Naidunia
    Wednesday, April 25, 2018
    PreviousNext

    बेहिसाब डीजल पर कमिश्नर ने पहली बार इंजीनियरों और एएचओ की ली क्लास, अधिकारियों को जारी किए नोटिस

    Published: Thu, 15 Mar 2018 04:10 AM (IST) | Updated: Thu, 15 Mar 2018 04:10 AM (IST)
    By: Editorial Team

    - कहा- बताएं डीजल का कैसे किया बेहिसाब खर्च, क्यों न आपके जीपीएफ से हो वसूली

    - आधा दर्जन ड्राइवरों को हटाया, कुछ को केंद्रीय कर्मशाला में किया अटैच

    - डीजल चोरी पर निगम कमिश्नर की पहली बड़ी कार्रवाई

    भोपाल नवदुनिया प्रतिनिधि। नगर निगम की गाड़ियों में हो रही डीजल चोरी पर निगम कमिश्नर प्रियंका दास ने जलकार्य के 14 इंजीनियरों, सभी 19 एएचओ, प्रभारी फायर ऑफिस, प्रभारी सीवेज को नोटिस जारी किया है। सात दिनों के अंदर पिछले चार महीने में लिए गए डीजल की मात्रा और खर्च का ब्यौरा मांगा है। नोटिस में यह भी कहा है कि गाड़ी कितने किमी चली। ड्राइवर द्वारा बताए गए एवरेज से अधिक डीजल का दुरुपयोग किया यह भी बताएं। कमिश्नर ने चेतावनी भी दी है कि निर्धारित से अधिक खर्च होने पर डीजल की रकम उनके जीपीएफ से वसूली की जाएगी।

    बुधवार को निगम कमिश्नर ने प्रभारी फायर ऑफिसर, तीन एएचओ और तीन जोन के सहायक यंत्रियों को बुलाकर उनसे वन टू वन चर्चा भी की। बातचीत के दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि क्यों न दुरुपयोग हुए डीजल को आपके जीपीएस से काटा जाए। कमिश्नर गत नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी चार महीने का रिकार्ड बुलाया था। रोजाना 200 लीटर तक खर्च वाली गाड़ियों को चिन्हित किया गया है। बता दें कि निगम के करीब 950 वाहन हैं, इनमें से 570 वाहनों में जीपीएस लगाए जा चुके हैं। जीपीएस के हिसाब से गाड़ियां कितने किमी चली और कितना डीजल खर्च हुआ, इसकी चार महीने की रिपोर्ट भी आ चुकी है।

    ------

    स्वच्छ भारत मिशन खत्म होने का था इंतजार

    निगम कमिश्नर इससे पहले भी जलकार्य शाखा, फायर और सीवेज शाखा के 15 अधिकारियों को नोटिस जारी कर चुकी हैं, लेकिन स्वच्छता अभियान के चलते स्वास्थ्य शाखा की गाड़ियों को छोड़ा गया था। अब सफाई अभियान खत्म होते ही स्वास्थ्य की गाड़ियों पर हुए डीजल खर्च पर नोटिस जारी किया गया है।

    -------

    ऐसे पकड़ी डीजल की चोरी

    ड्राइवरों ने बढ़ा हुआ एवरेज के हिसाब से डीजल की मात्रा की जरूरत बताई, इसी हिसाब से इंडेंट बुक जारी कराकर निगम के डीजल टैंक से डीजल लिया गया। लेकिन जीपीएस की रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि ड्राइवरों द्वारा बताए गए एवरेज से भी कम किमी गाड़ी चल पाई और डीजल खत्म हो गया। इससे गड़बड़ी पकड़ में आई। ऐसी ही बड़ी कचरा गाड़ियों, फायर ब्रिगेड, सीवेज की गाड़ियों, टैंकरों को चिन्हित किया गया है।

    ------

    मॉनिटरिंग नहीं करने से डीजल पर नहीं हुआ नियंत्रण

    ड्राइवर ने जितना डीजल की जरूरत बताई, उसी हिसाब से अधिकारियों ने इंडेंट बुक जारी कर दिए। अधिकारियों को गलती ये रही कि उन्होंने वास्तव में गाड़ी कितने किमी चल रही है इसकी मॉनिटरिंग ही नहीं की। कुछ ने सेटिंग करके डीजल चोरी होने दिया।

    ----------

    ड्राइवरों को हटाया

    बताया जा रहा है कि निगम कमिश्नर ने ज्यादा गड़बड़ी की आशंका वाले आधा दर्जन ड्राइवरों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया। वहीं कुछ को छोटी गाड़ियों में शिफ्ट किया गया। एक दो ऐसे भी ड्राइवर थे, जिन्हें केंद्रीय कर्मशाला से अटैच कर दिया गया।

    --------

    प्रभारी बदले पर अब भी चोरी हो रहा डीजल

    बता दें कि तत्कालीन कमिश्नर छवि भारद्वाज ने निगम के डीजल पंप में छापेमारी की थी, इसमें डीजल चोरी मिलने पर उन्होंने तत्कालीन टैंक प्रभारी मधुसूदन तिवारी को हटा दिया था। इसके बाद प्रेमशंकर शुक्ला को प्रभारी बनाया था। साथ ही सभी गाड़ियों में जीपीएस लगाकर चोरी रोकने की कवायद शुरू की गई थी। अक्टूबर-नवंबर से जीपीएस रिपोर्ट आने से काफी हद तक डीजल खर्च कम तो हुआ लेकिन अभी भी डीजल चोरी होती रही।

    और जानें :  # fUrnfUrnrufUn
    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें