अनूपपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि।

जिले में लगभग ढाई लाख मवेशी हैें जिनकी अब अपनी खुद की पहचान होगी। इसके लिए पशुपालन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इंसानो का आधार कार्ड बनने के बाद अब दुधारू पशुओं गाय व भैंस की यूनिक आईडी होगी। पहले चरण में 34 हजार टैग अनूपपुर पहुंच गए हैं जिनका वितरण जिले के चारो विकासखंड के 49 औषधालय व कृत्रिम गर्भाधान केंद्र के पशु चिकित्सकों को कर दिया गया है।

जिले में पशुओं के कानों में टैग लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है जिस पर उसका यूनिक आईडी नंबर लिखा होगा। खास बात ये है कि यह सुविधा पूरी तरह से निःशुल्क रखी गई है।

इसलिए हो रही पहल-

पशु उत्पाद भारत की जीडीपी में मुख्य भूमिका निभाते हैं, डेयरी प्रोडक्स बनाने में दुनिया में भारत का दूसरा स्थान है, ऐसे में विकास की बात पर गाय और भैंसों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। भारत के दूध उत्पादन और डेयरी प्रोडक्शन को बेहतर तथा मुनाफेदार बनाने के लिए सरकार ने यह एक बड़ा कदम उठाया है।

जिले की आबादी का करीब 80 फीसदी वर्ग कृषि से जुड़ा है। किसानों की आमदनी का जरिया फसल सब्जी व पशुपालन है। जिले में देसी से लेकर विदेशी नस्लों तक के पालतू मवेशियों का पालन किया जा रहा है, लेकिन कौन-सा पालक किस नस्ल के मवेशी का पालन कर रहा है, इसकी जानकारी का अभाव होने से योजना बनाने में परेशानी आती है।

अब पालतू मवेशियों का पूरा डाटा एकत्रित किया जा रहा है। जिस तरह लाोगों के आई कार्ड व आधार कार्ड होते हैं, उसी तरह अब मवेशियों की यूनिक आईडी रहेगी, जिससे उनकी पहचान हो सकेगी। जिले में योजनांतर्गत गाय व भैंस के यूनिक आईडी तैयार किए जा रहे हैं।

ऐसी होगी पशुओं की यूनिक आईडी-

इंसानों के आधार कार्ड के तर्ज पर दुधारू गाय-भैंसों की अपनी यूनिक आईडी होगी। फर्क सिर्फ इतना है कि आधार कार्ड में इंसानों के फिंगर प्रिंट के साथ-साथ हितग्राही की पूरी जानकारी होती है। मगर गाय-भैंसों की यूनिक आईडी में जन्मतिथि से लेकर उसका जैंडर, गर्भाधान का स्टेटस, नस्ल, दूध की मात्रा, बच्चों की संख्या आदि जानकारी समाहित रहेगी। 12 अंको की यूनिक आईडी का टैग प्लास्टिक मटेरियल से बना हुआ है। जिसका वजन करीब 8 ग्राम का है। इनका आकार और मटेरियल ऐसा है कि जानवरों को ज्यादा तकलीफ न हो। कान पर टैग लगाने के लिए एक मशीन भी दी गई है।

विभाग के कर्मचारियों द्वारा गाय व भैंस की नस्ल, उम्र, रंग, बछड़े, मालिक का नाम आदि तरह की बातें पूछकर इंट्री की जा रही है। प्रक्रिया के बाद पीले रंग का एक टैग पशुओं को लगाया जा रहा है। यह टैग आसानी से नहीं निकलता है। यह काफी मजबूत भी है। इस पर किसी वाहन की नंबर प्लेट की भांति नंबर भी लिखे हुए हैं। यही पशु का यूनिक आईडी नंबर होगा।

यह होगा लाभ-

पालतू पशुओं का यूनिक आईडी बन जाने के बाद पशु की पहचान कभी भी कोई भी व्यक्ति ऑनलॉइन कर सकता है। मवेशी के खरीदने-बेचने के दौरान भी उसके व मालिक के बारे में जानकारी एक क्लिक पर सामने आ सकेगी। यदि किसी क्षेत्र में पशुओं में कोई बीमारी फैल रही हो और उस जगह का कोई पशु अन्य जिले या प्रदेश में ले जाया गया है तो उसकी पहचान पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी यूनिक आईडी से कर सकेंगे। उसके बाद उपचार सहित अन्य आवश्यक कदम उठाए जा सकने में मदद मिलेगी।

बीमा कराने के लिए अलग से टैग लगाने की बजाय इसी यूनिक आईडी से काम हो जाएगा। मवेशी की कभी कोई घटना-दुर्घटना हो जाए और उसके मालिक का पता तलाशना हो तो यूनिक आईडी से पहचान की जा सकेगी।

इनका कहना है... जिले को 34 हजार टैग भेजे गए हैं जो मवेशियों के कानों में लगवाए जा रहे हैं। यह कार्य पूरा होते ही टैग वाले मवेशियों की पूरी जानकारी बन जाएगी जो प्रत्येक ऐसी मवेशी की यूनिक आईडी होगी। इस नई व्यवस्था का लाभ पशु और उनके मालिक क ो आगामी दिनो में मिलेगा। डॉ. बीबी एस चौहान उपसंचालक पशुपालन विभाग अनूपपुर