भोपाल। मैंने एवरेस्ट फतह नहीं की है। मैं 26575 फीट ऊंचाई पर एवरेस्ट मिशन के कैम्प 4 से वापस आ गई थी। चढ़ाई के दौरान मेरा टि्वटर अकाउंट किसी ने हैक कर लिया था। इसके बाद एवरेस्ट के शिखर 29028 फीट की ऊंचाई पर मेरे पहुंचने का मेरे अकाउंट से गलत पोस्ट कर दिया था। जिसके वायरल होते ही मेरे द्वारा एवरेस्ट फतह की खबरें चल पड़ी थीं। यह कहना है मप्र के सीहोर जिले की पर्वतारोही मेघा परमार का।

गौरतलब है कि 25 मई को मेघा परमार द्वारा एवरेस्ट फतह करने की जानकारी आई थी। इसके साथ ही उनका एवरेस्ट पर तिरंगे के साथ फोटो भी अखबारों में प्रकाशित हुआ था। उनकी इस उपलब्धि की पुष्टि मप्र शासन के कुछ अधिकारियों द्वारा भी उस दौरान की गई थी और बधाइयों का सिलसिला चल पड़ा था। इसके बाद मप्र की एक अन्य पर्वतारोही भावना डेहरिया ने मेघा की इस उपलब्धि को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मेघा ने फेसबुक पर 26575 फीट तक ही चढ़ाई करने की बात कही है।

मेघा ने खुद फेसबुक पर दी सफाई

एवरेस्ट फतह की खबरों पर सवाल उठता देख जब नवदुनिया ने 24 वर्षीय मेघा से सीहोर के भोजनगर गांव स्थित उनके घर पर संपर्क किया, तो सच साझा किया। उन्होंने बताया कि मिशन से वापस आने पर उन्हें अखबारों में एवरेस्ट फतह करने की खबरों की जानकारी मिली। इसके बाद 21 जून को अपने फेसबुक पेज पर मैंने स्पष्ट किया कि 26,575 फीट तक की एवरेस्ट की चढ़ाई की है। उन्होंने बताया वापस आने के बाद भी कई दिनों तक चले इलाज के बाद मैं स्वस्थ हुई। मिशन के लिए मैं फिर से तैयारी कर रही हूं।

साइबर सेल में की है शिकायत

मेघा ने बताया कि मिशन के दौरान उनका टि्वटर अकाउंट हैक कर लिया गया था। इस बाद ही उनके अकाउंट से गलत जानकारी पोस्ट की गई। जिससे भ्रम की स्थिति निर्मित हुई। अकाउंट हैक होने की शिकायत उन्होंने साइबर सेल भोपाल में शिकायत भी की है।

नेपाल सरकार देती है प्रमाण पत्र

माउंट एवरेस्ट की शीर्ष चोटी की ऊंचाई 29028 फीट है। इस शिखर तक पहुंचने वाले पर्वतारोही को नेपाल सरकार एवरेस्ट मिशन फतह का प्रमाण पत्र देती है। इस प्रमाण पत्र से पर्वतारोही की सफलता की वास्तव में पुष्टि होती है।

सच सामने आना चाहिए

एक पर्वतारोही के लिए एवरेस्ट फतह करना जीवन के सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। यदि मेघा ने एवरेस्ट की 29028 फीट तक चढ़ाई की है तो वो निश्चित ही बधाई की हकदार है, लेकिन जैसा मेघा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि वो 26575 फीट यानी एवरेस्ट के कैम्प चार से ही वापस आ गई है तो यह सच सभी के सामने आना चाहिए। ताकि भ्रम की स्थिति साफ हो सके।

भावना डेहरिया, पर्वतारोही मप्र

तबियत खराब होने के कारण नहीं कर सकी मिशन पूरा

मेघा कुशलता से एवरेस्ट फतह करने की तरफ बढ़ रही थी। 26575 फीट की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद ऑक्सीजन की कमी से उसकी तबियत खराब होने लगी। उसका निश्चय दृढ़ था, लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था, इसलिए उसे वहीं पर अपना मिशन अधूरा छोड़ना पड़ा। अगली बार फिर वह ज्यादा तैयारी से जाएगी और एवरेस्ट फतह करने का सपना साकार करेगी।

रत्नेश पांडेय, मेघा के गाइड