सुधीर नागले, छपारा/ सिवनी। आम तौर पर सरकारी स्कूलों में पांचवीं तक के अधिकांश बच्चों को बारहखड़ी और पहाड़े तक याद नहीं रहते हैं लेकिन माहुलपानी गांव के प्रायमरी स्कूल के बच्चों को अपनी किताबों के साथ देश-विदेश की महत्वपूर्ण जानकारियां कंठस्थ हैं।

इतना ही नहीं इस गांव के निरक्षर बुजुर्गों को भी अब लिखना-पढ़ना आने लगा है। यह सब माहुलपानी में पदस्थ सहायक अध्यापक राजेश परते की मेहनत से हुआ है। राजेश परते न केवल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाई के साथ देश-विदेश की सामान्य जानकारियों से अवगत करा रहे हैं। रात में गांव के बुजुर्गों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं। पूरे गांव को शिक्षित करने की मुहिम अध्यापक ने निस्वार्थ भाव से छेड़ी है।

30 सेकंड में बता देते हैं 52 जिलों के नाम

माहुलपानी के प्रायमरी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र गूगल से कम नहीं हैं, उन्हें अपने गांव के सरपंच से लेकर देश-विदेश के राष्ट्रपति के नाम और विभिन्न् प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के नाम मौखिक याद हैं, इन छात्रों को देश में बहने वाली मुख्य नदियों की जानकारी से लेकर और भी कई जानकारियां हैं जिन्हें पूछते ही हाजिर जवाब देते हैं।

स्कूल के पांचवीं के छात्र लोकेश राठौर 30 सेकंड में ही प्रदेश के 52 जिलों के नाम बता देते हैं उनकी जुबान पर देश के महापुरुषों व महानगरों के नाम यूं रटे हुए हैं जैसे गूगल में क्लिक करते ही जानकारी सामने आ जाती है।

चौथी कक्षा के छात्र सत्यम राठौर भी इसी तरह की याददाश्त के धनी हैं। माया राठौर नाम की छात्रा भी कुशलता से सामान्य ज्ञान के प्रश्नों का जवाब चुटकियों में देती हैं। इन बच्चों को होनहार बनाने में सहायक अध्यापक राजेश परते ने कड़ी मेहनत की है।

रात के अंधकार में शिक्षा की अलख जगा रहे राजेश

शिक्षक राजेश परते स्कूल से छुट्टी के बाद भी लोगों को पढ़ाने और साक्षर करने में जुटे हैं। अपने जुनून के चलते अब वह रात में गांव के लोगों को चौपाल लगाकर पढ़ाते हैं। इसके एवज में वह उनसे कोई फीस नहीं लेते। उनका कहना है कि बच्चों के पालक यदि शिक्षा के महत्व को समझ जाएंगे तो अपने बच्चों को मजदूरी और खेत में काम कराने के बजाए स्कूल भेजेंगे।

इसी उद्देश्य के साथ वह प्रतिदिन रात में समय निकालकर ग्रामीणों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। गांव में सीमित संसाधन हैं जहां कई बार बिजली भी नहीं रहती है। 20 से 25 लोगों के बैठने की जगह नहीं होने पर किसी भी ग्रामीण के आंगन में बैठते हैं।

शिक्षक राजेश परते का कहना है कि प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले लगभग सभी बच्चे गरीब और मजदूर किसानों के हैं। वह चाहते हैं कि बच्चे पढ़कर एक काबिल इंसान बनें और उच्च पदों पर पहुंचकर अपने गांव का नाम रोशन कर देश और प्रदेश में अपनी पहचान बनाएं।

इनका कहना है

माहुलपानी जैसे छोटे से गांव के प्रायमरी स्कूल के बच्चों को कोर्स के साथ सामान्य ज्ञान में पारंगत करने के साथ बुजुर्गों को निशुल्क शिक्षित करने का काम सहायक अध्यापक राजेश राय कर रहे हैं। यह प्रशंसनीय काम है। अब गांव के बुजुर्ग भी साक्षर हो रहे हैं। सुनील राय, बीआरसी छपारा सिवनी