग बधाों को पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम में किया जाएगा। इस संबंध में राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक लोकेश जाटव ने जिला समंवयकों को पत्र लिखकर संकलित कहानियां 15 मार्च तक अनिवार्य रूप से राज्य कार्यालय में भेजने के निर्देश दिए हैं।

    राज्य शिक्षा केन्द्र ने जिला समंवयकों से कहा है कि कक्षा में शिक्षण कार्य को रोचक बनाने और मातृभाषा का अधिक उपयोग करने के लिए प्रत्येक जिले में विशेष प्रयास किए जाएं। जिले में स्थानीय भाषा व बोली की कहानियों के संग्रहण पर विशेष ध्यान दिया जाए। कहानी संग्रहण में डाइट का भी सहयोग लिया जाए। बताया गया है कि चयनित कहानियों का शिक्षण कार्य में ऑडियो-वीडियो तकनीक से उपयोग किया जाएगा। संग्रहित बाल कहानियों को बधो अच्छी तरह से समझ सकें, इसके लिए जिले में बोली जाने वाली स्थानीय भाषा उर्दू, बुंदेली, सहरिया, भीली, कोरकू, मालवी, निमाढ़ी, गौड़ी, बैगा और बघेली का भी उपयोग किया जाएगा। देश भर में राष्ट्रीय पाठ्यचार्य में अनुशंसा की गई है कि प्राथमिक स्तर की कक्षाओं में बधाों का सीखना-सिखाना रोचक हो। जहां तक सम्भव हो, बधो की मातृभाषा का उपयोग किया जाए। प्रदेश में कहानी संकलन का कार्य स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पढ़े भारत-बढ़े भारत कार्यक्रम के अंतर्गत किया जा रहा है।

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