शाहगंज। मप्र में सालों पुरानी शराब बंदी की मांग को दरकिनार कर सरकार ने शराब के अहातों को बंद कराने का फैसला लिया है। महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनजर सरकार यह कदम उठा रही है। जबकि शराब पर बैन लगाने की लंबे समय से मांग उठ रही है। प्रदेशभर में इसको लेकर आंदोलन भी हुए, लेकिन सरकार ने शराबबंदी को लेकर साफ संकेत पहले ही दे दिए हैं, सिर्फ अहातों को बंद करने का फैसला कर एक बार फिर सरकार घिर गई है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर सवाल उठाये हैं। मप्र युवा कांग्रेस प्रवक्ता अमन दुबे ने निशाना साधा है। अमन दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री ने दिल से रेडियो में केवल शराब अहाते बंद करने की घोषणा की। जबकि प्रदेशवासियों की दिल से तमन्नाा है कि प्रदेश में पूर्णतः शराबबंदी हो, पूर्व में जो शराबबंदी के पक्ष में थे वो शिवराज , अब पता नहीं किस दबाव में पूर्ण शराबबंदी की घोषणा से पीछे हट रहे है। मुख्यमंत्री जी की घोषणा के बाबजूद उनके गृहक्षेत्र में नर्मदा नदी की 7 किमी रेंज में शराब पूरी तरह बंद है। लेकिन यहां खुले में आम शराब की बिक्री की जा रही है। दुबे ने कहा मुख्यमंत्री जी को मप्र में पूर्ण शराबबंदी की शीघ्र घोषणा करनी चाहिए।

सालों से उठ रही शराबबंदी की मांग

बिहार में शराबबंदी के फैसले के बाद से ही प्रदेश में शराबबंदी की मांग तेज हुई है और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शराबबंदी के पक्षधर रहे हैं और सार्वजानिक मंचों से शराब से दूर रहने की अपील कर चुके हैं। लेकिन राजस्व घाटे के कारण सरकार इस फैसले को लेने से बचती रही हैं। जबकि विपक्ष लगातार शराबबंदी के फैसले के लिए कदम उठाने सरकार पर दबाव बनाती रही है। साथ ही अनेकों सामाजिक संगठन भी शराब के खिलाफ मोर्चा निकाल चुके हैं।

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क्रांतिकारी बिरसा मुंडा का किया स्मरण

फोटो 151 सीहोर । बिरसा मुंडा का जन्मदिन मनाते हुए ।

सीहोर। बुधवार को फ्रिडम फायटर बिरसा मुंडा का जन्म दिन धुमधाम से मनाया गया। बिरसा मुंडा ने देश में अंग्रेजों के खिलाफ पहली देश की आजादी कि लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने सामंतियों, जमिदारों के खिलाफ लड़ाई लडी उनको झारखंड का भगवान भी कहा जाता है। 9 जून 1900 को राचि की जेल में अंग्रेजों के प्रताड़ना के कारण उनकी मृत्यु हो गई। वे किसान, मजदूर, गरीबों, पिछड़ों, दलितों व आदिवासीयों की लड़ाई लड़ते रहते थे, उन्हे जन नायक कहा जा सकता है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से माखन सिंह सोलंकी, रमेश बारेला, हरिकुंवर बारेला, राकेश बारेला, कमल बारेला, आकास बारेला, राजेश वार्डे, अमन इवने, सुरज बारेला, मनीष उईके, दीपक बारेला, जितेन्द्र वर्डे, सुरेंद्र सिंह बारेला, संतोष बारेला, पालसिंह बारेला, विकास मोरे, लखन बारेला, अरूण कुमरे, ओम शर्मा, कैलाश भुरीया, प्रदीप सोलंकी, दिनेश सेमलिया, गजेंद्र बारेला, रामेश्वर जगरे आदि लोग सामिल थे।

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बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ छेड़ी थी क्रांतिः नर्रे

फोटो 152 सीहोर । जयंती पर बिरसा मुंडा की फोटो पर माल्यार्पण कर करते हुए ।

सीहोर। स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज के युवा योद्घा बिरसा मुंडा की 142 वीं जयंती के अवसर पर कार्यक्रम किया गया। इस मौके पर आदिवासी छात्र सगंठन के प्रदेश सचिव कुंवर सुमित नर्रे ने कहा कि बिरसा मुंडा झारखंड के ऐसे आदिवासी मसीहा थे। जिन्होंने मात्र 20 वर्ष की आयु में ही विद्रोह शुरू कर दिया था। उन्होंने अग्रेंजों के खिलाफ लोहा लिया था श्री नर्रे ने कहा की हमें ऐसे महान पुरूषों के विचारों को अपने जीवन पर उतार लेना चाहिए। कार्यक्रम का शुम्भांरम्भ बिरसा मुंडा के चित्र पर अतिथियों ने मालार्पण कर पुष्प अर्पित किए। इस के उपरांत मुख्य अथिति प्रदेश सचिव श्री नर्रे ने कहा की बिरसा मुंडा बचपन से ही संघर्षशील थे। विशेष अतिथि के रूप में उपाध्यक्ष रमेश बरेला ने बताया की उन्होंने समाज और देश की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। इस अवसर पर उपस्थित सुनील पर्ते, सुमित कुमरे, रवि सोलंकी , मनीष जमाले, रिकेश करोची, मोनित कंकोड़िया, पवन धुर्वे, दुर्गेश धुर्वे व शुभम ककोड़िया आदि मौजूद रहे।