आष्टा। लोकसभा चुनाव में प्रचार-प्रसार के लिए राजनीतिक दल, उम्मीदवार को संपत्ति स्वामी की लिखित अनुमति लेना होगी। बिना अनुमति व सार्वजनिक दृष्टि से आने वाली कि सी भी संपत्ति को स्याही, खड़िया, रंग या अन्य पदार्थ से लिखकर या चिन्हित करके विरुपित करता है तो एक हजार रुपए का जुर्माना वसूला जाएगा।

अनुविभागीय अधिकारी राजेश शुक्ला ने बताया कि लोकसभा चुनाव में मप्र संपत्ति विरुपण अधिनियम की धारा 5 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश जारी कि या है। आदेश के तहत कि सी भी सरकारी परिसर, भवन, दीवार, पानी की टंकी आदि पर लिखावट, पोस्टर चिपकाना, कटआउट, बैनर, होर्डिंग लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को निजी भवनों पर भी भवन स्वामी की लिखित सहमति व नगर पालिका की अनापत्ति लेना जरूरी है। उसके बाद ही भवन स्वामी की दीवार पर झंडे, पोस्टर, बैनर, वाल राइटिंग व अस्थाई फ्लेक्स बोर्ड, लगा सकते हैं। इसके लिए प्रत्याशी को तीन दिन के अंदर एनओसी जारी करने ली गई राशि की रसीद, भवन स्वामी की कि राया रसीद, बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स बोर्ड, लिखावट पर खर्च की रसीद व संलग्न प्रोफार्मा रिटर्निंग ऑफिसर को भवनवार प्रस्तुत करना होगा। उक्त झंडे, बैनर, पोस्टर, फ्लैक्स बोर्ड पर ऐसा कु छ भी नहीं लिखा जा सके गा, जिससे कि सी भी समुदाय में असंतोष पैदा होकर लोक न्यूसेंस की संभावना बने। पंचायत सचिव, थाना प्रभारी व पटवारी की जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पत्ति निवारण की जिम्मेदारी पंचायत सचिव, पटवारी और थाना प्रभारी की है। संबंधित दल द्वारा मूल स्वरुप में लाई गई सरकारी व निजी सम्पत्ति का विवरण हर दिन रिटर्निंग अधिकारी को देना होगा। यही जानकारी चुनाव आयोग के प्रेक्षकों को दी जाएगी।

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एक अप्रैल से लागू होगा ई-पैन कार्ड, घर खरीदना होगा आसान

आष्टा। वित्त वर्ष 2018-19 समाप्त होने में सिर्फ 14 दिन बचे हैं। नए वित्तीय वर्ष 2019-20 यानी एक अप्रैल से आपकी लाइफ में बहुत से सकारात्मक बदलाव होने वाला है। बहुत से बदलाव फायदेमंद होंगे। सबसे ज्यादा फायदा तो ई-पैन कार्ड, जीएसटी का सरलीकरण का हमें मिलेगा। इसी प्रकार लोगों का घर खरीदना सस्ता हो जाएगा। वहीं पांच लाख तक आय वालों को कोई टैक्स नहीं देना होगा, लेकि न पांच लाख से अधिक होने पर टैक्स देय होगा। एक अप्रैल से घर खरीदने के इच्छुक लोगों को सस्ते मकान मिलने वाले हैं। जीएसटी की दरों में गिरावट के चलते अब 20 लाख तक के अफोर्डेबल मकानों पर के वल एक फीसद जीएसटी यानी 20 हजार रुपए टैक्स लगेगा। उक्त जानकारी कर सलाहकार अभिषेक सुराना एडवोके ट ने देते हुए बताया कि 50 लाख तक के मकान पर पांच फीसदी जीएसटी लगेगी, यानी ढाई लाख रुपए टैक्स। इस प्रकार 50 लाख के मकान पर सीधे-सीधे 3.5 लाख का फायदा होगा और 20 लाख के मकान पर 1.4 लाख रुपए बचेंगे।

सुविधा के लिए शुरूᆬ हो जाएगा ई-पैन कार्ड बनना

एक अप्रैल से उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ई-पैन कार्ड बनना शुरु हो जाएगा। तब आपको पैनकार्ड के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। ऑनलाइन साइट में जाकर आप कु छ मिनट में ई-पैनकार्ड ले सकें गे। पैनकार्ड बनाने के लिए भले ही आपका आधार कार्ड अनिवार्य है, लेकि न आपके एड्रेस प्रूफ के वेरीफिके शन के लिए एजेंसी नियुक्त की जा रही है।

जीएसटी का होगा सरलीकरण

जीएसटी में आ रही कठिनाइयों को देखते हुए व्यापारी बहुत दिनों से मांग कर रहे थे कि जीएसटी का सरलीकरण कि या जाए। एक अप्रैल से जीएसटी के सरलीकरण के तहत नया फार्म जारी होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि इससे बड़ी राहत मिलेगी। इस संबंध में कार्रवाई शुरूᆬ कर दी गई है और निर्देश जारी कि ए गए हैं।

बिल्डरों पर होगी सख्ती

श्री सुराणा ने बताया कि रेरा में पंजीयन नहीं कराने वाले बिल्डरों पर 1 अप्रैल से सख्ती होने वाली है। ऐसे बिल्डरों को चार गुना पेनाल्टी के साथ पंजीयन कराने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया गया है। डीटीएच कंपनियों तथा के बल उपभोक्ताओं को एक अप्रैल से अपने मनपसंद चैनल का चुनाव करना ही होगा। ट्राई ने उपभोक्ताओं को थोड़ी सुविधा देते हुए मनपसंद चैनल का चुनाव करने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया है।

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बिजली उपभोक्ताओं को राहत, नहीं बढ़ पाएंगी बिजली की दरें

आष्टा। बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अगले कु छ महीनों तक बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी नहीं होगी। क्योंकि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग चुकी है और बिजली नियामक आयोग ने दरों पर सुनवाई के लिए कोई शेड्यूल ही जारी नहीं कि या है। दावे-आपत्ति भी नहीं बुलाए हैं। हर साल मार्च के अंत में नियामक आयोग बिजली दरों को घटाने-बढ़ाने के लिए सुनवाई करता है। हालांकि इस वर्ष बिजली वितरण कंपनी ने अपनी तरफ से कि सी तरह की दर वृद्धि का प्रस्ताव बनाकर पॉवर मैनेजमेंट कंपनी को नहीं भेजा था।

नगर के सुरेन्द्र परमार एडवोके ट ने बताया कि मैनेजमेंट कंपनी तीनों वितरण कंपनी के प्रस्ताव मिलने के बाद नियामक आयोग के समक्ष याचिका दायर करती है। इसके बाद नियामक आयोग कंपनी के कार्य क्षेत्र के हिसाब से दावे-आपत्ति आमंत्रित करती है। दावे-आपत्ति और सुझाव मिलने के बाद व्यक्तिगत रुप से सुनवाई का अवसर भी देती है। फरवरी में दावे-आपत्ति बुलाए जाते हैं, लेकि न इस बार ऐसा नहीं हुआ। जब-जब विधानसभा और लोकसभा चुनाव का वक्त आता है, बिजली की दरों पर बात नहीं होती। 2013-14 में भी ऐसा ही हुआ था। 2013 में विस चुनाव में दाम यथावत थे और 2014 में लोकसभा चुनाव हुए तब भी दाम पर विचार नहीं हुआ। आचार संहिता के कारण बिजली नियामक आयोग ने शेड्यूल जारी नहीं कि या है।